ग्राउंड रिपोर्ट: मेरा बेटा मधु गुफ़ा में रहने लगा था

मधु की मां
Sonu A.V./BBC
मधु की मां

तीन हफ़्ते पहले केरल के जंगल में मधु नामक जिस आदिवासी युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वो हमेशा अपनी मां से कहते थे कि गुफ़ाओं में रहने को लेकर वो उनकी चिंता न किया करें.

मधु अपनी मां से कहते थे कि उनके बारे में वो फ़िक्र न किया करें क्योंकि वो जानवरों के साथ वहां सुरक्षित हैं. मधु की मां बेटी के साथ खाना खाते हुए एकाएक रोने लगती हैं.

मधु ने कभी नहीं सोचा होगा कि लोग उनकी हत्या कर देंगे. खाना चोरी करने के शक़ में 23 फ़रवरी को जब उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई तब उसमें से कुछ युवा सेल्फ़ी ले रहे थे.

मधु की 56 वर्षीय मां मल्ली अपने बेटे के जंगल की गुफ़ा में रहने के विचार को कभी भी पसंद नहीं करती थीं. वो अट्टापडी क्षेत्र के साइलेंट वेली नेशनल पार्क के अपने छोटे से घर से कुछ किलोमीटर दूर रहते थे.

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मधु की कब्र
Sonu A.V./BBC
मधु की कब्र

'खाना चुराने की संस्कृति नहीं'

मल्ली ने बीबीसी हिंदी से कहा, "मधु जब जंगल में सुरक्षित रहने की बात करता था तो मुझे भरोसा था. लोगों ने चोरी का इल्ज़ाम लगाकर मेरे बेटे की हत्या कर दी."

आंसू पोंछते हुए मल्ली कहती हैं, "वह चोर नहीं था. वो वैसा नहीं था कि चोरी करेगा. किसी की इजाज़त के बिना दूसरे का खाना खाना हमारी संस्कृति में ही नहीं है. ज़रूरत पड़ने पर वो हमेशा पूछता था."

कुछ लोगों के समूह ने जब ज़बर्दस्ती मधु को रोका तो उनके पास एक छोटा सा बैग था, जिसमें कुछ खाने के पैकेट थे. तब उन्होंने उनके बैग को टटोला और उसमें उन्हें कुछ पैकेट मिले. इसके बाद भीड़ ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया. बाद में किसी ने पुलिस को बुला लिया. अस्पताल ले जाते समय पुलिस की जीप में ही उनकी मौत हो गई.

मधु की मां बचपन की तस्वीर दिखाते हुए
Sonu A.V./BBC
मधु की मां बचपन की तस्वीर दिखाते हुए

शहद निकालने का काम करने लगे

पालक्काड ज़िले में मन्नारकड से मुक्कली पहुंचने के बाद कार छोड़नी पड़ती है और जीप शटल सेवा लेनी होती है.

यह शटल सेवा पथरीले इलाक़े में जनजातीय अस्पताल तक पहुंचाती है. यहां के रास्तों को रोड नहीं कहा जा सकता है. अस्पताल से 100 मीटर पहले जंगल में जाने के लिए एक पगडंडी जाती है जहां कोई भी शख़्स मधु का घर बता सकता है.

मधु के दादा का घर चिंदकीपाज़ायुर में था. तीन दशक पहले शादी के बाद मल्ली वहां चली गई थीं. पति की अचनाक मौत के बाद वह अपनी मां के घर आ गईं और बच्चों को पालने लगीं.

दोनों बेटियों सरासु (29) और चंद्रिका (8) ने पड़ोसी ज़िले वायनाड के आदिवासी स्कूल में 12वीं तक की पढ़ाई की.

सभी भाई-बहनों में सबसे बड़े मधु ने कोकमपलाय सरकारी स्कूल में छठी क्लास तक की पढ़ाई की. इसके बाद वह जंगल से शहद और जड़ी-बूटी इकट्ठा करने में लग गए जिसे वह चिंडक्की के कुरुम्बा अनुसूचित जनजाति सहकारी समिति में बेचा करते थे.

मल्ली आंगनवाड़ी केंद्र में सहायक के रूप में काम करती थीं जिससे उन्हें 196 रुपए मिलते थे. उनकी बेटी जब बड़ी हुईं तो वो अपने पति के घर वापस लौट आईं.

16 वर्ष की उम्र में मधु अजीब सा बर्ताव करने लगे. वो शांत रहते या कभी हिंसक हो जाते. उनका परिवार उन्हों कोझिकोड के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान लेकर गया.

मल्ली कहती हैं, "उन्होंने दवाई दी और वह कुछ दिनों तक खाता रहा, लेकिन बाद में उसने खाने से इनक़ार कर दिया."

उन्होंने कहा, "लेकिन कुछ समय बाद मधु ने गुफ़ा में जाना और वहां रहना शुरू कर दिया. एक बार जब वह ग़ायब हो गया था तो हमने पुलिस में शिकायत की थी. पुलिस ने उन्हें गुफ़ा में पाया था, लेकिन उसने घर वापस आने से इनकार कर दिया था."

मल्ली का कहना है कि वह अपने बेटे को दिन में दो बार खाना देने में समर्थ थीं. मधु जब गुफ़ा में रहते थे तो वह यह सुनिश्चित करती थीं कि उन्हें खाना मिले. उनकी आय छह हज़ार तक पहुंच गई थी और उनके दामाद भी घर में सहायता करते थे.

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मौत का क्या कारण था?

मधु की मौत का कारण क्या भूख थी या मानसिक रूप से बीमार लोगों को लेकर उदासीनता?

ज़िले के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभु दास बताते हैं, "वह अकेले रहता था और इस कारण से भूखा था. वह किसी को नुक़सान पहुंचाना नहीं चाहता था."

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की परियोजना निदेशक सीमा भास्कर कहती हैं, "आदिवासी संस्कृति में खाने को लेकर भावना अलग होती है. वे सोचते हैं कि खाना सिर्फ़ एक व्यक्ति से जुड़ा है. लोग आपको कई दिनों तक साथ खाना खिलाते हैं. इसी वजह से मैं सोचती हूं कि वह नहीं जानते होंगे कि खाना लेना चोरी होती है."

अट्टापडी में मधु में अकेले मानसिक रूप से बीमार शख़्स नहीं थे. डॉ. दास कहते हैं, "राज्य के मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 350 मरीज़ दर्ज़ हैं लेकिन 50 मरीज़ ही नियमित रूप से इलाज के लिए आते हैं."

पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर एक कार्यकर्ता ने अलग ही सवाल उठाया. उन्होंने कहा, "यह साफ़ है कि यह भूख की वजह से नहीं था. यह मानसिक बीमारी के कारण भी हो सकता है. यह भी हो सकता है कि वह किसी ग़ैर-क़ानूनी चीज़ के बारे में जान गए हों. आमतौर पर मधु जिस गुफ़ा में रहते थे वहां आसानी से कोई नहीं जाता है. उस क्षेत्र में दाख़िल होने से पहले वनकर्मियों को भी अनुमति लेनी होती है. तो वहां कैसे कई लोग पहुंचे और उन्हें पीट-पीटकर मार डाला."

मधु की कथित हत्या मामले में पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

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