क्यों है खास वायुसेना का हरक्यूलिस सी-130जे
बेंगलूर। ग्वालियर में शुक्रवार को जब हरक्यूलिस सी-130 के क्रैश होने की खबरें आईं तो हर कोई हैरान रह गया। इस हादसे में पांच एयरफोर्स पर्सनल की मौत हो गई। जब लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में हरक्यूलिस ने अपने कदम रखें थे तो चीन भी थर्रा उठा था। हरक्यूलिस के नाम पर एक लाख मिलियन घंटे की उड़ान पूरी करने का रिकॉर्ड दर्ज है।
शुक्रवार को यह एयरक्राफ्ट क्यों और कैसे क्रैश हुआ यह तो आगे पता लगेगा लेकिन इस एयरक्राफ्ट की कुछ ऐसी खूबियां इसे बाकी एयरक्राफ्ट्स से अलग साबित करती हैं। भारत के पास अभी छह हरक्यूलिस सी-130 जे एयरक्राफ्ट्स हैं और साल 2015 तक भारत को छह और हरक्यूलिस हासिल होंगे।
चार साल पहले करीब 6,000 करोड़ की कीमत से भारत ने अमेरिका के साथ इस एयरक्राफ्ट की डील साइन की थी तो लगा था कि इंडियन एयरफोर्स की ताकत बढ़कर दोगुनी हो जाएगी। पहले से ही पुराने और जंग लग चुके एयरक्राफ्ट्स से परेशान एयरफोर्स में जब लॉकहीड मार्टिन की ताकत पहुंची तो एयरफोर्स की खुशी भी दोगुनी हो गई। इंडियन एयरफोर्स के पायलट्स और अधिकारियों के एक समूह को खासतौर पर अमेरिका भेजा गया जहां पर उन्होंने इस एयरक्राफ्ट को ऑपरेट करने की ट्रेनिंग ली।
भारत के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन के साथ ही करीब 17 देश इसका प्रयोग कर रहे हैं। इस एयरक्राफ्ट ने जहां भारत में उत्तराखंड में आई त्रासदी के रेस्क्यू ऑपरेशन में एक बड़ा रोल अदा किया तो वहीं अमेरिका को ईराक और अफगानिस्तान में मदद की। इसके साथ ही लीबिया में जारी संघर्ष के समय नाटो के लिए भी यह बड़ा हथियार साबित हुआ था।

वायुसेना का सी130जे से घबराया था चीन
20 अगस्त 2013 को इंडियन एयरफोर्स के इस एयरक्राफ्ट ने दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में 16616 फीट की ऊंचार्इ पर कदम रखा था। सी-130 ने जब यहां पर अपने कदम रखे तो चीन भी घबरा गया था। हरक्यूलिस को यहां पर तैनात करने का कदम इसलिए भी उठाया गया क्योंकि चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी यानी पीएलए की ओर से लद्दाख क्षेत्र में घुसपैठ बढ़ती जा रही थी।

हरक्यूलिस सी130जे और उत्तराखंड आपदा
जून 2013 में जब उत्तराखंड में त्रासदी आई थी तो सी-130 जे ने वहां पर फंसे लोगों को निकालने में बड़ा रोल अदा किया था। उत्तराखंड के धारासू में सिर्फ 1300 मीटर की स्ट्रिप पर इसने लैंडिंग की थी। इसके बाद हरक्यूलिस ने 8,000 लीटर पेट्रोल की सप्लाई यहां पर राहत कार्यों में लगे एयरक्राफ्ट्स के लिए की और साथ ही इसकी मदद से 101 लोगों को वहां से निकाला जा सका।

Hercules C-130J में ग्लास कॉकपिट
सी-130 जे में दो पायलट और एक लोडमास्टर का क्रू होता है। इसका नया ग्लास कॉकपिट चार एल-3 डिस्प्ले सिस्टम्स, फ्लाइट कंट्रोल के लिए मल्टीफंक्शन लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले और नेविगेशन सिस्टम से लैस है।

कार्गों ट्रांसपोर्ट में सबसे आगे हरक्यूलिस सी130जे
सी-130 जे में 4,500 फिट से भी ज्यादा का कार्गो ट्रांसपोर्ट करने की ताकत है। इसमें पूरी तरह हथियारों से लैस तीन कैरियर्स, पांच बॉक्स, 92 इक्विप्ड कॉम्बेट ट्रुप्स, या फिर 64 पैराट्रूपर्स को आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।

युद्ध में भी ताकतवार हरक्यूलिस सी130जे
इसमें मिसाइल वॉर्निंग सिस्टम के अलावा इलेक्ट्रो ऑप्टि सेंसर्स भी मौजूद हैं जो किसी भी मिसाइल को डिटेक्ट कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें एडवांस्ड सिग्नल प्रोसेसिंग और किसी भी खतरे को पहले ही भांप लेने के लिए भी सिस्टम मौजूद हैं। रडार वॉर्निंग रिसीवर भी इसे काफी ताकतवर बनाते हैं। इसमें दी गई वेदर रडार की रेंज 250 मीटर है।

रफ्तार का शहंशाह हरक्यूलिस सी130जे
सी-130 जे 20,000 फीट की ऊंचाई पर 320 नॉटस सानी 592 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। इसकी रेंज 3332 किमी तक की है।

हरक्यूलिस सी130जे का वर्ल्ड रिकॉर्ड
हरक्यूलिस ने पांच अप्रैल 1996 से अपनी पहली उड़ान के साथ 30 अप्रैल 2013 तक 13 अलग-अलग देशों से उड़ान भरी और इसके साथ ही इसने एक मिलियन फ्लाइट ऑवर्स का रिकॉर्ड दर्ज किया। इसके अलावा इसके नाम पर 54 अलग-अलग रिकॉर्ड दर्ज हैं।












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