इलयाराजा, धोनी, पंकज आडवाणी समेत 85 को मिले पद्म पुरस्कार
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नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म की सूची गृह मंत्रालय ने आज जारी की। इस सूची में कुल 85 लोगों के नाम हैं, जिन्हें यह पुरस्कार उनके कार्यक्षेत्र में विशिष्टता प्राप्त करने और राष्ट्र के प्रति अपना जीवन समर्पित करने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रदान करेंगे। इस बार 85 लोगों में से 3 नाम पद्म विभूषण , 9 नाम पद्म भूषण और 73 नाम पद्म श्री के लिए चुने गए हैं। बता दें कि इस बार पद्म विभूषण पुरस्कार तमिलनाडु निवासी,संगीत और कला के क्षेत्र में इलयाराजा और महाराष्ट्र निवासी गुलाम मुस्तफा खान को प्रदान किया जाएगा। वहीं साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में केरल निवसी परमेश्वरन को पद्म विभूषण से नवाजा जाएगा।

जारी की गई सूची के अनुसार पद्म भूषण पुरस्कार विजेताओं की सूची में कर्नाटक निवासी स्नूकर खिलाड़ी पंकज आडवाणी, आध्यात्म के क्षेत्र में केरल निवासी डॉक्टर फिलपोस, झारखंड निवासी क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी, सार्वजनिक मामलों में रूस निवासी एलेक्जेंडर कदकिन को मरणोपरांत, पुरातत्त्व के क्षेत्र में तमिलनाडु निवासी रामचंद्रन नागस्वामी, अमेरिका निवासी वेद प्रकाश नंदा को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया',ओसीआई), गोवा निवासी लक्ष्मण पाई कला और पेंटिंग, महाराष्ट्र निवासी अरविंद पारीख को कला और संगीत, कला और संगीत के ही क्षेत्र में बिहार निवासी शारदा सिन्हा का नाम शामिल है।
इसके साथ ही सरकार ने पद्म श्री पुरस्कारों की घोषणा की जिन्होंने गरीबों की सेवा की, मुफ्त स्कूलों की स्थापना की और विश्व स्तर पर आदिवासी कलाओं को लोकप्रिय बनाया। केरल की एक आदिवासी महिला लक्ष्मीकुट्टी, जो 500 हर्बल दवाओं को अपनी याददाश्त से तैयार करती है और विशेषकर सांप और कीटनाशक के मामलों में हजारों लोगों की मदद करती है, पुरस्कार विजेताओं में से एक है। वो केरल लोकगीत अकादमी में सिखाती है और एक छोटे से झोपड़ी में रहती है जो कि एक वन में जनजातीय इलाके में ताड़ के पत्तों की छत से बना है। वह 1950 के दशक में स्कूल जाने के लिए अपने क्षेत्र की एकमात्र आदिवासी महिला थी।
अरविंद गुप्ता, आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र जिन्होंने छात्रों को विज्ञान सीखने की पीढ़ियों को प्रेरित किया। उनको भी पद्म श्री के साथ सम्मानित किया गया है। गुप्ता ने चार दशकों में 3,000 स्कूलों का दौरा किया, 18 भाषाओं में 6,200 लघु फिल्में बनायीं और 1980 के दशक में लोकप्रिय टीवी शो तरंग की भी मेजबानी की।
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