Gujarat Riots : पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार अरेस्ट, तीस्ता सीतलवाड़ के बाद दूसरी गिरफ्तारी

गुजरात दंगा 2002 (gujarat riots 2002) मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी आरबी श्रीकुमार की गिरफ्तारी (ex dgp rb sreekumar arrested) हुई है। तीस्ता सीतलवाड़ के बाद श्रीकुमार को गिरफ्तार किया गया है।

अहमदाबाद, 26 जून : गुजरात के पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार को गिरफ्तार किया गया है। 2002 के गुजरात दंगा (gujarat riots) मामले में तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी के बाद श्रीकुमार दूसरे व्यक्ति हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने करीब 20 साल पहले हुई भयानक हिंसा के मामले में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने समीक्षा की अपील ठुकराते हुए अपने फैसले में कहा, ऐसा लगता है कि इस मामले को जबरन जिंदा रखने का प्रयास किया गया। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत के फैसले के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने भी नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाने वाले लोगों को आड़े हाथों लिया है। पढ़िए पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार की गिरफ्तारी पर वनइंडिया हिंदी की ये रिपोर्ट

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    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गिरफ्तारी

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गिरफ्तारी

    2002 के गुजरात दंगों सु जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के एक दिन बाद गुजरात के पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार को अरेस्ट किया गया है। इंस्पेक्टर डीबी बराड द्वारा दायर शिकायत में कहा गया है कि तीस्ता सीतलवाड़, संजीव भट्ट और आरबी श्रीकुमार ने झूठे सबूत गढ़कर कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की साजिश रची।

    पूर्व डीजीपी पर गंभीर आरोप, मानहानि का मुकदमा

    पूर्व डीजीपी पर गंभीर आरोप, मानहानि का मुकदमा

    गुजरात दंगों से जुड़े केस पर एनडीटीवीडॉटकॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व डीजीपी बी श्रीकुमार के खिलाफ दर्ज शिकायत में दावा किया गया है कि नानावती-शाह आयोग के समक्ष आर बी श्रीकुमार के जो नौ हलफनामे दायर किए, जकिया जाफरी ने अपनी याचिका में हलफनामे में लिखी गई बातों के आधार पर कई आरोप लगाए थे। गौरतलब है कि 2014 के लोक सभा चुनाव से पहले भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ बी श्रीकुमार ने आपराधिक मानहानि और साजिश का मुकदमा किया था। पीटीआई की 2013 की फोटो के मुताबिक नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में ये केस किया गया।

    डीजीपी से पहले सीतलवाड़ की गिरफ्तारी

    डीजीपी से पहले सीतलवाड़ की गिरफ्तारी

    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगा मामलों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मिली क्लीन चिट बरकरार रखी है। मोदी को दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से क्लीन चिट मिली थी। शीर्ष अदालत के फैसले के एक दिन बाद, गुजरात पुलिस ने शनिवार को पूर्व पुलिस महानिदेशक आर बी श्रीकुमार को गिरफ्तार कर लिया। सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को भी हिरासत में लिया गया है। सीतलवाड़ को निर्दोष लोगों को झूठा फंसाने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

    संजीव भट्ट पहले से ही जेल में बंद

    संजीव भट्ट पहले से ही जेल में बंद

    गौरतलब है कि अहमदाबाद अपराध शाखा के एक अधिकारी की ओर से दर्ज शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई है। इसमें पूर्व आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी संजीव भट्ट का भी नाम है। भट्ट एक अन्य मामले में पहले से ही जेल में बंद हैं। संजीव भट्ट को हिरासत में मौत के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। एक अन्य मामले में भट्ट पर आरोप है कि उन्होंने झूठे मामले में वकील को फंसाने के लिए प्रतिबंधित सामग्री का इस्तेमाल किया।

    Gujarat Riots : तीन लोगों पर गंभीर आरोप

    Gujarat Riots : तीन लोगों पर गंभीर आरोप

    बता दें कि आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट 2002 के गोधरा दंगों के दौरान सशस्त्र इकाई के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) थे। इस समय आरबी श्रीकुमार खुफिया विंग में डीजीपी - थी। दोनों पर आरोप हैं कि इन्होंने नानावती जांच आयोग के समक्ष कई बयान दिए थे जो गुजरात सरकार के खिलाफ थे। दोनों के खिलाफ शिकायत में कहा गया है कि संजीव भट्ट ने एसआईटी को भेजे गए विभिन्न दस्तावेजों में कथित तौर पर फर्जीवाड़ा किया और यह भी झूठा दावा किया कि वह 27 फरवरी, 2002 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर बुलाई गई बैठक में शामिल हुए थे।

    तीस्ता सीतलवाड़ ने दिया गलत हलफनामा ?

    तीस्ता सीतलवाड़ ने दिया गलत हलफनामा ?

    सुप्रीम कोर्ट में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य के खिलाफ दायर याचिका में तीस्ता सीतलवाड़ के साथ उनका गैर-सरकारी संगठन और जकिया जाफरी सह-याचिकाकर्ता थे। तीस्ता के खिलाफ शिकायत में गवाहों को प्रभावित करने और उन्हें पढ़ाने और उन्हें पहले से टाइप किए गए हलफनामों पर गवाही देने का भी आरोप लगाया गया है। आरोप है ​कि जाकिया जाफरी को भी तीस्ता सीतलवाड़ ने पढ़ाया। ये बात 22 अगस्त 2003 को नानावती आयोग के समक्ष उनके बयान से भी स्पष्ट होता है।

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