गुजरात चुनावः कांग्रेस के सामने क्या हैं पांच मुश्किलें?
गुजरात में दिसंबर के महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं. गुजरात देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह प्रदेश है और वो यहां तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं.
मोदी के लिए ये चुनाव बहुत महत्वपूर्ण हैं. उनके सामने कांग्रेस पार्टी खड़ी है जो पिछले 20 सालों में पहली बार जुनून और आत्मविश्वास से भरी दिख रही है.
लेकिन कांग्रेस के सामने पांच चुनौतियां हैं.
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1. गुजरात में बीजेपी 20 सालों से सत्ता में है. उसकी राज्य के शहरी क्षेत्रों पर बहुत गहरी पकड़ है. बीजेपी अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी काफ़ी लोकप्रिय है.
हालांकि सरकार में रहते उसे एक लंबा अरसा हो गया है लेकिन उसके समर्थकों में कमी नहीं हुई है.
राज्य में हुए विकास का लाभ भी उसके समर्थक तबके को ही मिला है. सरकार से नाराज़गी के बावजूद वो बीजेपी को ही अपना वोट देना पसंद करेंगे.
2. गुजरात को हिंदुत्व की प्रयोगशाला कहा जाता है. बीजेपी सरकार और प्रशासन राज्य में हिंदुत्व की विचारधारा पर काम करते हैं.
सरकार ने हिंदुत्व को विकास से भी जोड़ा है. और यह गुजरात के मतदाताओं को भी पसंद है.
3. बीजेपी और मोदी ने यहां मतदाताओं को यह आश्वासन देने में कामयाब रहे हैं कि कांग्रेस एक हिंदू विरोधी और मुसलमानों के हित में काम करने वाली पार्टी है.
पिछले चुनावों में मोदी ने इस सिद्धांत का सफ़लतापूर्वक उपयोग किया. गुजरात में मुसलमानों के प्रति हिंदुओं में नफ़रत साफ़ दिखता है.
यहां चुपचाप लोगों को वैसे वीडियो संदेश भेजे जाते हैं जिसमें मतदाताओं को याद दिलाया जाता है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आयी तो मुस्लिम आक्रामक हमला करेंगे और उनकी बहु बेटियां यहां सुरक्षित नहीं रहेंगी.
मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग बीजेपी के इस प्रचार में विश्वास करता है.
4. कांग्रेस पहली बार बीजेपी को पूरे आत्मविश्वास के साथ चुनौती देने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसने मुख्यमंत्री के रूप में किसी को पेश नहीं किया है और न ही राज्य के विकास के लिए एक ठोस योजना का खुलासा ही किया है.
मोदी अगले हफ़्ते से अपना चुनाव अभियान शुरू करेंगे जबकि कांग्रेस बहुत पहले ही यह शुरू कर चुकी है.
मोदी गुजरात की सियासत के धुरंधर हैं और कांग्रेस उनके क़द का आकलन करने में सक्षम होगी यह बहुत मुश्किल लग रहा है.
5. 2019 के संसदीय चुनावों के मद्देनज़र प्रधानमंत्री मोदी के लिए गुजरात में जीत दर्ज करना बेहद महत्वपूर्ण है.
अगर ऐसा नहीं होता है तो न केवल वो राजनीतिक रूप से कमज़ोर हो जाएंगे बल्कि पार्टी पर उनकी पकड़ भी ढीली पड़ जाएगी.
इसलिए गुजरात की जीत उनके लिए 'करो या मरो' की स्थिति जैसी है.
इस चुनाव में जीत के लिए बीजेपी अपने सभी संसाधनों और राजनीतिक दांवपेंच का इस्तेमाल करेगी.
निश्चित ही कांग्रेस के लिए इस चुनौती का सामना करना बहुत कठिन हो सकता है.












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