GST काउंसिल की बैठक खत्म, राज्यों के नुकसान भरपाई पर नहीं बनी बात
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में सोमवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई। ये बैठक 5 अक्टूबर को हुई 42वीं बैठक का ही हिस्सा थी, जिसमें वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर समेत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौजूद रहे। लंबी बातचीत के बाद भी जीएसटी कलेक्शन में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति को लेकर कोई रास्ता नहीं निकला। लंबे वक्त से केंद्र सरकार इस मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रही है।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राज्यों को मुआवजे के भुगतान के लिए पर्याप्त मात्रा में सेस नहीं है। ये ऐसी स्थित है, जिसकी हमने कभी परिकल्पना नहीं की थी। अब राजस्व की कमी उधार लेकर ही पूरी होगी। इस बैठक में सेस कलेक्शन और कलेक्शन पीरियड पर भी चर्चा हुई। जिस पर वित्तमंत्री ने कहा कि सेस को 5 साल के लिए टाल दिया गया है। अब राज्यों को ये कर्ज सेस के जरिए चुकाना होगा। इससे राज्यों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
वित्त मंत्री के मुताबिक केंद्र ने उधार कैलेंडर जारी किया है। अगर मैं कैलेंडर से परे जाती हूं, तो यह तुरंत बॉन्ड सौदों को जैक कर देगा। साथ ही उन्होंने कहा कि उधार लेने का मतलब अराजक स्थिति नहीं है। केंद्र सरकार अपनी ओर से राज्यों को पूरी सुविधा प्रदान करेगी, ताकी राज्यों को ज्यादा ब्याज ना देना पड़े। साथ ही इस बैठक में कोई एकमत ना हुआ। उन्होंने राज्यों से अपील करते हुए कहा कि सभी जल्द से जल्द केंद्र सरकार को अपना जवाब दे दें, ताकी इस मुश्किल घड़ी में उन्हें फंड मिल सके।
केंद्र ने दिए थे दो ऑप्शन
केंद्र सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि लॉकडाउन की वजह से टैक्स कलेक्शन कम हुआ है, जबकि कोरोना की रोकथाम में खर्च ज्यादा। इस वजह से राज्यों को दो विकल्प दिए गए थे। इसमें पहला विकल्प था कि राज्यों को एक स्पेशल विंडो उपलब्ध करवाई जाएगी, जिसमें वो RBI से 97000 करोड़ रुपये का कर्ज ले सकते हैं। इसके लिए ब्याज दर कम होगी। इस कर्ज को 2022 तक के सेस से जमा करने की सुविधा दी गई थी। इसके अलावा दूसरे ऑप्शन के तहत 2.35 लाख करोड़ का कर्ज लिया जा सकता था।












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