Gujarat election 2017: कांग्रेस ने भानुमति का कुनबा जोड़ा, कहीं की ईट कहीं का रोड़ा
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नई दिल्ली। गुजरात चुनाव में पहली लिस्ट जारी कर बीजेपी ने तो बाजी मार ली है और अपना आत्मविश्वास झलका दिया है पर कांग्रेस असमंजस में है। असल में असमंजस की वजह सहयोगियों का बढ़ता दवाब है जिसकी वजह से लिस्ट अब भी लटकी हुई है। दस जनपथ पर बैठक के बाद भी गुजरात के पार्टी प्रभारी अशोक गहलोत मान रहे हैं कि एक-दो दिन लग जाएंगे। इसकी वजह जो उन्होंने बताई है उसके मुताबिक एनसीपी और जनता दल शरद यादव गुट का मसला है। जो वजह उन्होंने नहीं बताई है और सबसे अहम है वो हार्दिक पटेल गुट की है। पार्टी पर सबसे ज्यादा दवाब इसी गुट का है। इन तीनों के फेर के साथ ही अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश का भी मसला है। कांग्रेस अपने उम्मीदवारों को लेकर किसी असमंजस में नहीं लेकिन अपने सहयोगी दलों या संगठनों के चक्कर में पार्टी को ठंड के मौसम में भी पसीना आ रहा है।

एक को मनाते हैं तो दूसरे के रूठने का खतरा है
एक को मनाते हैं तो दूसरे के रूठने का खतरा है और दूसरे को मनाते हैं तो पहला धमकी देने लगता है। हार्दिक पटेल गुट चाहता है कि पाटीदार बाहुल्य सीटों पर जो टिकट तय हों उसमें उनकी सहमति हो। बीजेपी की लिस्ट में करीब 15 पाटीदार उम्मीदवारों से ये दवाब और बढ़ गया है जबकि बीजेपी ने भी पहले चरण की 89 सीटों पर अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। हार्दिक पटेल का दूसरा दवाब आरक्षण के मुद्दे को लेकर है। उनके गुट की मांग है कि आरक्षण पर कांग्रेस अपनी नीति साफ करे ताकि बीजेपी को जवाब दिया जा सके और पाटीदार समाज की एकजुटता बनी रहे। अन्यथा कांग्रेस के साथ ही हार्दिक पटेल गुट को भी दिक्कत हो सकती है और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगेंगे।

हार्दिक पटेल गुट हाईकमान की शरण में
इधर शरद यादव गुट के छोटू भाई बसावा मौजूदा विधायक हैं और कांग्रेस फिलहाल इस सीट के अलावा एक और सीट देने का मन बनाए हैं जबकि ये गुट भी पांच से सात सीट मांग रहा है। इसके अलावा एनसीपी के दो विधायक हैं और वो भी अपनी मौजूदा सीटों के अलावा और भी सीट चाहती है। हालत ये है कि कांग्रेस ने भानुमति का कुनबा जोड़ा है और इसमें कहीं की ईंट और कहीं का रोड़ा है जिसे संभालना पाना मुश्किल हो रहा है। पार्टी चाहती है कि कांग्रेस के मौजूदा विधायक भी नाराज न हों और उनके पुराने कार्यकर्ता भी। इसके साथ ही बाकी दल भी, इसी यक्ष प्रश्न का जवाब तलाशने के लिए बैठकों के दौर लगातार चल रहे हैं। यहां तक कि हार्दिक पटेल गुट और कांग्रेस के गुजरात अभियान में जुटे दिग्गज हाईकमान की शरण में हैं, पर जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है जिससे लिस्ट का इंतजार लंबा होता जा रहा है।

गुणा भाग में देरी से कांग्रेस बैकफुट पर
यही नहीं अब पार्टी को ये भी ध्यान रखना है कि बीजेपी के उम्मीदवारों के जवाब में किसको टिकट दिया जाए और किसे नजरअंदाज किया जाए। इसी गुणा भाग में देरी हो रही है जिससे कांग्रेस बैकफुट पर दिख रही है। दरअसल बीजेपी का नेतृत्व स्पष्ट है और मोदी-अमित शाह की अगुवाई में निर्णय लेने में कोई असंजस नहीं है। न ही उन पर किसी सहयोगी दल का दवाब है। भले ही शिवसेना अलग से चुनाव लड़ने की धमकी दे रही हो पर बीजेपी परवाह नहीं कर रही लेकिन कांग्रेस समझ रही है कि यदि ये मौका चूक गए तो 2019 के चुनाव की तैयारियों को भी बड़ा झटका मिलने वाला है।












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