• search

ग्राउंड रिपोर्टः बिहार के बोधगया में बौद्ध भिक्षु नाबालिग बच्चों से 'हस्तमैथुन करवाते थे'

By सीटू तिवारी बोधगया से, बीबसी हिंदी के
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts
    बोधगया, बौद्ध भिक्षु, बच्चों के साथ रेप, यौन शोषण, बिहार
    Getty Images
    बोधगया, बौद्ध भिक्षु, बच्चों के साथ रेप, यौन शोषण, बिहार

    बिहार के गया ज़िले के विष्णुपद मंदिर के पास बने असम भवन में सन्नाटा है. उसमें घुसकर ये अंदाजा लगाना मुश्किल है कि यहां 15 छोटी उम्र के लड़के रह रहे हैं.

    एक कमरे में ज़मीन पर एक कतार में पड़े शून्य में ताकते बच्चे. ना कोई खेल, ना कोई बातचीत और ना ही कोई शरारत. सब के बीच एक अनकही चुप्पी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता.

    ठीक यही हाल, इन बच्चों के मां बाप का भी है, जो असम के करबियंगला से पिछले चार दिनों पहले यहां आए हैं. ये बच्चे बोधगया के मस्तीपुर गांव स्थित प्रजना ज्योति बुद्धिस्ट नोविस स्कूल एंड मेडिटेशन सेंटर में पढ़ते थे.

    बोधगया, बौद्ध भिक्षु, बच्चों के साथ रेप, यौन शोषण, बिहार
    Seetu Tewari/BBC
    बोधगया, बौद्ध भिक्षु, बच्चों के साथ रेप, यौन शोषण, बिहार

    बीते 29 अगस्त को इस मेडिटेशन सेंटर में पढ़ने वाले बच्चों के साथ कथित तौर पर यौन शोषण का मामला सामने आया था.

    51 साल के अरूण विकास चकमा असम के लोगसोलियए गांव के है. छह बच्चों के पिता अरूण के दो बच्चे यहां पढ़ते है. उन्होने बीबीसी को बताया, "लड़कों को बौद्ध भिक्षु कमरे में बुलवाकर हस्तमैथुन करवाते थे. उन्होंने एक बच्चे को अपने साथ कोलकाता ले जाकर भी उसका यौन शोषण किया."

    "हम खेती करते हैं. इतना पैसा नहीं कि हम बच्चों की पढ़ाई पर ख़र्च कर सकें. इसलिए डेढ़ साल पहले बच्चों को यहां मुफ़्त में पढ़ने के लिए भेजे थे."

    भानुप्रिया का नौ साल का बेटा और 11 साल का भाई भी इस मेडिटेशन सेंटर में रह कर पढ़ाई करता था. उसके नौ साल के बेटे का शरीर घाव के दाग से भरा पड़ा है. माथे पर चोट का लंबा निशान है.

    वो बताती है, "29 तारीख को जब हम लोग यहां आए तो सभी बच्चे रोने लगे. मेरे बच्चे ने बताया कि उसे नंगा कर दिया जाता था, पिटाई होती थी और उसके निजी अंगों को बौद्ध भिक्षु खींच देते थे. नंगा और पिटाई करने का काम कई बार बौद्ध भिक्षु खुद, तो कई बार बड़े बच्चों से करवाते थे."

    मामला कैसे आया सामने

    असम के अरूण विकास चकमा की जान पहचान साधनानंद नाम के एक बौद्ध भिक्षु से पहले से थी. साधनानंद के कहने पर ही अरूण ने कई बच्चों को यहां धार्मिक पढ़ाई के लिए भेजा था. लेकिन 24 अगस्त की शाम को साधनानंद ने खुद अरूण को फ़ोन किया और बच्चों के बारे में जानकारी दी. जिसके बाद अरूण दूसरे बच्चों के अभिभावकों के साथ 29 अगस्त को बोधगया पहुंचे.

    मुंबई में रहने वाले साधनानंद ने बीबीसी से फ़ोन पर कहा, "मैं 22 अगस्त को मेडिटेशन सेंटर गया तो मुझे बच्चों के शरीर पर बहुत सारे निशान दिखे. इस बारे में मैंने बच्चों के अभिभावकों को बताया. बाक़ी मेडिटेशन स्कूल चलाने वाली प्रजना सोशल वेलफ़ेयर ट्रस्ट से मेरा कोई नाता नहीं. उनसे भी मेरी पहचान बोधगया में हुई थी."

    शहर के मुख्य भाग से दूर, इस मेडिटेशन सेंटर तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क भी नहीं है. दो साल से चल रहे इस सेंटर में कुल 32 नाबालिग लड़के रहते थे. फिलहाल यहां 17 बच्चे रह रहे है. जिसमें 14 बच्चे त्रिपुरा, दो अरूणाचल और एक बच्चा असम का है.

    त्रिपुरा के उबा चिनो अभी इस सेंटर का काम संभाल रहे हैं. वो कहते है, "पुलिस मुझसे यौन शोषण के बारे में पूछ रही है. मैं डेढ़ माह पहले आया हूं. मुझे कुछ नहीं मालूम. ये मामला सुलझ जाएगा तो बच्चों को लेकर मैं त्रिपुरा चला जाऊंगा."

    बोधगया, बौद्ध भिक्षु, बच्चों के साथ रेप, यौन शोषण, बिहार
    Seetu Tewari/BBC
    बोधगया, बौद्ध भिक्षु, बच्चों के साथ रेप, यौन शोषण, बिहार

    आपत्ति दर्ज की तो बच्चों को बाहर निकाला

    बच्चों के साथ कथित यौन शोषण की जानकारी मिलने पर मां-बाप चुप ही रहे. उन्होंने बौद्ध भिक्षु और शोषण के मामले में अभियुक्त मेडिटेशन स्कूल के प्रमुख सुजाय चौधरी को स्कूल छोड़कर जाने की बात कही. जिसके बाद मेडिटेशन स्कूल के प्रमुख ने बच्चों को नग्न अवस्था में ही सेंटर से निकाल दिया.

    सेंटर के नजदीक रहने वाली नर्मदा देवी और अमित कुमार ने बताया, "तकरीबन आठ बजे सभी बच्चों को बाहर निकाल दिया गया, लेकिन बच्चों को बौद्ध भिक्षु किसी से बात करने की इजाज़त नहीं देता था, इसलिए हमलोगों ने कुछ नहीं पूछा."

    हालांकि जब निकाले गए बच्चों को लेकर मां-बाप मुख्य मंदिर पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने उनसे इस बारे में पूछा. जिसके बाद स्थानीय मीडिया को मामले की भनक लगी.

    बेबसी भरे भाव में अरूण ने बीबीसी से कहा, "हम लोग तो पटना के राजेन्द्रनगर से गाड़ी पकड़कर असम चले जाते. यहां हम शिकायत कैसे करते? यहां हम किसी को नहीं जानते थे इसलिए चुपचाप वापस जा रहे थे. अब तो पुलिस जब कहेगी, तब वापस जाएंगे."

    बोधगया, बौद्ध भिक्षु, बच्चों के साथ रेप, यौन शोषण, बिहार
    Seetu Tewari/BBC
    बोधगया, बौद्ध भिक्षु, बच्चों के साथ रेप, यौन शोषण, बिहार

    बाल अधिकार संरक्षण समिति 'बेपरवाह'

    इस मामले में बोधगया थाने में आईपीसी की धारा 377, 341, 323, 504, 506 और पॉस्को एक्ट के 4, 6, 8, 10 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है और अभियुक्त सुजॉय उर्फ़ संघप्रिय को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

    गया के एएसपी रमन कुमार चौधरी ने बीबीसी को बताया, "सभी बच्चों का मेडिकल जांच कराया गया है और 164 का बयान दर्ज किया जाना बाक़ी है. अभियुक्त को 14 दिन की रिमांड पर लिया गया है."

    "इसके अलावा पटना से आई फॉरेंसिक टीम ने बौद्ध भिक्षु के कमरे से गमछा, बेडशीट और एक आयताकार हुक लगा पट्टा जांच के लिए बरामद किया है. किसी तरह की कोई आपत्तिजनक तस्वीर या वीडियो उनके मोबाइल से नहीं मिली है."

    वहीं ज़िलाधिकारी अभिषेक सिंह का कहना है, "जांच जल्द से जल्द पूरी कर मामले की चार्जशीट फ़ाइल की जाएगी. बच्चों को बाल अधिकार संरक्षण समिति को सौंपा जाएगा ताकि उनकी देखरेख की जा सके."

    बाल अधिकार संरक्षण समिति की अध्यक्ष गीता मंडल से जब इस मामले में कार्रवाई के बारे में पूछने पर लापरवाही भरे लहजे में कहा, "हम नए आए हैं. हमें मालूम नहीं कोई चीज़."

    बोधगया, बौद्ध भिक्षु, बच्चों के साथ रेप, यौन शोषण, बिहार
    Seetu Tewari/BBC
    बोधगया, बौद्ध भिक्षु, बच्चों के साथ रेप, यौन शोषण, बिहार

    पहले भी सवालों के घेरे में रहा है संघ

    इस मामले में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध भिक्षु संघ भी कटघरे में है. साल 2015 में भी थाईलैंड के एक बौद्ध भिक्षु द्वारा बच्चों के यौन शोषण का मामला सामने आया था.

    बोधगया में कुल 160 मठ हैं, जिसमें से महज 70 ही संघ के साथ रजिस्टर्ड हैं. खुद 20 साल से चल रहे संघ का रजिस्ट्रेशन ही तीन महीने पहले हुआ है. संघ के सचिव प्रज्ञादीप बताते है कि बोधगया में तकरीबन 400 बच्चे धार्मिक शिक्षा ले रहे हैं. हालांकि इस आंकड़े पर यक़ीन कर पाना मुश्किल है.

    प्रज्ञादीप के मुताबिक मेडिटेशन सेंटर में चकमा समुदाय के बच्चे रहते थे, जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. दो साल से इस सेंटर को किराए के मकान में चला रहे केंद्र प्रमुख बांग्लादेश से भाग कर आए हैं. उन्होने कहा, "सेंटर संघ से रजिस्टर्ड नहीं था. वो लोग ट्रस्ट बनाकर अपना काम कर रहे थे, जिसको देखना सरकार की ज़िम्मेदारी है."

    वहीं जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने कहा, "प्रशासन की तरफ से कमिटी बनाई गई है जो इन ट्रस्ट के काम को जांचेगी."

    हालांकि बोधगया में मठ और स्थानीय लोगों के बीच विवाद नया नहीं है. बोधगया होटल एसोसिएशन लगातार ये मसला उठाता रहा है कि बौद्ध मंदिर धर्म के नाम पर व्यवसाय कर रहे हैं. जिसे जुलाई 2016 में तत्कालीन जिलाधिकारी कुमार रवि ने भी अपनी रिपोर्ट में सही पाया था.


    bbchindi.com
    BBC
    bbchindi.com

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    BBC Hindi
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Ground Report Buddhist monks used to masturbate with minor children in Bodhgaya Bihar

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X