राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, अब 'अमृत उद्यान' नाम से होगी पहचान
राष्ट्रपति भवन का मुगल गार्डन अब अमृत उद्यान नाम से जाना जाएगा। इसका उद्घाटन 29 जनवरी को होगा।

राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन को लेकर मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब ये ऐतिहासिक गार्डन 'अमृत उद्यान' नाम से जाना जाएगा। सरकार ने इस नाम की थीम आजादी के अमृत महोत्सव से ली है। ये गार्डन अपनी खूबसूरती के लिए दुनियाभर में फेमस है, जिसे देखने हर साल हजारों लोग राष्ट्रपति भवन पहुंचते हैं। वहीं सरकार के इस फैसले से सियासत भी गर्मा गई है।
मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उप प्रेस सचिव नविका गुप्ता ने कहा कि स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर और 'आजादी का अमृत महोत्सव' को देखते हुए राष्ट्रपति ने गार्डन को नया नाम दिया है, जिसके तहत अब ये 'अमृत उद्यान' नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा 29 जनवरी यानी रविवार को राष्ट्रपति अमृत उद्यान का उद्घाटन करेंगी। आम जनता 31 जनवरी से लेकर 26 मार्च तक इसका दीदार कर सकेगी। उन्होंने आगे कहा कि आमतौर पर गार्डन एक महीने के लिए खुलता है, लेकिन इस बार इसके समय को बढ़ाया गया है।
नविका गुप्ता के मुताबिक सरकार ने समाज के विशेष समूहों जैसे- विकलांगों, किसानों आदि के देखने के लिए व्यवस्था की है। इस बार पौधों के आगे विशेष क्यूआर कोड लगाया जा रहा है, ताकि लोग उसके बारे में जान सकें। साथ ही 20 प्रोफेशनल गाइड भी तैनात किए जाएंगे, जो लोगों को इन फूलों के बारे में जानकारी देंगे।
गुलाब की 138 प्रजातियां
आपको बता दें कि अमृत उद्यान काफी खास है। वहां पर 138 तरह के गुलाब, 10 हजार से ज्यादा ट्यूलिप बल्ब और 70 अलग-अलग प्रजातियों के लगभग 5 हजार मौसमी फूलों की प्रजातियां हैं। इनको खासतौर पर तैयार किया जाता है।
कुछ ऐसा है इसका इतिहास
ब्रिटिश सरकार के बड़े वास्तुकार सर एडविन लूटियंस को जब ब्रिटिश वायसराय के लिए एक आवास (मौजूदा वक्त का राष्ट्रपति भवन) बनाने का काम मिला, तो उन्होंने 1917 में मुगल गार्डन का भी डिजाइन तैयार किया। कई सालों की मेहनत के बाद 1928 में ये बनकर तैयार हुआ। शुरू में इसमें खास मेहमानों को ही जाने दिया जाता था, लेकिन जब डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पहले राष्ट्रपति बने तो उन्होंने इसको जनता के लिए खोल दिया।












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