Aslam Esaf Shaikh कौन था, Sakinaka के गटर में कैसे गिरा? निकाली गई लाश, हर साल कितने मर रहे? आंकड़ा खौफनाक

Sakinaka Manhole Death Reason: मुंबई में लगातार जारी बारिश के कहर के बीच मैनहोल एक बुजुर्ग के लिए मौत का कुंआ साबित हुआ। गुरुवार (2 जुलाई) को साकिनाका के खैराणी रोड पर 60 वर्षीय असलम एसाफ शेख नामक व्यक्ति गहरे खुले मैनहोल में गिर गया।

सूचना मिलते ही, मौके पर दमकल, पुलिस और 108 एंबुलेंस की टीमें पहुंची। घंटों की तलाश के बाद असलम की छतरी और चप्पलें रेस्क्यू टीम के हाथ लगीं। लेकिन, कई घंटों तक असलम का पता न चला। BMC की लापरवाही, रखरखाव की कमी और जानलेवा लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। आइए जानते हैं कि कैसे मौत के मुंह में गिरा असमल?

Who Was Aslam Esaf Shaikh

खैराणी रोड अंधेरी-साकिनाका को कुर्ला-घाटकोपर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। गुरुवार (2 जुलाई) को भारी बारिश के बीच असलम एसाफ शेख मोबाइल पर बात कर रहे थे। निजी ठेकेदार द्वारा रखरखाव कार्य चल रहा था, जिसके कारण मैनहोल का ढक्कन हटा हुआ था। बारिश का पानी तेजी से बह रहा था।

आसलाम अचानक मैनहोल में गिर गए और तेज बहाव के साथ बह गए। स्थानीय लोगों ने छतरी और चप्पलें देखीं। सूचना मिलते ही दमकल विभाग, मुंबई पुलिस और आपात सेवा पहुंची। घंटों की तलाश के बाद लाश बरामद की गई। परिवार में मातम छा गया।

Who Is Aslam Esaf Shaikh: असलम एसाफ शेख कौन थे?

असलम एसाफ शेख मुंबई के साकिनाका इलाके के रहने वाले थे। सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते थे। घटना के समय वे काम से लौट रहे थे या किसी जरूरी काम से निकले थे। परिवारवालों ने बताया कि वे साधारण जीवन जीते थे। उनकी मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रोड पर अक्सर मैनहोल खुले रहते हैं। रखरखाव कार्य के दौरान ढक्कन हटाया जाता है, लेकिन चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग नहीं लगाई जाती। BMC पर लापरवाही का आरोप लगता रहा है। ढक्कन हटाने के बाद बैरिकेडिंग और चेतावनी का इंतजाम नहीं किया जाता।

भारी बारिश और जलभराव की स्थिति क्या?

  • 2 जुलाई तक, मुंबई में कई जगहों पर 200 मिमी से ज्यादा बारिश हुई।
  • पूर्वी उपनगर: 189 मिमी औसत।
  • द्वीप शहर: 172 मिमी।
  • पश्चिमी उपनगर: 165 मिमी।

प्रभावित इलाके: दादर, परेल, हिंदमाता, चारकोप, वर्ली, गोरेगांव, अंधेरी आदि। लोकल ट्रेनें प्रभावित हुईं। यातायात जाम रहा। BMC ने नागरिकों से अपील की कि जरूरी होने पर ही बाहर निकलें।

अब बात करते हैं कि कैसे मैनहोल बना मौत का कुंआ?

देशभर में खुले मैनहोल और सीवर आज भी लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, साल 2019 में भारत में मैनहोल में गिरने से 102 लोगों की मौत हुई। इनमें सबसे अधिक 30 मौतें गुजरात में दर्ज की गईं, जबकि महाराष्ट्र 19 मौतों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि, यह आंकड़ा राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मीडिया से प्राप्त सूचनाओं पर आधारित है, इसलिए वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। इन मामलों में खुले मैनहोल में गिरने वाले आम नागरिकों के साथ-साथ सीवर की सफाई के दौरान जान गंवाने वाले सफाई कर्मचारी भी शामिल हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतें 2018 के 68 मामलों से बढ़कर 2019 में 110 हो गईं। जबकि 2013 का कानून मैनुअल स्कैवेंजिंग पर प्रतिबंध लगाता है, इसके बावजूद जहरीली गैसों और असुरक्षित सफाई व्यवस्था के कारण हर साल कई लोगों की जान जा रही है।

  • 2018: 68
  • 2017: 93
  • 2016: 48
  • 2015:57 मौतें

अब जानते हैं कि खतरनाक सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के काम में किस राज्य में कितने मरते हैं?

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