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AC Temperature Rules: सरकार तय करेगी AC का टेम्परेचर! जानें टॉप-10 देशों में तापमान को लेकर क्या है गाइडलाइन

New AC Temperature Rules: गर्मियों में अक्सर लोग AC को 16 या 18 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर देते हैं, लेकिन अब ऐसा करना जल्द ही मुमकिन नहीं होगा। भारत सरकार एक नया नियम लाने जा रही है, जिसके तहत एयर कंडीशनर (AC) का तापमान 20 डिग्री से नीचे सेट नहीं किया जा सकेगा।

यह नियम सिर्फ घरों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि मॉल, होटल, ऑफिस, थिएटर और यहां तक कि गाड़ियों में लगे AC पर भी लागू होगा। सरकार का मानना है कि इससे बिजली की खपत घटेगी, पावर ग्रिड पर दबाव कम होगा और देश एनर्जी एफिशिएंसी (energy efficiency) के मामले में आगे बढ़ेगा।

AC

क्या है नया प्रस्तावित नियम?
भारत सरकार सभी नए AC के लिए तापमान की एक तय सीमा लागू करने जा रही है- न्यूनतम 20°C और अधिकतम 28°C। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के मुताबिक सरकार जल्द ही ऐसी गाइडलाइन जारी करेगी, जिससे AC निर्माता कंपनियों को अपने डिवाइस प्रोग्रामिंग में बदलाव करना पड़ेगा या फिर सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करने होंगे ताकि यूजर तय सीमा से बाहर तापमान सेट न कर सकें।

सरकार ऐसा क्यों कर रही है?
इस नियम का सबसे बड़ा मकसद है भारत की बढ़ती बिजली मांग को कंट्रोल करना, खासकर उन गर्मियों में जब देशभर में AC का इस्तेमाल चरम पर होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में AC का इस्तेमाल कुल बिजली खपत का लगभग 20% यानी 50 गीगावॉट तक पहुंच चुका है।

AC का तापमान सिर्फ 1°C बढ़ाने पर क्या होगा?
पावर सेक्रेटरी पंकज अग्रवाल के अनुसार, यदि हर घर और ऑफिस में AC का तापमान सिर्फ 1°C बढ़ा दिया जाए, तो करीब 6% बिजली की बचत हो सकती है। अगर न्यूनतम तापमान 20°C तय कर दिया जाए तो सरकार लगभग 3 गीगावॉट की पीक डिमांड घटा सकती है- जो कि छोटे राज्यों की पूरी बिजली जरूरत के बराबर है।

क्या कहती है रिसर्च और स्टडी?
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले द्वारा मार्च 2025 में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारत ने अपने एनर्जी स्टैंडर्ड को और मजबूत किया, तो 2035 तक देश 60 गीगावॉट की पीक डिमांड टाल सकता है।

2024 की गर्मियों में भारत की बिजली मांग 250 गीगावॉट तक पहुंच गई थी, और 2025 में जून की शुरुआत में ही यह 241 गीगावॉट तक रिकॉर्ड कर ली गई। मई में हुई भारी बारिश ने कुछ राहत दी थी, लेकिन जून की गर्म लहरों ने फिर से बिजली की मांग को उछाल दिया है। ऐसे में AC का स्मार्ट और संतुलित इस्तेमाल भविष्य की जरूरत बन चुका है।

कौन-कौन से देश करते हैं ऐसी कंट्रोल?
भारत इस समय दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो रहा है, जहां AC के तापमान पर कानूनी नियंत्रण लागू किया जा रहा है। आइए जानते हैं टॉप 10 देशों में क्या नियम हैं:

  • इटली: सार्वजनिक भवनों (Public buildings) में AC का तापमान 27°C से कम नहीं किया जा सकता। 2 डिग्री तक की छूट है यानि 25°C तक अनुमति है।
  • स्पेन: पब्लिक प्लेसेज में AC कम से कम 27°C पर चलाना जरूरी है। घरों के लिए ये सिर्फ सलाह है।
  • ग्रीस: सरकारी इमारतों में 27°C न्यूनतम तापमान अनिवार्य है।
  • जापान: ऑफिस और सार्वजनिक स्थानों के लिए 28°C की सिफारिश की गई है।
  • चीन: गर्मियों में सरकारी दफ्तरों के लिए 26-28°C तापमान निर्धारित किया गया है।
  • सिंगापुर: ऑफिसों में 25°C की सलाह दी जाती है, लेकिन यह भी वैकल्पिक है।
  • दक्षिण कोरिया: सरकारी भवनों में 26-28°C तापमान तय किया गया है।
  • ऑस्ट्रेलिया: स्कूल और ऑफिस के लिए 24-27°C तापमान सुझाया गया है।
  • यूके: कोई तय सीमा नहीं है लेकिन ऊर्जा बचत के सुझाव दिए जाते हैं।
  • अमेरिका (कैलिफोर्निया): कुछ एनर्जी कन्वर्सेशन गाइडलाइन हैं लेकिन कोई कानूनी सीमा नहीं।

क्या होगा इसका फायदा?
सरकार को उम्मीद है कि इस नियम से बिजली बचत हो सकती है। साथ ही, बिजली बिल में कटौती, ग्रिड पर कम दबाव और कार्बन उत्सर्जन में भारी गिरावट जैसे फायदे भी सामने आएंगे। लंबे समय में यह पहल न केवल पर्यावरण के लिहाज से बेहतर साबित होगी, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर ऊर्जा-कुशल (Energy-efficient) देशों की लिस्ट में भी मजबूती देगी।

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