क्या BJP की राह चली AAP ? 10 साल पुरानी रणनीति से गुजरात में भाजपा का किला भेदने की तैयारी
गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने की तैयारी में है। भाजपा के पैटर्न पर AAP जमीनी संगठन मजबूत करने में जुटी है। gujarat assembly polls aap panna parivar pramukh strategy
अहमदाबाद, 22 अगस्त : गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) भाजपा को कड़ी चुनौती देने के तमाम प्रयास कर रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक AAP ने भाजपा के पैटर्न पर पन्ना परिवार प्रमुख (panna parivar pramukh strategy) और ग्राम समितियों के माध्यम से संगठन को मजबूत करने की शुरुआत की है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में AAP भाजपा का मुकाबला करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के जमीनी संगठन से प्रेरित AAP ने पन्ना परिवार प्रमुख और ग्राम समितियों में 50 वालेंटियर्स को शामिल किया है। इनकी भूमिका जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत बनाना है।

क्या है AAP की रणनीति
गुजरात की चुनावी राजनीति में AAP भले ही एक नई दावेदार है, लेकिन पंजाब विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत से उत्साहित आम आदमी पार्टी प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य में भी ताल ठोक रही है। खबर के मुताबिक AAP के एक वरिष्ठ नेता ने कहा की साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आप अपना जमीनी संगठन मजबूत करने पर काम कर रही है। इसी कड़ी में पन्ना परिवार प्रमुख और ग्राम समितियों में 50 स्वयंसेवकों को शामिल किया गया है।
10 साल बाद भाजपा की राह पर AAP
बता दें कि भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने करीब 10 साल पहले पार्टी प्रमुख रहने के दौरान पन्ना प्रमुख की भूमिका को समझा था। उन्होंने बूथ लेवल पर जमीनी संगठन को मजबूत करने के मकसद से पन्ना प्रमुख को तरजीह दी थी। AAP भी इसी पैटर्न पर गुजरात में काम कर रही है। आप के संयुक्त राष्ट्रीय महासचिव ईसुदान गढवी ( Isudan Gadhvi) के मुताबिक AAP पन्ना परिवार प्रमुख की नियुक्तियां कर रही है। इसका मकसद पन्ना यानी मतदाता सूची के हर पेज को कवर करना होगा। यानी इस रणनीति के तहत AAP मतदाता सूची में शामिल हर वोटर तक पहुंचने का प्रयास करेगी।
AAP कर रही माइक्रो मैनेजमेंट
दिलचस्प है कि भाजपा ने आज से करीब 10 साल पहले 2012 में पन्ना प्रमुख या पेज कमेटी मॉडल की शुरुआत की थी। अब इसी पैटर्न पर AAP के पन्ना परिवार प्रमुख की नियुक्ति के तहत मतदाता सूची के हर पेज पर एक प्रभारी और सदस्यों को रखा गया है। पन्ना परिवार प्रमुख बूथ लेवल पर काम करेंगे। इससे संगठन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। पन्ना परिवार प्रमुख और सदस्य आप परिवार (AAP parivaar) में शामिल होंगे और वह पार्टी के पक्ष में मतदान करेंगे। गढवी का कहना है कि AAP माइक्रो मैनेजमेंट पर काम कर रही है और डोर टू डोर कैंपेन के तहत मतदाताओं को जागरूक करने का प्रयास कर रही है।
गुजरात में AAP एक अच्छा विकल्प
बता दें कि भाजपा की अभेद्य दुर्ग के रूप में मशहूर गुजरात में सियासी बहुमत हासिल करना AAP के लिए इतना आसान नहीं रहने वाला, क्योंकि गुजरात में 20 साल से अधिक समय से भाजपा की सत्ता है। AAP का दावा है कि अन्य दल जातिगत समीकरण में भरोसा करते हैं, लेकिन AAP सार्वजनिक समीकरण पर भरोसा करती है और ऐसी माइक्रो प्लानिंग से बीजेपी नहीं जीत सकेगी। आप नेता गढवी का मानना है कि भाजपा कार्यकर्ताओं का मोहभंग हो रहा है और बीजेपी नेतृत्व से मोहभंग के कारण AAP एक अच्छे विकल्प के रूप में उभर सकती है।
भाजपा कार्यकर्ता भी तंग आ चुके हैं
रेवड़ी कल्चर पर पीएम मोदी के बयान के संदर्भ में गढवी ने कहा कि भाजपा एक मजबूत संगठन है इसमें कोई संदेह नहीं लेकिन AAP का मानना है कि भाजपा का दौर बीत चुका है। भाजपा कार्यकर्ता भी पार्टी से तंग आ चुके हैं भाजपा कार्यकर्ताओं को यह समझ आ गया है कि बीजेपी के शीर्ष नेता उनका पूरा फायदा उठाते हैं और जब कार्यकर्ताओं की बात आती है तो नेता उन्हें मुफ्त रेवड़ी या फ्री बी (freebie) बताकर लाभ से वंचित रखते हैं।
वार्ड स्तर पर 6,000 समितियां
AAP गुजरात में अपना आधार विस्तार और गहरा करने के अपने लक्ष्य के तहत गुजरात के गांवों में प्रचार-प्रसार किया है। आप के संयुक्त राष्ट्रीय महासचिव ईसुदान गढवी ने बताया कि गुजरात के 18,000 गांवों में से 16,000 गांवों में समितियां बनाई जा चुकी हैं। वार्ड स्तर पर AAP की 6,000 समितियां हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण स्तर पर, पार्टी ने पदाधिकारियों के नामों की घोषणा की है। उनमें से प्रत्येक को पांच गांवों के समूह की देखभाल करने की जिम्मेदारी दी गई है। इन्हीं नेताओं ने 16,000 गांवों में समितियां बनाई हैं। प्रत्येक गांव में 10-50 स्वयंसेवकों की एक समिति होती है।
भाजपा को पछाड़ने की खास योजना
AAP महासचिव ईसुदान गढवी के मुताबिक गुजरात के 18,000 गांवों में से सभी गांवों में एक ग्राम समिति होगी। पिछले साल जून में आप में शामिल हुए पूर्व न्यूज एंकर गढवी ने पन्ना परिवार प्रमुखों की नियुक्ति पर कहा, AAP के ग्रामीण स्तर पर 1.5 लाख से अधिक समर्पित AAP कार्यकर्ता होंगे। एक पन्ना परिवार प्रमुख बूथ स्तर पर मतदाता सूची में AAP परिवार के सदस्यों के संपर्क में रहेगा। यह अभियान 15 सितंबर तक चलेगा। गढवी ने दावा किया कि संगठनात्मक ताकत के मामले में AAP भाजपा को पीछे छोड़ देगी। उन्होंने बताया कि गुजरात में जिला निकायों का गठन भी किया गया है। एक विधानसभा क्षेत्र को चार ब्लॉकों में बांट कर अलग-अलग संगठनात्मक सचिव बनाए गए हैं। एक सचिव के अधीन 12-55 'सर्कल प्रभारी' काम करेंगे। बता कें दि गुजरात की विधानसभा 182 सदस्यीय है।
गुजरात में कांग्रेस अब विकल्प नहीं
गढवी ने जोर देकर कहा, गुजरात में कांग्रेस अब मतदाताओं के लिए एक विकल्प नहीं है। पार्टी 20 से अधिक वर्षों से सत्ता से बाहर है। विपक्षी पार्टी को मुख्य रूप से भाजपा से तंग आ चुके लोगों के यानी भाजपा विरोधी वोट मिले हैं। वोटर्स के पास AAP जैसा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। बकौल गढवी, मजबूत कार्यकर्ता आधार या संगठनात्मक ताकत नहीं होने के बावजूद, फरवरी 2021 के स्थानीय निकाय चुनावों में, AAP को अहमदाबाद, राजकोट और सूरत में अहम वोट मिले। लोग गुजरात में एक बेहतर विकल्प तलाश रहे हैं। AAP जनाधार मजबूत कर चुकी है। गुजरात के लोग आशा से भरे हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के विभिन्न वर्गों के लिए पार्टी की गारंटी वाली घोषणाएं (चुनाव पूर्व वादे) लोगों को AAP की ओर आकर्षित करने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
क्या AAP ने उम्मीदवार उतारने में देरी की ?
गुजरात विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के नामों की घोषणा के सवाल पर गढवी ने कहा, पार्टी कुछ पीछे रह गई है। उन्होंने कहा, हमने जनवरी में बहुत पहले ही तय कर लिया था कि हम 30 उम्मीदवारों की पहली सूची अगस्त क पहले सप्ताह तक जारी कर देंगे। थोड़ी देर हुई है क्योंकि हमने केवल 10 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया है, लेकिन हमें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस पर भाजपा या कांग्रेस की टिकट पर कौन चुनाव लड़ेगा। बता दें कि AAP अगस्त की शुरुआत में ही गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा करने वाली पहली राजनीतिक पार्टी बन गई।
जल्दी टिकट बांटने के फायदे, डोर-टू-डोर कैंपेन पर ध्यान
AAP महासचिव का मानना है कि उम्मीदवारों के नामों की जल्द घोषणा से उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार में कड़ी मेहनत करने में मदद मिलेगी। AAP ने एक सर्वेक्षण के बाद 10 उम्मीदवारों के नाम घोषित किया है। इस पर गढवी ने कहा, सभी 10 सीटों पर हमारी बूथ समितियां तैयार हैं। हर बूथ पर 20 लोग हैं। टिकट देने के पहले फैक्टर्स के सवाल पर गढवी ने बताया, हमने पहले प्रत्येक सीट के 280-300 बूथों में से प्रत्येक पर एक कट्टर आप कार्यकर्ता (hardcore AAP worker) की पहचान की। सीटों के माइक्रो मैनेजमेंट पर ध्यान केंद्रित किया गया। मेगा रैलियों के बजाय घर-घर प्रचार होगा। उन्होंने कहा, AAP स्थानीय जाति समीकरण का मुकाबला करने के लिए AAP डोर-टू-डोर कैंपेन पर ध्यान केंद्रित करेगी। चुनाव प्रचार के इस तरीके के जरिए हम लोगों से पार्टी द्वारा किए गए वादों के बारे में जागरूकता फैलाएंगे।












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