Global warming को लेकर 82% भारतीय क्या सोचते हैं? आशावादी हैं इस शोध के नतीजे
Global warming: मौसम में इतना ज्यादा बदलाव क्यों हो रहा है, इसके प्रति अधिकतर भारतीय जागरूक हैं। वह जलवायु परिवर्तन के प्रति गंभीर हैं और भारत सरकार से नेतृत्व चाहते हैं। एक सर्वे में यह खुलासा हुआ है।

ग्लोबल वार्मिंग को लेकर भारतीयों पर एक शोध हुआ है, जिसके नतीजे उम्मीदें जगा रही हैं। इसके मुताबिक करीब 82 फीसदी भारतीय इसको लेकर या तो सतर्क हैं या चिंतित हैं। ये इस बात का समर्थन करते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने के लिए ऊर्जा नीतियां लागू की जानी चाहिए।

ग्लोबल वार्मिंग: आशावादी हैं भारतीयों पर हुए शोध के नतीजे
ये शोध रिपोर्ट ग्लोबल वार्मिंग फोर इंडियाज, 2022 के नाम से है। इसे येले प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज कम्युनिकेशन और सी वोटर इंटरनेशनल की ओर से तैयार किया गया है। इसमें भारतीय जनता में चार तरह के लोगों को वर्गीकृत किया गया है। इसमें भयभीत-54%, चिंतित-20%, सतर्क- 11% और जिन्हें इससे कोई मतलब नहीं है, वैसे सिर्फ 7% लोग हैं।

यह अच्छी बात है कि अधिकांश भारतीय पहली तीन श्रेणियों में शामिल हैं, जो जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए नीतियां बनाए जाने के समर्थक हैं। उनकी राय है कि भारत सरकार को ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए और भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
सरकार से यह चाहते हैं भारतीय
ये ग्लोबल वार्मिंग को लेकर भारतीय को शिक्षित करने के भी पक्ष में हैं। ये चाहते हैं कि लोगों को नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर प्रशिक्षण मिले, स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण के लिए लोगों को चेक डैम बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। यही नहीं वे चाहते हैं कि दूसरे देशों से पहले भारत तत्काल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करे।

जलवायु नीतियों का समर्थन करते हैं भारतीय
इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस स्थित भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी के एसोसिएट प्रोफेसर (रिसर्च) और रिसर्च डायरेक्टर डॉक्टर अंजल प्रकाश का कहना है, 'इस रिपोर्ट के अनुसार भारतीय जनता का संदेश स्पष्ट है। जलवायु परिवर्तन को लेकर सभी तरह के भारतीय चिंतित हैं, जलवायु नीतियों का समर्थन करते हैं और सरकार से नेतृत्व चाहते हैं।'
Recommended Video

ग्रामीण भारत के लोग तो कमाल करते हैं
'भयभीत' श्रेणी में 52% लोग ग्रामीण इलाकों के हैं, 32% शहरी क्षेत्रों से हैं और 16% अर्ध-शहरी क्षेत्रों से हैं। 'चिंतित' श्रेणी में 58% ग्रामीण, 27% शहरी और 15% अर्ध-शहरी क्षेत्रों के हैं। वहीं 'सतर्क' श्रेणी में भी सबसे ज्यादा 61% ग्रामीण, 26% शहरी और 13% अर्ध-शहरी क्षेत्रों के हैं।

मौसम में हो रहे बदलावों पर नजर रख रहे हैं लोग
वैसे जिन लोगों को इस वैश्विक समस्या से कोई मतलब नहीं है, उनमें भी 45% ग्रामीण, 29% शहरी और 26 फीसदी अर्ध-शहरी इलाकों के हैं। सर्वे में जिन लोगों को शामिल किया गया है, वह मौसम में हो रहे असमान्य बदलावों पर गौर कर रहे हैं। उन्हें एक्स्ट्रीम क्लाइमेट इवेंट्स की भी जानकारी है।

सर्वे में 18 साल से अधिक के लोग शामिल
इस सर्वे में 18 साल से अधिक के 4,619 भारतीयों को शामिल किया गया। यह सर्वे 21 अक्टूबर, 2021 से 9 जनवरी, 2022 के बीच किया गया था। इसमें येले प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज कम्युनिकेशन के एंथनी लीसेरोविट्ज और क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के जदगीश ठक्कर प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर थे।

यह एक ऐसा सर्वे है, जिससे सरकार को नई ताकत मिल सकती है और वह इस समस्या पर ठोस कदम उठा सकती है।क्योंकि, जब जनता जागरूक है तो फिर किसी नीति को लागू करने में भी ज्यादा सहायता मिल सकती है। (स्रोत-पीटीआई)












Click it and Unblock the Notifications