गुजरात में हो गया अगर ये कमाल तो बीजेपी के बजाय कांग्रेस की होगी सरकार
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गांधीनगर। गुजरात विधानसभा चुनाव में मतदान और उसके परिणाम में एक महीने से भी कम का वक्त रह गया है। इस दौरान दोनों मुख्य दल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी अपना चुनावी प्रचार कर रहे हैं। ओपनियन पोल और खबरों में भी यह बताया जा रहा है कि गुजरात में मुकाबला कांग्रेस बनाम भाजपा है। यह कांग्रेस के लिए एक उपलब्धि की तरह है। अगर साल 2014 के लोकसभा चुनाव की तरह ही ट्रेंड बरकरार रहा तो कांग्रेस को भाजपा के खिलाफ लड़ने के लिए खासी मेहनत करनी होगी जो बीते 19 सालों से राज्य में सत्ता पर काबिज है। साल 2014 में भाजपा जो गुजरात में साल 1998 से सत्ता में है, उसने सभी 26 लोकसभा सीटें जीती हैं। अगर विधानसभा वार परिणामों को देखें तो भाजपा 182 सीटों में से 165 पर 59.05 फीसदी मत के साथ आगे थी वहीं कांग्रेस केवल 17 सीटों पर 32.86 फीसदी के साथ आगे थी। कांग्रेस को यह विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कम से कम 92 सीटों की जरूरत है तो वृहद स्तर पर 11.2 फीसदी वोटों को पार्टी की ओर शिफ्ट होना होगा।

ये थे 2012 के परिणाम
आंकड़ों के अनुसार साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा सौराष्ट्र और कच्छ की 54 से 52 सीटों पर आगे थी जबकि कांग्रेस सिर्फ 2 पर। वहीं उत्तरी गुजरात की कुल 53 सीटों में से 48 पर भाजपा और 5 पर कांग्रेस आगे थी। इसके साथ ही मध्य गुजरात की 40 विधानसभा सीटों में से 33 पर भाजपा और 7 पर कांग्रेस आगे थी। वहीं दक्षिणी गुजरात की 35 में से 32 सीटों पर भाजपा और 3 पर कांग्रेस आगे थी।

अगर कांग्रेस को चुनाव जीतना है तो
अगर कांग्रेस को यह विधानसभा चुनाव जीतना है तो सौराष्ट्र और कच्छ में 12 फीसदी मतों को स्विंग होना होगा जो सीटों के रूप 27-27 भाजपा और कांग्रेस दोनों में बटेगी। वहीं उत्तरी गुजरात में 10.5 फीसदी मतों के स्विंग होने की जरूरत है जिसमें भाजपा को 26 और कांग्रेस को 27 स टें मिल सकती हैं। इसके साथ ही मध्य गुजरात में 10 फीसदी मतों के स्विंग होने की आवश्यकता है जिसमें दोनों दलों में 20-20 सीटें बट सकती है।

सत्ता विरोधी लहर...
वहीं दक्षिणी गुजरात में 14.5 फीसदी मत अगर स्विंग हुए तो भाजपा को 17 औऱ कांग्रे सको 18 सीटें मिल सकती हैं। इस तरह भाजपा 90 और कांग्रेस 92 सीटें जीत सकती है। बता दें कि आंकड़ों के आधार के रूप में गुजरात के 2012 विधानसभा चुनावों की जगह साल 2014 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को आधार लिया गया है क्योंकि इसमें खासा निर्णायक बदलाव आया था और भाजपा को उसके केंद्रीय ध्रुव में उतार दिया। ऐसे में कांग्रेस को भाजपा के खिलाफ बनी 22 साल की विरोध लहर को आधार बनाना होगा।

बदलाव अप्रत्याशित नहीं
साल 2014 के बाद से इस तरह के बदलाव अप्रत्याशित नहीं हैं। दिल्ली विधानसभा चुनावों में बीजेपी के वोट शेयर में 14 प्रतिशत की गिरावट आई थी। त्रिकोणीय प्रतियोगिता में आम आदमी पार्टी को फायदा हुआ था। भाजपा एक मजबूत संगठन है; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो कि साढ़े 13 साल गुजरात के सीएम थे और अभी भी लोकप्रिय हैं।

GST, नोटबंदी और पाटीदार आंदोलन
हालांकि कांग्रेस के संभावित लाभ के पीछे जीएसटी और नोटबंदी शामिल है, जो केंद्र सरकार और भाजपा को मुश्किल में डाल सकती है। इसके अलावा, हाल ही में सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन - पाटीदार आंदोलन और दलित भूमि और आत्म-सम्मान आंदोलन ने भी कांग्रेस की मदद की है।












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