कलाम को सरकारी हिन्दी श्रद्धांजलि का स्तर तो देखिए
नई दिल्ली(ब्यूरो) केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को जिस तरह की हिंदी में श्रद्धासुमन अर्पित किए, उसे शर्मनाक ही कहा जाएगा।
इसकी बानगी देखिए, " भारत के पूर्व राष्ट्रपति, और विशेष करके युवाओं के प्रिय श्रीमान अब्दुल कलाम जी के निधन के समाचार पूरे देश के लिए और विश्व के वैज्ञानिक आलम के लिए एक बहुत ही दुखद समाचार है।... और आज जीवन का अंत काल भी विद्यार्थिओं के बीच, अपने प्रिय काम को करते-करते ही उन्होंने वो अंतिम क्षण भी बितायी।...
देश ने अपने एक ऐसे सपूत को खोया है, जिसने भारत की सेवा की, भारत को सशक्त बनाने के लिए। जिसने अपनी पल-पल लगायी, भारत की युवा पीड़ी को सशक्त बनाने के लिए, सामर्थवान बनाने के लिए। ऐसे महापुरुष की विदाई, कोई भर पायेगा। देश ने बहुत कुछ आज गंवाया है।
दो सूटकेस और डा. एपीजे अब्दुल कलाम
शोक संदेश डाला
27 जुलाई की शाम को केंद्र सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की वेबसाइट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश डाला गया। इसमें शायद ही कोई वाक्य शुद्ध हिंदी में हो। वरिष्ठ लेखक हबीब अख्तर कहते हैं कि अब यह भूल कैसे हुई और क्योंकर हुई, यह तो पीआईबी के अधिकारी ही बता सकते हैं, लेकिन इसमें हिंदी की भद्द पिट गई।
इसे केंद्र सरकार में हिंदी के जानकारों के अभाव से जोड़ा जाए या फिर कोई और वजह तलाशी जाए, पर इतना तय है कि इस प्रेस विज्ञप्ति को किसी हिंदी जानकार ने देखा नहीं।
तब क्या हाल होगा
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे व्यक्तित्व के बारे में लिखते हुए जब इतनी बड़ी गड़बड़ियां की जा रही हैं, तो सामान्य मामलों में क्या हाल होता होगा, इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है।













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