GST New Rates 2025: दुर्गा पूजा, दिवाली पर नए कपड़ें खरीदना हो जाएगा और सस्ता! 22 सितंबर से कितना घटेगा दाम?
GST New Rates cloth: त्योहारों का सीजन शुरू होते ही हर घर में नई-नई खरीदारी की लिस्ट बनने लगती है। खासकर दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों पर लोग नए कपड़े खरीदने को शुभ मानते हैं। लेकिन अबकी बार खास बात ये है कि कपड़ों की कीमतें आम लोगों की जेब पर ज्यादा भारी नहीं पड़ेंगी। वजह है -सरकार का नया जीएसटी (GST) स्लैब, जो 22 सितंबर 2025 से लागू हो रहा है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जीएसटी स्लैब में बड़ा बदलाव करते हुए यह साफ कर दिया है कि 2500 रुपये से कम कीमत वाले कपड़ों पर अब सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा। यानी अगर आप 2000 या 2500 रुपये तक का कोई शर्ट, साड़ी, कुर्ता या जींस खरीदते हैं तो उस पर 12% या 18% की बजाय सिर्फ 5% टैक्स देना होगा। इसका सीधा असर ये होगा कि त्योहारी सीजन में हर वर्ग का उपभोक्ता ज्यादा आसानी से नए कपड़े खरीद पाएगा।

रेडीमेड कपड़ों पर दो तरह के GST लगेंगे
22 सितंबर से रेडीमेड कपड़ों और कपड़ों के सामान पर जीएसटी की दरें इस प्रकार हैं, ₹2,500 प्रति पीस तक की कीमत वाले कपड़ों पर 5% जीएसटी लगेगा। ₹2,500 से अधिक कीमत वाले कपड़ों पर 18% जीएसटी लगेगा। यह एक नई और सरल दो-स्लैब वाली प्रणाली है, जिसने ₹1,000 की पुरानी सीमा को बदल दिया गया है। इस बदलाव का मतलब है कि अब किफायती कपड़े सस्ते हो गए हैं, जबकि महंगे कपड़ों की कीमत बढ़ गई है।
फैशन पर अब टैक्स का बोझ कम
आज के समय में फैशन सिर्फ अमीरों तक सीमित नहीं रहा। गांव-कस्बों से लेकर छोटे शहरों तक हर कोई ट्रेंडिंग कपड़े पहनना चाहता है। लेकिन टैक्स का बोझ अक्सर खरीदारी पर ब्रेक लगा देता था। नए नियम के तहत अगर किसी कपड़े की कीमत 2500 रुपये है तो उस पर सिर्फ 125 रुपये टैक्स लगेगा। जबकि पुराने टैक्स स्लैब में यही टैक्स 300 रुपये या उससे ज्यादा पड़ता था। यानी सीधे-सीधे 150 से 200 रुपये की बचत!
त्योहारों पर खुशियों की डबल डोज
दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों पर बिहार, यूपी, झारखंड समेत पूरे उत्तर भारत में कपड़ों की भारी डिमांड रहती है। बाजारों में भीड़ बढ़ जाती है और दुकानदारों की बिक्री कई गुना हो जाती है। अब जीएसटी दर घटने से कपड़े न सिर्फ सस्ते होंगे बल्कि दुकानदारों को भी ज्यादा ग्राहक मिलेंगे। इसका फायदा सीधे आम जनता को होगा, क्योंकि पहले जहां लोग बजट सोचकर सीमित कपड़े खरीदते थे, अब वे उसी पैसों में ज्यादा कपड़े ले सकेंगे।
व्यापारियों को उम्मीद है कि इस कदम से त्योहारी सीजन में बिक्री रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है। रिटेल स्टोर से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म तक हर जगह ग्राहकों को डिस्काउंट ऑफर के साथ-साथ टैक्स घटने का फायदा मिलेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि कपड़े सस्ते होने से छोटे दर्जी और बुटीक चलाने वालों की कमाई भी बढ़ेगी, क्योंकि ज्यादा लोग कपड़े सिलवाने या डिजाइन करवाने की तरफ बढ़ेंगे।
आम आदमी को राहत, अर्थव्यवस्था को सहारा
जीएसटी दर में यह बदलाव सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत रोजमर्रा के सामान और जरूरत की चीजों को किफायती बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे न केवल लोगों की जेब पर बोझ कम होगा बल्कि बाजार में मांग बढ़ने से अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।












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