G-20: नालंदा महाविहार की फोटो के सामने राष्ट्रपति-PM ने डिनर के लिए मेहमानों का किया स्वागत, जानें इसका इतिहास
Nalanda Mahavihar: दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन की बैठक चल रही है। 20 ताकतवर देशों के राष्ट्राध्यक्षों का यहां जमावड़ा लगा हुआ है। पूरी दुनिया की नजर इस वक्त दिल्ली पर है। आज पहले दिन की जी-20 की बैठक खत्म हुई। इसके बाद विदेशी मेहमान डिनर के लिए भारत मंडपम पहुंच रहे हैं।
इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मेहमानों का स्वागत किया। भारत मंडप की भव्यता तो देखते ही बन रही है। इसमें नालंदा महाविहार की तस्वीर लगी है। खास बात है कि महामहिम द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी नालंदा महाविहार की तस्वीर के सामने मेहमानों को डिनर के लिए स्वागत कर रहे हैं।

आइए आपको नालंदा महाविहार के इतिहास के बारे में बताते हैं। यह तस्वीर आखिर क्यों इतनी महत्वपूर्ण है। नालंदा प्राचीन भारत में उच्च शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विख्यात केन्द्र था। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए छात्र यहीं आते थे। महायान बौद्ध धर्म के इस शिक्षा केन्द्र में हीनयान बौद्ध-धर्म के साथ ही अन्य धर्मों के तथा अनेक देशों के छात्र पढ़ते थे।
यह बिहार की राजधानी पटना से करीब 90 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और राजगीर से करीब 12 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। यहां 10 हजार छात्रों को पढ़ाने के लिए 2 हजार शिक्षक थे। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने 7वीं शताब्दी में यहां जीवन का महत्त्वपूर्ण एक वर्ष एक विद्यार्थी और एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किया था। प्रसिद्ध 'बौद्ध सारिपुत्र' का जन्म यहीं पर हुआ था।
यह विश्व का पहला आवासीय विश्वविद्यालय था। इस विश्वविद्यालय में कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस तथा तुर्की से भी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे। यह विश्वविद्यालय कला का अद्भुत नमूना था। इसका पूरा परिसर एक विशाल दीवार से घिरा हुआ था, जिसमें प्रवेश के लिए एक मुख्य द्वार था।
कमरे में छात्र के सोने के लिए पत्थर की चौकी होती थी। आठ विशाल भवन, दस मंदिर, अनेक प्रार्थना कक्ष तथा अध्ययन कक्ष के अलावा इस परिसर में सुंदर बगीचे तथा झीलें भी थीं।
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