Tech News: नए फोन खरीदने वालों को राहत! मोबाइल में आधार ऐप को लेकर सरकार ने अचानक लिया ये बड़ा फैसला

केंद्र सरकार ने नए स्मार्टफोन में 'आधार ऐप' (mAadhaar) को पहले से इंस्टॉल (Pre-install) करने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना को वापस ले लिया है। ऐपल और सैमसंग जैसी दिग्गज स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों के कड़े विरोध और तकनीकी चिंताओं के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने इस प्रस्ताव को खारिज करने का फैसला किया है। आइए जानते हैं सरकार ने इस फैसले को क्यों बदला?

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने इस साल की शुरुआत में आईटी मंत्रालय को एक सुझाव दिया था। इसमें कहा गया था कि भारत में बिकने वाले हर नए स्मार्टफोन में आधार ऐप पहले से मौजूद (Pre-installed) होना चाहिए।

Aadhaar app

वर्तमान में देश के लगभग 1.34 बिलियन नागरिक आधार का उपयोग बैंकिंग, सिम कार्ड वेरिफिकेशन और हवाई अड्डों पर पेपरलेस एंट्री के लिए कर रहे हैं। सरकार का तर्क था कि इससे नागरिकों को अपनी डिजिटल पहचान एक्सेस करने में और आसानी होगी।

कंपनियों ने क्यों खड़ा किया विरोध का मोर्चा?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जब यह प्रस्ताव स्मार्टफोन कंपनियों के सामने रखा गया, तो Apple, Samsung और Google ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। कंपनियों ने सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख चिंताएं रखीं:

  • 1. यूजर प्राइवेसी और सिक्योरिटी: कंपनियों का मानना है कि किसी भी थर्ड-पार्टी सरकारी ऐप को अनिवार्य रूप से सिस्टम का हिस्सा बनाने से फोन की सुरक्षा में सेंध लग सकती है। ऐपल जैसी कंपनियां अपनी प्राइवेसी नीतियों को लेकर काफी सख्त रहती हैं।
  • 2. उत्पादन लागत में वृद्धि: निर्माताओं ने चेतावनी दी थी कि अगर उन्हें भारत के लिए विशेष रूप से सॉफ्टवेयर कस्टमाइज़ करना पड़ा, तो इससे मैन्युफैक्चरिंग लाइन में बदलाव करने होंगे। इससे फोन की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।
  • 3. यूजर एक्सपीरियंस (Bloatware): कंपनियां अपने फोन के इंटरफेस को हल्का और तेज रखना चाहती हैं। अनिवार्य ऐप्स को यूजर्स अक्सर 'ब्लोटवेयर' (अनावश्यक ऐप) मानते हैं जिसे वे हटा भी नहीं सकते।
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दो साल में छठी बार टली योजना
हैरानी की बात यह है कि पिछले दो सालों में यह छठी बार है जब सरकार ने स्मार्टफोन्स में सरकारी ऐप्स को प्री-लोड करने की कोशिश की है। हर बार इंडस्ट्री के दबाव और तकनीकी बाधाओं के कारण सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े हैं। इससे पहले दिसंबर में 'संचार साथी' ऐप (जो धोखाधड़ी रोकने के लिए है) को भी अनिवार्य करने की कोशिश हुई थी, लेकिन भारी विरोध के बाद उसे भी वापस ले लिया गया था।

सरकार का अंतिम रुख
आईटी मंत्रालय ने विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के साथ लंबी चर्चा के बाद स्पष्ट किया कि वह डिवाइस पर किसी भी ऐप को जबरन थोपने के पक्ष में नहीं है, जब तक कि वह सुरक्षा के लिए अनिवार्य न हो। फिलहाल, यूज़र्स अपनी मर्जी से प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से आधार ऐप डाउनलोड कर सकेंगे।

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