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भारत की पीठ में छुरा भोंकने वाले पाक की नीयत पर भरोसा क्‍यो?

नई दिल्‍ली। भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज इस समय इस्‍लामाबाद में हैं। वह बुधवार को पाकिस्‍तान की राजधानी पहुंची और उन्‍होंने गुरुवार को पाक के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की।

पहले फ्रांस की राजधानी पेरिस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की मुलाकात हुई तो वहीं थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में दोनों देशों के बीच एनएसए स्‍तर की वार्ता हुई।

पढ़ें-मुशर्रफ से हाथ मिलाने के बाद पूर्व पीएम वाजपेई ने कैसे लगाई थी पाक को फटकार

अब विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज खुद पाकिस्‍तान में मौजूद हैं। इन सारे प्रयासों को पाक के साथ शांति स्‍थापित करने और दोनों देशों के बीच रिश्‍तों को एक नए मोड़ पर लेकर जाने की कोशिशों के तहत देखा जा रहा है।

लेकिन पाकिस्‍तान का इतिहास हमेशा से ही यह कहता आया है कि इस देश पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता।

चाहे लाहौर हो, आगरा हो या फिर दोनों देशों के बीच हुई कई दौरों की द्विपक्षीय वार्ता, हर बार भारत को पाकिस्‍तान के हाथों धोखा झेलने को मजबूर होना पड़ा है। आगे की स्‍लाइड्स पर क्लिक करिए और जानिए पाकिस्‍तान की ओर से भारत को कब-कब और कैसे-कैसे धोखा मिला।

वर्ष 1999 लाहौर बस सर्विस

वर्ष 1999 लाहौर बस सर्विस

फरवरी 1999 में उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई बस लेकर लाहौर पहुंचे। उस समय नवाज शरीफ ही पाक के पीएम थे। उन्‍होंने गले लगाकर अटल बिहारी वाजेपई का स्‍वागत किया था।

कारगिल के साथ दिया धोखा

कारगिल के साथ दिया धोखा

दोनों देशों के बीच लाहौर घोषणापत्र के साथ ही एक नई शुरुआत हुई। माना जाने लगा कि अब रिश्‍तों की तल्‍खी दूर हो सकेगी। लेकिन उसी वर्ष मई में पाक ने कारगिल युद्ध का तोहफा भारत को दिया।

नवाज गए परवेज आए

नवाज गए परवेज आए

कारगिल युद्ध में भारत को विजय मिली और पाकिस्‍तान के हिस्‍से आई हताशा। उस समय पाक सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ का तख्‍ता पलट किया और इसके साथ ही वह देश के सर्वेसर्वा बन बैठे।

इस बार भी थीं लोगों को उम्‍मीदें

इस बार भी थीं लोगों को उम्‍मीदें

वर्ष 2001 आगरा समिटउस समय के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने शांति की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए आगरा समिट का आयोजन कराया। 14 जुलाई 2001 से 16 जुलाई 2001 तक चली इस समिट से भी पाक के सुधरने की उम्‍मीद थीं।

संसद पर हमला

संसद पर हमला

आगरा समिट के ठीक पांच माह बाद, 13 दिसंबर 2001 को संसद पर लश्‍कर-ए-तोयबा के आतंकियों ने हमला बोल दिया।

वर्ष 2004-2005 बातचीत बहाल

वर्ष 2004-2005 बातचीत बहाल

संसद पर हमले के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत पर पूरी तरह से लगाम लग गई। लेकिन वर्ष 2004 और फिर 2005 में दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत की शुरुआत हुई।

2008 में अंजाम दिया मुंबई हमला

2008 में अंजाम दिया मुंबई हमला

लेकिन पाक तो पाक ठहरा, इस बातचीत के बाद, कई वादों के बाद भी उसने भारत पर वर्ष 2008 में मुंबई हमला करा डाला।

वर्ष 2006 में मुंबई की लोकल पर हमला

वर्ष 2006 में मुंबई की लोकल पर हमला

इन हमलों से पहले मुंबई की लोकल ट्रेनों पर हुए हमले को भी कोई नहीं भूल सकता है। सिर्फ 11 मिनट में हुए सात सीरियल ब्‍लास्‍ट्स में 209 मासूम लोगों की मौत हो गई थी।

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