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सरकारी कर्मचारियों को भी दफ्तर में करना पड़ सकता है 9 घंटे काम!

बेंगलुरू। अभी तक सांगठनिक और गैर सांगठिनक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों की ड्यूटी ऑर्स लंबी होती थी, लेकिन आने वाले दिनों में सरकारी कर्मचारियों के ड्यूटी ऑर्स में परिवर्तन करने का मसौदा केंद्र सरकार लाने जा रही है। जी हां, यह सौ फीसदी सच है। मतलब वह दिन दूर नहीं, जब सरकारी नौकरी में बैठे कर्मचारियों को 9 घंटे दफ्तर में बैठने पड़ सकते हैं वरना ड्यूटी ऑर्स से पहले दफ्तर से घर की ओर कूच करना सरकारी कर्मचारियों की पारंपरिक शैली काफी मशूहर है।

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हालांकि जब से सरकारी दफ्तरों में बॉयोमेट्रिक अटेंडेस सिस्टम लगा दिए गए है तब से सरकारी कर्मचारियों की मनमानी पर कुछ अंकुश लग गया है, लेकिन सरकार द्वारा प्रस्तावित मसौदे को अमलीजामा पहना दिया गया तो सरकारी कर्मचारियों को दफ्तर से घर भागने की जल्दी से तौबा करने पड़ जाएगा।

दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में नए वेज कोड रूल्स का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें सरकार ने केंद्रीय सरकार के अंतर्गत काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए 9 घंटे कामकाज की सिफारिश की गई है। हालांकि सरकार ने इसमें नेशनल मिनिमम वेजेज की घोषणा नहीं की है, लेकिन सरकार ने मसौदे में ज्यादातर पुराने सुझावों को ही रखा है।

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सरकारी ड्राफ्ट में मजदूरी तय करने के लिए पूरे देश के कर्मचारियों को कुल तीन जियोग्राफिकल वर्गों में बांटा गया है। मालूम हो, वर्ष 1948 फैक्टरी अधिनियम के मुताबिक भारत में प्रत्येक वयस्क (18 वर्ष) से एक सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकता है और इस कानून में एक दिन में 9 घंटे से अधिक काम नहीं करवाया जा सकता है। इस हिसाब से सरकार द्वारा प्रस्तावित मसौदे को लागू करने में दिक्कत नहीं होगी।

उल्लेखनीय है सरकार की ओर से जारी ड्राफ्ट में अभी कर्मचारियों के लिए मिनिमम वेज तय करने को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं। ड्राफ्ट में कहा गया है कि भविष्य में एक एक्सपर्ट कमेटी मिनिमम वेज तय करने की सिफारिश सरकार से करेगी। हालांकि सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट में मौजूदा समय में चल रहा 8 घंटे रोजाना कामकाज के नियम को लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं है।

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क्योंकि अभी इसी नियम के तहत 26 दिन काम के बाद कर्मचारियों की सैलरी तय होती है। हालांकि सरकारी मानकों की तुलना में निजी क्षेत्रो में काम करने वाले कर्मचारियों की दशा बेहद खराब है, जहां न कामकाज के घंटे की कोई समय सीमा निर्धारित होती है और न छुट्टियों को लेकर श्रम विभाग के दिशा-निर्देशों को पालन किया जाता है।

हालांकि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सरकार द्वारा जारी किए ड्राफ्ट में श्रम मंत्रालय के एक इंटरनल पैनल ने जनवरी में अपनी रिपोर्ट में 375 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से नेशनल मिनिमम वेज तय करने की सिफारिश की थी। पैनल ने इस मिनिमम वेज को जुलाई 2018 से लागू करने को कहा था। सात सदस्यीय पैनल ने मिनिमम मंथली वेज 9750 रुपए रखने की सिफारिश की थी।

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साथ ही शहरी कामगारों के लिए 1430 रुपए का हाउसिंग अलाउंस देने का सुझाव दिया था। प्रस्तावित ड्राफ्ट में मिनिमम वेज तय करने के लिए पूरे देश को तीन जियोग्राफिकल वर्गों में बांटने की सिफारिश की है। इसमें पहले वर्ग में 40 लाख या इससे ज्यादा की आबादी वाले मेट्रोपोलिटन शहर दूसरे वर्ग में 10 से 40 लाख तक की आबादी वाले नॉन मेट्रोपोलिटन शहर और तीसरे वर्ग में ग्रामीण इलाकों को शामिल किया गया है।

गौरतलब है सरकारी नौकरी की प्राथामिकता और उसको हासिल करने के रूझान के प्रति आम भारतीयों की पहली धारणा होती है कि सरकारी दफ्तरों मे काम का बोझ कम होता है। सरकारी नौकरी को चुनने के पीछे दूसरा बड़ा जो फैक्टर होता है, वह होती है सुरक्षा, चाहे वह वेतन की सुरक्षा हो अथवा नौकरी की सुरक्षा हो, दोनों ही मामलों में सरकारी कर्मचारियों को सुकूंन रहता है। हालांकि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट में ड्यूटी ऑर्स 8 से 9 घंटे होने से सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों की भौंहे जरूर तन जाएगी।

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वैसे, यह भी अकाट्य सत्य है कि जो सरकारी कर्मचारी 8 घंटे की आधिकारिक नौकरी में ईमानदारी से काम को तवज्जो नहीं देते हैं, उनके लिए ड्यूटी ऑर्स 8 घंटे हो अथवा 9 घंटे, उन्हें क्या फर्क पड़ता है। किसी भी सरकारी दफ्तर की सैर कर लीजिए, उस सरकारी दफ्तर में महज 20-30 कर्मचारी ही ईमानदारी से काम निपटाते हैं बाकी 70 फीसदी से सरकारी दफ्तरों में पहुचे जरूरतमंदों को ही निपटाते नजर आते हैं।

जरूरत है कि सभी कर्मचारियों की एकाउंटबिलटी तय की जाए और उनके ड्यूटी ऑर्स की प्रोडक्टेबिटी की मॉनीटरिंग की प्रणाली विकसित की जाए वरना ड्यूटी ऑर्स का कोई माकूल फर्क नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि जो कर्मचारी 8 घंटे लापरवाही करते हुए एक ही टास्क में सुबह से शाम तक लगा हुआ है, वह जरूरी नहीं कि एक घंटे के बढ़े ड्यूटी ऑर्स में दोगुना काम करने लग जाएगा।

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