महंगाई पर अच्छी खबर, जैसे कच्चे तेल और खाद्य तेल के दाम घटे.....
नई दिल्ली, 11 अगस्त: महंगाई पर अच्छी खबर आने के संकेत मिल रहे हैं। सरकार की ओर से इसकी ओर इशारा किया गया है। वैसे शुक्रवार को यह पता चलने वाला है कि देश में महंगाई की अभी क्या स्थिति है। क्योंकि, बीते कुछ समय में कच्चे तेल और खाद्य तेल की कीमतें कम होने से उसका अच्छा प्रभाव देखा जा रहा है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में बीते दिनों कच्चे तेल की कीमतों में जो आ लगी हुई थी, उससे ऑयल इंडिया लिमिटेड की खूब चांदी हुई है। पहली तिमाही में ही उसका मुनाफा तीन गुना से ज्यादा बढ़ गया है।

आगे भी महंगाई कम होने चाहिए- सरकारी सूत्र
गुरुवार को केंद्र सरकार के एक बड़े सूत्र ने कहा है कि महंगाई कम करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को लेकर वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ कार्य कर रही है। यही नहीं सरकारी सूत्र ने यह भी बताया कि विकास की गति कमने की कोई संभावना नहीं है और भारत इस साल सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होगा। उन्होंने कहा, 'करंट अकाउंट डेफिसिट संतुलन के साथ आगे बढ़नी चाहिए। सरकार का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था रिकवरी पथ पर है। इस बीच 'न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक सरकारी सूत्र ने यह भी कहा है कि अभी महंगाई का दबाव कम नहीं हुआ है, लेकिन जैसे कच्चे तेल और खाद्य पदार्थों, जैसे कि खाने के तेल के दाम गिरे हैं, वैसे ही बाकी कीमतें भी कम होनी चाहिए।

जुलाई में खुदरा महंगाई कम रहने का अनुमान
उधर मिंट ने 28 अर्थशास्त्रियों के सर्वे के आधार पर जो अनुमान जताया है, उसके मुताबिक खाद्य चीजों और बाकी वस्तुओं की कीमतें कम होने की वजह से जुलाई में खुदरा महंगाई कम रहने का अनुमान है, लेकिन लगातार सात महीने के बाद भी 6% से ऊपर रह सकता है। सर्वे के औसत अनुमान से लगता है कि मुद्रास्फीति जुलाई में धीमी होकर 6.78% पर रह सकती है, जो जून में 7.01% थी। यह लगातार तीसरे महीने की गिरावट है और शायद यही वजह है कि कुछ अर्थशास्त्री मान रहे हैं कि मुद्रास्फीति संभवत: सबसे उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है।

मई से कम हो रही है मुद्रास्फीति
सर्वे में जुलाई में मुद्रास्फीति का संभावित अनुमान 6.50% से 6.91% तक रहने की संभावना है। जुलाई महीने में वास्तविक मुद्रास्फीति क्या रही, इसका डेटा शुक्रवार को जारी किया जाएगा। एक्सपर्ट का कहना है कि अप्रैल में मुद्रास्फीति 7.8% तक के अपने चरम पर पहुंच गया था, लेकिन मई और जून में इसमें थोड़ी रुकावट आनी शुरू हो गई। जुलाई में इसमें गिरावट का जो अनुमान लगाया जा रहा है, उसकी वजह मुख्य रूप से खाने की चीजों के दाम घटने की वजह से बताई जा रही है।

पहली तिमाई में ऑयल इंडिया का शुद्ध मुनाफा तीन गुना बढ़ा
इस बीच तेल और गैस की कीमतों के रिकॉर्ड छूने की वजह से सार्वजनिक क्षेत्र की देश के दूसरी सबसे बड़ी तेल एक्सप्लोरर और उत्पादक कंपनी ऑयल इंडिया की कमाई जून की तिमाही में तीन गुना हो गई। कंपनी के बयान में कहा गया है कि इस साल अप्रैल से जून तक कंपनी का शुद्ध मुनाफा 1,555.46 करोड़ का रहा। जबकि, इसी अवधि में एक साल पहले कंपनी ने सिर्फ 507.94 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था।

कच्चे तेल की कीमतों की वजह से फायदा
कंपनी का मुनाफा बढ़ने का कारण ये है कि उसने उस तिमाही में 112.72 प्रति बैरल कच्चा तेल बेचा। जबकि, पिछले साल इसी अवधि में उसको कच्चे तेल के लिए सिर्फ 67.15 डॉलर प्रति बैरल बिके थे। इसी तरह कंपनी को गैस के लिए प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिटके लिए 6.1 अमेरिकी डॉलर मिले, जो कि पहले 1.79 अमेरिकी डॉलर मिले थे। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसके दाम में इजाफे की वजह से हुई थी। 1 अप्रैल से शुरू हुए नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का टर्नओवर लगभग दोगुना होकर 6,029.86 करोड़ रुपये पहुंच गया है।












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