Geminid Meteor Shower: आज रात होगी उल्कापिंडों की बारिश, जानिए भारत में कब-कहां दिखेगा दिलकश नजारा?

जेमिनिड चमकीले और पीले रंग के होते हैं और इनकी गति भी काफी तेज होती है,नासा के मुताबिक जेमिनिड को सबसे पहले 18000 के दशक में देखा गया था।

Geminid Meteor Shower 2022:

Meteor Shower in India (भारत में उल्कापिंड की बारिश) 2022: : 'आज की रात आसमान से बरसेगी रोशनी, बेहद दिलकश होगा नजारा...' ये किसी शायर का ख्याल नहीं बल्कि वैज्ञानिकों की ओर से दी गई जानकारी है। दरअसल आज की रात यानी 14-15 दिसंबर के दरमियान पृथ्वी पर उल्कापिंडों की बारिश होने जा रही है, जिसे कि ये जेमिनिड मेटियोर शॉवर नाम दिया गया है, जिस वक्त ये बारिश होगी उस वक्त पूरा आसमान जगमगा उठेगा। भारत भी इस अद्भुत घटना का साक्षी बनेगा।

आइए आपको भी बताते हैं कि ये खूबसूरत नजारा आप कहां और कैसे देख पाएंगे?

Geminid Meteor Shower नाम दिया गया

Geminid Meteor Shower नाम दिया गया

आपको बता दें कि इस बार उल्कापिंडों की बारिश जेमिनी नक्षत्र में होगी इसलिए इसे Geminid Meteor Shower नाम दिया गया है, जो कि भारत में 14-15 दिसंबर की रात 2:00 AM से 3:00 AM के बीच स्प्ष्ट रूप से नजर आएंगे। सूर्य ग्रहण की तरह इसे देखने के लिए आपको किसी स्पेशल चश्मे, ग्लास या एक्सरे प्लेट की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि इसे आप नग्न आंखों से भी देख सकते हैं।

'उल्का पिंडों की बारिश पूरे विश्व में दिखाई देगी

'उल्का पिंडों की बारिश पूरे विश्व में दिखाई देगी

नासा ने कहा है कि 'उल्का पिंडों की बारिश पूरे विश्व में दिखाई देगी'। आप वैसे उसके सोशल अकाउंट पर लाइव भी देख सकते हैं। भारत में इसका सबसे अच्छा नजारा कर्नाटक के बेंगलुरु और हैदराबाद में देखने को मिलेगा क्योंकि यहां अन्य क्षेत्रों की तुलना में प्रदूषण कम है और लगातार हो रही बारिश की वजह से यहां की हवा में और ज्यादा सुधार हो गया है।

क्यों होती है उल्कापिंडों की बारिश?

क्यों होती है उल्कापिंडों की बारिश?

अब सवाल ये उठता है कि उल्कापिंडों की बारिश होती क्यों हैं? तो आपको बता दें कि जब पृथ्वी सूरज का चक्कर लगाते हुए उस कक्षा में पहुंचती है, जहां पर उल्कापिंडों होते हैं, तब ग्रविटेशनल फोर्स यानी कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति की वजह उल्का पिंड हमारे वायुमंडल में प्रवेश कर जाते हैं और जलते हुए दिखाई देते हैं, यही घटना उल्का बारिश कहलाती है।

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जेमिनिड चमकीले और पीले रंग के होते हैं

आपको बता दें कि जेमिनिड चमकीले और पीले रंग के होते हैं और काफी तेज गति वाले हैं। नासा के मुताबिक जेमिनिड को सबसे पहले 18000 के दशक में देखा गया था। जेमिनीड उल्का बारिश सबसे गर्म उल्का बारिशों में से एक है। आज की रात करीब 150 उल्काएं पृथ्वी पर बरसेंगी।

क्या होते हैं उल्का पिंड?

क्या होते हैं उल्का पिंड?

आकाश में कभी-कभी जलती हुई रोशनी के साथ एक गोले को तेजी से मूव करते हुए आपने देखा होगा , ये ही गोला उल्का कहलाती है और जब ये जलते हुए तेजी से पृथ्वी की ओर आते नजर आते हैं तो ये उल्कापिंड कहते हैं, जिन्हें कि साधारण बोलचाल में 'टूटते हुए तारे' अथवा 'लूका' भी कहा जाता है।

 बेसब्री से होता उल्का बारिश का इंतजार

बेसब्री से होता उल्का बारिश का इंतजार

दरअसल उल्कापिंड धूमकेतू के ही टुकड़े होते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से इनका महत्त्व बहुत अधिक है क्योंकि इन्हीं के जरिए ब्रह्मांड के ग्रहों की चाल और संरचना के विषय में पता लगाया जाता है इसलिए उल्का बारिशों का इंतजार वैज्ञानिकों को बेसब्री से होता है। ये दो तरह के होते हैं, कुछ उल्का लोहे, निकल या मिश्रधातुओं से मिलकर बने होते हैं तो कुछ सिलिकेट खनिजों के बने होते हैं।

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