• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया राफेल डील के लिए एचएएल को क्‍यों नहीं बनाया गया ऑफसेट पार्टनर

|

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को इस बाबत जानकारी दी है कि आखिर क्‍यों उसने फ्रांस के साथ राफेल डील के समय ऑफसेट पार्टनर के तौर पर हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिक्‍स लिमिटेड (एचएएल) को नहीं चुना। केंद्र सरकार की मानें तो एचएएल को भारत में राफेल एयरक्राफ्ट के निर्माण को पूरा करने के लिए 2.7 गुना ज्‍यादा समय की जरूरत थी। वहीं फ्रांस की कंपनी डसॉल्‍ट के साथ एचएएल के कई ऐसे मुद्दे थे जिनका निबटारा नहीं हो पाया और ये अनसुलझे ही रहे।

rafale-HAL-Supreme-Court

दोनों कंपनियों में आपसी समझ की कमी

सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दिए गए दस्‍तावेजों में बताया गया है कि जो मुद्दे सबसे अहम थे, उनमें एचएएल और डसॉल्‍ट के बीच आपसी समझ की भी कमी थी। सरकार ने बताया कि यूपीए के समय हुई डील के मुताबिक 18 एयरक्राफ्ट रेडी-टू-फ्लाई कंडीशन में मिलने थे, जबकि 108 विमान भारत में ही तैयार होने थे। सरकार ने इस डील को इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि जितने समय में दैसॉ यह विमान बना रही थी, एचएएल उससे ढाई गुना ज्यादा समय मांग रही थी। ऐसे में दैसॉ एचएएल के साथ यह डील करने के लिए तैयार नहीं था। कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि डसॉल्‍ट की ओर से सरकार पर दबाव डाला गया था कि वह एचएएल को ऑफसेट पार्टनर के तौर पर न चुने। कांग्रेस की मानें तो डसॉल्‍ट ने कहा था कि अगर एचएएल को ऑफसेट पार्टनर बनाया जाता है तो फिर भारत की एरोस्‍पेस इंडस्‍ट्री बर्बाद हो सकती है। यह भी पढ़ें-डसॉल्‍ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर का राहुल गांधी को जवाब, 'मैं झूठ नहीं बोलता'

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Government told Supreme Court why HAL was not picked as offset partner in Rafale deal.
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more