ओला और उबर की सर्विस पर सवाल! 13 महीने में क्यों आईं 3000 शिकायतें? अब सरकार ने मांगा जवाब
नई दिल्ली, 20 मई। कैब सर्विस उबर की बढ़ती शिकायतों को लेकर अब केंद्र सरकार गंभीर हो गया है। उपभोक्ता मामले के मंत्रालय और सीसीपीए के प्रतिनिधियों ने प्रमुख ऑनलाइन कैब एग्रीगेटर्स से मुलाकात की है। बैठक में ओला, उबर, जुगनू, मेरु कैब्स और रैपिडो के एग्रीगेटर्स शामिल थे । इस दौरान कैब एग्रीगेटर्स को मंत्रालय की ओर से कड़ी चेतावनी दी गई।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और सीसीपीए के प्रतिनिधियों ने प्रमुख ऑनलाइन कैब एग्रीगेटर्स के बीच यह बैठक गत 10 मई को हुई थी। जिसमें शीर्ष अधिकारियों ने कैब सर्विस को लेकर की गई शिकायतों को लेकर जवाब मांगा। साथ ही कैब कंपनियों से उपभोक्ताओं की शिकायतों के तत्काल समाधान करने को कहा। इस दौरान अधिकारियों ने कैब एग्रीगेटर्स को उपभोक्ता हित और उपभोक्ता अधिकारों के अनुसार अपनी सेवाओं में सुधार लाने को कहा। साथ ही आगाह किया गया कि ओला और उबर जल्द सुधार करें नहीं तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।
बैठक में कैब की सर्विस में कमियों, शिकायत निवारण तंत्र, कैंसिलेशन चार्ज, एल्गोरिथम पर किसी भी जानकारी की कमी और पूर्व-चिह्नित बक्सों द्वारा ऐड-ऑन सेवाओं के लिए शुल्क शामिल करने जैसे मुद्दे उठाए गए। सीसीपीए के कैब सेवा में खामियों का खुद निरीक्षण कियाी था। जिसमें ऑनलाइन भुगतान लेने से इनकार करना, एक ही मार्ग पर अधिक राशि चार्ज लेना समेत ड्राइवर व्यवहार शामिल हैं।
नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) के आंकड़ों की बात करें तो 1 अप्रैल, 2021 से 1 मई, 2022 तक ओला के खिलाफ 2,482 शिकायतें दर्ज की गईं और उबर के खिलाफ 770 शिकायतें दर्ज की गईं। कैब एग्रीगेटर्स के खिलाफ उनकी सवारी को प्रभावित करने वाले कई मुद्दों पर देश भर के उपभोक्ताओं द्वारा एक साल में 3,000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। आंकड़े साफ बताते हैं कि कैब सर्विस की स्थिति कितना खराब होती जा रही है। बढ़ती शिकायतों को देखते हुए सरकार ने अब कड़ कदम उठाने के संकेत दिए हैं।












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