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सोने की सजावट, 40 लाख का बाथटब, बनने में खर्चे हुए 500 करोड़, जानिए क्यों जांच के घेरे में आया जगन का 'शीशमहल'

Jagan Mohan Reddy: विशाखापट्टनम में समुद्र के किनारे रुशिकोंडा पहाड़ी पर वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अपने लिए लग्जरी सी-फेसिंग रिजॉर्ट बनवाया था। जगन मोहन रेड्डी ने यह शीशमहल अपने कार्यकाल के दौरान बनावाया था, जिसे रेड्डी का कार्यालय और निवास माना जाता था। वहीं, अब रेड्डा का यह शीशमहल राजनीतिक विवाद के बाद जांच के घेरे में आ गया है।

जगन मोहन रेड्डी की यह आलीशान संपत्ति, जिसकी अनुमानित कीमत 500 करोड़ रुपये है, अब पर्यावरण उल्लंघन के आरोपों के चलते जांच के घेरे में आ गई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, रेड्डी के इस शीशमहल के अंदर सोने की सजावट, इटालियन मार्बल के फर्श और आलीशान साज-सज्जा सहित कई भव्य चीजें हैं।

Jagan Mohan Reddy

जगन रेड्डी का रुशिकोंडा में बना यह शीशमहल करीब 10 एकड़ में फैले चार विशाल ब्लॉकों से बना है, जो एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। इस संपत्ति में पक्की सड़कें, जल निकासी व्यवस्था, थोक जल आपूर्ति और 100 केवी बिजली सबस्टेशन सहित व्यापक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध है। इतना ही नहीं, इसमें करीब 15 लाख रुपए की कीमत वाले 200 झूमर लगाए गए हैं।

वहीं, कुछ समय पहले टीडीपी ने ऐसा दावा किया था कि रेड्डी के शीशमहल में लगाए गए बाथटब की कीमत 40 लाख रुपए है। एक-एक कमोड की कीमत करीब 10-12 लाख रुपए से अधिक बताई गई है। वहीं, अब जगन मोहन रेड्डी का यह शीशमहल विवादों में घिरा हुआ है, जिसमें तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) मानदंडों के घोर उल्लंघन के आरोप हैं।

आलोचकों का ऐसा दावा है कि एस्टेट के निर्माण के लिए सुंदर रुशिकोंडा पहाड़ी के लगभग आधे हिस्से की खुदाई की गई थी, जिससे पर्यावरण संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड ऐसा बताते हैं कि केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) ने 19 मई, 2021 को मंजूरी दी थी। यह मंजूरी केवल पर्यटन विकास परियोजना के लिए थी।

हालांकि, टीडीपी का ऐसा आरोप है कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार ने कानूनी दिशा-निर्देशों को दरकिनार करते हुए महल को जगन मोहन रेड्डी के निजी इस्तेमाल के लिए बनाने का इरादा किया था। मौसूदा टीडीपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार अब इस आलीशान संपत्ति को फिर से इस्तेमाल करने की चुनौती से जूझ रही है।

मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के प्रशासन ने जगन मोहन रेड्डी पर सार्वजनिक धन के घोर दुरुपयोग का आरोप लगाया है, कुछ अनुमानों के अनुसार कुल खर्च 600 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। हालांकि, वाईएसआरसीपी के पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ ने पिछली सरकार के फैसले का बचाव किया है। साथ ही, कहा है कि यह परियोजना कानूनी मापदंडों का पालन करती है।

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