पृथ्वी दिवस पर गूगल ने बनाया लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने वाला डूडल
आज पृथ्वी दिवस (अर्थ डे) है। इस मौके पर गूगल ने अपने होम पेज पर एक डूडल बनाया है, जिसमें एक महिला एक बड़े से पेड़ के नीचे किताब पढ़ रही है, जबकि उसकी बेटी एक छोटे से पौधे को लगाने के लिए ले जा रही है।
नई दिल्ली, 22 अप्रैल। आज पृथ्वी दिवस (अर्थ डे) है। इस मौके पर गूगल ने अपने होम पेज पर एक डूडल बनाया है, जिसमें एक महिला एक बड़े से पेड़ के नीचे किताब पढ़ रही है, जबकि उसकी बेटी एक छोटे से पौधे को लगाने के लिए ले जा रही है, यह सोचकर की वह भी एक दिन एक पेड़ बनेगा और सबको फल और छाया देगा। डूडल की वीडियो में लोगों को अपने छोटों को पौधे लगाने के बारे में बताते हुए भी दिखाया गया है।

डूडल के माध्यम से गूगल ने पेड़ की महत्ता को दर्शाया है और यह बताने की कोशिश की है कि आने वाले भविष्य के लिए पेड़ लगाना कितना जरूरी है। जिस गृह को हम अपना घर कहते हैं वह हमारे जीवन को पोषित करता है और हमें आश्चर्य से भर देता है। हमारा पर्यावरण हमें जीवत और सुरक्षित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन बदले में हम अपने पर्यावरण को हर रोज हानि पहुंचा रहे हैं। पर्यावरण और प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का ही नतीजा है जो आज हमें नित नई बीमारियों, प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इंसान इसे भगवान की मर्जी समझकर पर्यावरण को बचाने के लिए कुछ सकारात्मक प्रयास करने से बचता रहा है।
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लेकिन अब हमें चेतने की जरूरत है, हमें पेड़ लगाने होंगे और अधिक से अधिक मात्रा में लगाने होंगे। औद्दोगीकरण के इस दौर में जिस तरह से प्रकृति का दोहन हो रहा है, यह आने वाले समय में मानव जाति के लिए विनाश का कारण बन सकता है। हमें अपनी धरती को और अधिक तपने से बचाना होगा। हाल ही में डब्ल्युएमओ के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है आने वाले 5 सालों में धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है और यदि ऐसा हुआ तो बड़ी तबाही देखने को मिल सकती है। हमें लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना होगा। अगर हर व्यक्ति 1 पेड़ लगाने का प्रण ले ले तो भी काफी बदलाव लाया जा सकता है।
पृथ्वी दिवस मनाने का विचार सर्वप्रथम गेलॉर्ड नेल्सन ने दिया था, जोकि विशकॉसिन से अमेरिकी सांसद थे। सबसे पहले 22 अप्रैल 1970 में इसे पहली बार मनाया गया था, उस समय 2 करोड़ अमरीकी नागरिक स्वस्थ और सतत पर्यावरण के लिए सड़कों पर उतर आए थे।
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