भारत की पहली महिला सत्याग्रही सुभद्रा कुमारी चौहान के सम्मान में गूगल ने बनाया डूडल, जानें कौन थीं वो?
भारत की पहली महिला सत्याग्रही सुभद्रा कुमारी चौहान के सम्मान में गूगल ने बनाया डूडल, जानें कौन थीं वो?
नई दिल्ली, 16 अगस्त: गूगल ने आज (16 अगस्त) भारत की पहली महिला सत्याग्रही सुभद्रा कुमारी चौहान के सम्मान में खास डूडल बनाया है। सुभद्रा कुमारी चौहान पुरुष वर्चस्व वाले युग के दौरान अपनी शाख जमाने वाली महिलाओं में से एक थीं। सुभद्रा कुमारी चौहान एक लेखिका, एक्टिविस्ट, स्वतंत्रता सेनानी भी थीं। सुभद्रा कुमारी चौहान की 117 वीं जयंती के अवसर पर गूगल ने उनपर डूडल बनाकर उनको याद किया है। सुभद्रा कुमारी चौहान के साहित्य को उस वक्त राष्ट्रीय प्रमुखता मिली, जब इस क्षेत्र में सिर्फ पुरुषों का वर्चस्व था। सुभद्रा कुमारी चौहान की विकासवादी राष्ट्रवादी कविता "झांसी की रानी" को व्यापक रूप से हिंदी साहित्य में सबसे ज्यादा पढ़ाई गई कविताओं में से एक माना जाता है।

सुभद्रा कुमारी चौहान के इस डूडल को न्यूजीलैंड की गेस्ट आर्टिस्ट प्रभा माल्या ने बनाया है। इस डूडल में सुभद्रा कुमारी चौहान सफेद रंग की साड़ी पहने हुए दिख रही हैं और उनके हाथ में कलम है और टेबल पर चारों ओर कागज है। सुभद्रा कुमारी चौहान एक ओर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की तस्वीर है और दूसरी ओर प्रदर्शन करते कुछ लोगों की।
सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म 16 अगस्त 1904 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में निहलपुर (गांव का नाम) में हुआ था। बचपन से ही सुभद्रा कुमारी चौहान लगातार लिखती थीं। कहा जाता है कि बचपन में जब वह घोड़े से स्कूल जाती थीं तो उस वक्त भी वह लिखा करती थी। सुभद्रा की पहली कविता सिर्फ नौ साल की उम्र में प्रकाशित हुई थी। भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन में सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी कविताओं से लोगों में जोश भरने का काम किया। सुभद्रा कुमारी चौहान की देशभक्ति से भरे कविताओं को सुनकर सैकड़ों लोग देश की संप्रभुता की लड़ाई में आगे आए थे।
सुभद्रा कुमारी चौहान की ज्यादातर कविताओं और गद्द भारतीय महिलाओं को लिंग और जाति भेदभाव जैसे मुद्दे और महिलाओं को होने वाली परेशानियों के आस-पास केंद्रित थे। सुभद्रा कुमारी चौहान ने 88 कविताएं और 46 लघु कथाएं लिखी हैं। 1923 में सुभद्रा कुमारी चौहान ने भारत की पहली महिला सत्याग्रही की टीम का नेतृत्व किया था। 1940 के दशक में सुभद्रा स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल थीं।












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