गगनशक्ति 2018: पाकिस्‍तान की ओर से परमाणु या बॉयोलॉजिकल हमले मुंहतोड़ जवाब देगी इंडियन एयरफोर्स!

इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) का मेगा युद्धाभ्‍यास गगनशक्ति 2018, 13 दिन के बाद खत्‍म हो गया है। इस युद्धाभ्‍यास के जरिए आईएएफ ने चीन और पाकिस्‍तान की तरफ से आती चुनौतियों के मद्देनजर अपनी ताकत को परखा। इसके साथ ही आइएएफ ने परमाणु और बायोलॉजिकल वॉर की संभावना में अपनी ताकत को भी परखा है।

नई दिल्‍ली। इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) का मेगा युद्धाभ्‍यास गगनशक्ति 2018, 13 दिन के बाद खत्‍म हो गया है। इस युद्धाभ्‍यास के जरिए आईएएफ ने चीन और पाकिस्‍तान की तरफ से आती चुनौतियों के मद्देनजर अपनी ताकत को परखा। इसके साथ ही आइएएफ ने परमाणु और बायोलॉजिकल वॉर की संभावना में अपनी ताकत को भी परखा है। इस युद्धाभ्‍यास के जरिए आइएएफ क्षेत्र में बदलते हालातों के बीच अपनी क्षमताओं का जायजा लेना चाहती थी। आधिकारिक सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक आठ अप्रैल से 20 अप्रैल तक चले गगनशक्ति के जरिए किसी भी चुनौती से निबटने के लिए एयरफोर्स अपने ऑपरेशनल प्‍लान्‍स की सफलता देखना चाहती थी जिसमें परमाणु युद्ध के अलावा चीन और पाकिस्‍तान के साथ दो तरफा संभावित युद्ध भी शामिल है।

आठ तेजस रहे गगनशक्ति का हिस्‍सा

आठ तेजस रहे गगनशक्ति का हिस्‍सा

सूत्रों की ओर से बताया गया है कि आठ तेजस लाइट कॉम्‍बेट फाइटर जेट्स को एक्‍सरसाइज के दौरान तैनात किया गया था। हालांकि कुछ तेजस में हल्‍की तकनीकी समस्‍याएं आई थीं। साथ ही छह तेजस ने सुखोई, मिराज और मिग-29 जैसे जेट्स की तरह ही सफलतापूर्वक रोजाना छह सॉर्टीज को अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक इस एक्‍सरसाइज के जरिए आइएएफ बायोलॉजिकल, केमिकल और परमाणु युद्ध के समय अपनी तैयारियों को इस एक्‍सरसाइज के जरिए परखना चाहती थी और आइएएफ अपनी तैयारियों से काफी संतुष्‍ट है।

ब्रह्मोस और हारपून मिसाइलें भी रहीं शामिल

ब्रह्मोस और हारपून मिसाइलें भी रहीं शामिल

सूत्रों ने यह जानकारी भी दी है कि सभी हथियारों को भी कई एयर ऑपरेशंस के जरिए इस एक्‍सरसाइज में चेक किया गया था। एयरफोर्स की ओर से मेगा युद्धाभ्‍यास में फाइटर जेट्स जो ब्रह्मोस और हारपून जैसी एंटी-शिप मिसाइलों से लैसे हैं उन्‍हें भी प्रयोग किया गया था। इस एक्‍सरसाइज के जरिए जेट्स ने 11,000 से ज्‍यादा सॉर्टीज को पूरा किया जिसमें 9,000 सॉर्टीज फाइटर एयरक्राफ्ट की ओर से अंजाम दी गई थीं। आइएएफ की ओर से यह एक्‍सरसाइज ऐसे समय में हुइ है जब चीन, भारत से सटी सीमा पर अपनी तैयारियों को बढ़ा रहा है तो वहीं पाक के साथ भी एलओसी पर तनाव बढ़ता जा रहा है।

रेगिस्‍तान से लेकर लद्दाख की पहाड़‍ियों पर भी परखी क्षमता

रेगिस्‍तान से लेकर लद्दाख की पहाड़‍ियों पर भी परखी क्षमता

एक्‍सरसाइज को रेगिस्‍तान, ऊंचाई वाले इलाकों जैसे लद्दाख और कोस्‍टल बॉर्डर पर अंजाम दिया गया है। चीन के करीब युद्धाभ्‍यास के समय आइएएफ ने ट्रूप्‍स के ट्रांसफर के समय खासा ध्‍यान दिया। डोकलाम विवाद के बाद चीन के साथ फिर से तनाव की स्थिति न पैदा हो, एयरफोर्स ने इसका पूरा ध्‍यान रखा था। फाइटर एयरक्राफ्ट की सर्विसबिलिटी और मिसाइल सिस्‍टम आइएएफ के लिए सबसे खास थे और इस क्षेत्र में आइएएफ को खासी सफलता भी मिली है। एयरफोर्स के मुता‍बिक हवा से हवा में मार कर सकने वाली मिसाइल की सर्विसबिलिटी 97 प्रतिशत तो फाइटर जेट की सर्विसबिलिटी 80 प्रतिशत के करीब रही।

पाकिस्‍तान ने भी रखी हर पल नजर

पाकिस्‍तान ने भी रखी हर पल नजर

एयरमार्शल धनोआ ने इस बारे में बताया था कि इस एक्‍सरसाइज पर पाकिस्‍तान की भी नजरें थीं। उन्‍होंने इस एक्‍सरसाइज को 'आसमान हिलाने वाला और जमीन को फाड़ने वाला' करार दिया था। गगनशक्ति एयरफोर्स की सबसे बड़ी एक्‍सरसाइज थी और एक्‍सरसाइज के लिए आईएएफ के जेट्स को वेस्‍टर्न सेक्‍टर से ईस्‍टर्न फ्रंट की ओर रवाना किया गया। 48 घंटे से भी कम समय में ये जेट्स पहुंच गए थे। धनोआ ने जानकारी दी कि इस ड्रिल के लिए 22 अप्रैल तक एयरफोर्स की तरफ से सभी तरह की ट्रेनिंग एक्टिविटीज को सस्‍पेंड कर दिया गया है। ऐसा सिर्फ युद्ध के समय होता है जब सेनाएं अपनी ट्रेनिंग एक्टिविटीज को कुछ समय के लिए रोक देती है।

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