गुजरात में कांग्रेस हारी लेकिन हार्दिक ने किया अपना काम, सौराष्ट्र के आकड़ों से पूरा गणित समझिए

हार्दिक पटेल के नेतृत्व में शुरू हुआ पटेल आरक्षण आंदोलन से बीजेपी को नुकसान हुआ है, तो वहीं कांग्रेस को फायदा मिला है।

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात में जोर तो बहुत लगाया लेकिन अंतिम समय में कामयाब नहीं हुए और बीजेपी एक बार फिर से गुजरात में सरकार बनाने जा रही है। बात हार्दिक पटेल की करें तो उन्होंने कांग्रेस के लिए खूब मेहनत की और जो टास्क उनके जिम्मे था उसको पूरा करने में कामयाब रहे। पाटीदार का मजबूत गढ़ माने जाने वाले सौराष्ट्र में बीजेपी को बड़ा नुकसान हुआ है। कांग्रेस को बीजेपी से ज्यादा सीटें मिली है। बीजेपी को पाटीदारों की नाराजगी का नुकसान उठाना पड़ा है, जबकि वहीं हार्दिक पटेल का हाथ कांग्रेस के साथ रहने का फायदा मिला है।

हार्दिक पटेल ने किया अपना काम

हार्दिक पटेल ने किया अपना काम

हार्दिक पटेल के नेतृत्व में शुरू हुआ पटेल आरक्षण आंदोलन से बीजेपी को नुकसान हुआ है, तो वहीं कांग्रेस को फायदा मिला है। हार्दिक पेटल की बगावत कांग्रेस के लिए काम आई। सौराष्ट्र क्षेत्र की 29 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज करती हुई नजर आ रही है। बता दें कि 2015 में हुए जिला पंचायत चुनाव में से सौराष्ट्र की 11 में से 8 पर कांग्रेस विजयी रही थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने गुजरात चुनाव प्रचार का आगाज का सौराष्ट्र क्षेत्र से ही शुरू किया था। उन्होंने द्वारकाधीश मंदिर से राहुल ने गुजरात में नवसृजन यात्रा शुरू किया था।

सौराष्ट्र पाटीदार बाहुल्य क्षेत्र है

सौराष्ट्र पाटीदार बाहुल्य क्षेत्र है

आपको बता दें कि सौराष्ट्र पाटीदार बाहुल्य क्षेत्र है। गुजरात की राजनीति में सौराष्ट्र की काफी अहम भूमिका है। राज्य की 182 विधानसभा सीटों में से 54 सीटें इस क्षेत्र से आती हैं। इस क्षेत्र में कांग्रेस को फायदा मिला है। कांग्रेस को 29 सीटें मिली है। जबकि बीजेपी को 25 सीटें मिली है। जबकि पिछले 2012 के चुनाव में 35 सीटें बीजेपी को और 16 कांग्रेस और 3 अन्य को मिली थी।

सौराष्ट्र के जरिए बीजेपी सत्ता में आई थी

सौराष्ट्र के जरिए बीजेपी सत्ता में आई थी

सौराष्ट्र में बीजेपी की साख बनाने में केशुभाई पटेल ने बड़ी मेहनत की थी। इसी का नतीजा था कि कांग्रेस सरकारों के जीत का सिलसिला खत्म कर राज्य में पहली बार 1995 में बीजेपी की सरकार बनी। 1995 में सौराष्ट्र की 52 में से 44 सीटों पर जीत केशुभाई पटेल पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। बीजेपी से केशुभाई पटेल के बगावत के बाद भी सौराष्ट्र क्षेत्र में बीजेपी की पकड़ कमजोर नहीं हुई थी। पिछले 2012 के विधानसभा चुनाव में सौराष्ट्र में बीजेपी का जलवा बरकरार रहा था। सौराष्ट्र के पाटीदारों ने केशुभाई पटेल को नकारा दिया था। गुजरात की कमान जब तक नरेन्द्र मोदी के हाथों में रही सौराष्ट्र बीजेपी के पक्ष में रहा। मोदी सौराष्ट्र में सबसे ताकतवर पोस्टर बॉय रहे हैं। लेकिन इस बार सौराष्ट्र में बीजेपी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। इसके पीछे हार्दिक पटेल को वजह माना जा रहा है।

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