पर्यटकों की बढ़ती संख्या से ताज को पहुंच रहा है नुकसान, 2 दिनों में आए 2 लाख पर्यटक
आगरा। इस साप्ताहांत 2 लाख से भी ज्यादा लोगों ने ताज का दीदार किया। पर्यटकों की यह संख्या अपने आप में एक रिकॉर्ड है। लेकिन संरक्षणकर्ताओं की नजर में पर्यटकों की बढ़ती संख्या ताज के अस्तित्व के लिए एक गंभीर विषय है।

संरक्षणकर्ताओं के अनुसार, यमुना नदी की तट पर बने इस प्यार की निशानी पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या का प्रभाव पड़ सकता है। मुगल शासक शाहजहां ताज को एक प्यार और शांति का प्रतीक बनाना चाहते थे। वहीं, आज के समय में हर दिन ताज को देखने 12,000 से ज्यादा पर्यटकों की भीड़ उमड़ी रहती है। पर्यटन विभाग के मुताबिक, इस त्योहार के मौके पर ताज को देखने लगभग 3 लाख से ज्यादा लोग आए थे। इनमें 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी फ्री एंट्री होती है।
शहर के संरक्षणकर्ता ने मांग की है कि आर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को ताज के पर्यटकों को सीमित करने की ओर तत्काल कदम उठाना चाहिए। पिछले साल 6 मिलियन से भी ज्य़ादा लोगों ने ताज का दीदार किया था। वहीं, इस साल पर्यटकों की संख्या में काफी तेजी देखने को मिल रही है। 27 सितंबर को आने वाला विश्व पर्यटन दिवस भी संरक्षणकर्ताओं को चिंता में डाले है। क्योंकि इस दिन ताज को देखने वालों संख्या में अत्यधिक बढ़ोतरी होती है। जिसमें देश के नहीं, बल्कि विदेशों से भी भारी संख्या में लोग भारत आते हैं।
1993 में सुप्रीम कोर्ट ने ताज के लिए हाई पॉवर एक कमिटी बनाई गई थी, जिसने पर्यटकों की संख्या में सख्ती से लगाम लगाया था। भारत के इतिहास में पहली बार ताजमहल को एक हफ्ते के लिए बंद कर दिया गया था। और साथ ही पर्यटकों के लिए समय सीमा तय कर दी गई थी।
संरक्षणकर्ताओं के अनुसार, ताज को देखने आने वाले पर्यटक उसकी दीवारों को छूते हैं। जिससे दीवारों की हालात बिगड़ती जा रही है। साथ ही गंभीर विषय यह भी है कि वर्षों से ताज के अंदर के बेसमेंट को साफ नहीं किया गया है। वहीं, साल दर साल यमुना नदी भी ताज से दूर होती जा रही है। ये सारे पहलु ताज के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहे हैं।
लिहाजा, जहां सरकारी और प्राइवेट दोनों ही तरह की पर्यटन इंडस्ट्री विदेशों से ज्यादा से ज्यादा पर्यटकों को भारत की ओर आकर्षित करना चाहती है। वहीं, संरक्षणकर्ता इस बढ़ती संख्या को लेकर चिंतित हैं।












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