Odisha: ओडिशा के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता समीर डे का निधन, सीएम और राज्यपाल ने जताया शोक
Odisha: भाजपा के वरिष्ठ नेता और ओडिशा के पूर्व मंत्री समीर डे का सोमवार को कटक के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। परिवार के अनुसार डे लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे और पिछले कई दिनों से गहन चिकित्सा में भर्ती थे।
राजनीतिक सफर और उपलब्धियां
समीर डे तीन बार ओडिशा विधानसभा के लिए चुने गए। उन्होंने 1995, 2000 और 2004 में कटक विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। पेशे से वकील समीर डे ने 2000 से 2009 तक बीजद-भाजपा गठबंधन सरकार में शहरी विकास, जन शिकायत एवं पेंशन प्रशासन और उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी। उनके योगदान को राज्य के विकास और जन कल्याण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

राजनीतिक और सामाजिक नेताओं की श्रद्धांजलि
राज्यपाल रघुबर दास ने समीर डे के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा कि जन कल्याण में समीर डे के योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माजी ने X पर अपनी संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि समीर डे के निधन से राज्य ने एक समर्पित और दूरदर्शी नेता खो दिया है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि डे का अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री के वी सिंह देव ने समीर डे के साथ विधानसभा में बिताए समय को याद करते हुए कहा कि समीर डे का समर्पण और ज्ञान उनकी विरासत को हमेशा जीवित रखेगा।
राष्ट्रीय नेताओं से श्रद्धांजलि
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने समीर डे को एक कुशल और प्यारे नेता के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि उनके विकास कार्यों और जनता के प्रति समर्पण को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने भी समीर डे के योगदान को स्वीकारते हुए शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ओडिशा के विकास में उनके योगदान को हमेशा सम्मान दिया जाएगा।
राजनीतिक दलों में शोक की लहर
समीर डे के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी शोक व्यक्त किया। कई मंत्रियों और नेताओं ने उनके निधन को राज्य की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।
जनता के दिलों में अमिट छवि
समीर डे न केवल एक कुशल राजनेता बल्कि जनता के प्रति संवेदनशील नेता के रूप में भी प्रसिद्ध थे। उनके द्वारा शुरू किए गए शहरी विकास और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम आज भी उनके योगदान की गवाही देते हैं।
समीर डे का जाना ओडिशा के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में एक युग का अंत है। उनका समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा हमेशा याद की जाएगी।












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