6 दशक से नक्सलियों का गढ़ रहा स्वाभिमान अंचल लौटने लगा मुख्य धारा में, जानिए कैसे आने लगा ये बदलाव
नई दिल्ली। ओडिशा (Odisha) में मलकानगिरी (Malkangiri) जिले का स्वाभिमान अंचल (Swabhiman Anchal) इलाका एक समय पर माओवाद का गढ़ कहा जाता था, लेकिन अब ये इलाका धीरे-धीरे मुख्य धारा में जुड़ता जा रहा है। स्वाभिमान अंचल इलाके को शुरुआत से ही मलकानगिरी जिले का 'कट-ऑफ' क्षेत्र कहा जाता था, लेकिन अब ये इलाका नक्शे पर वापस आता दिख रहा है और ये सब राज्य सरकार की योजनाओं और प्रयास का असर है।

अक्टूबर में इस इलाके में फहराया गया था तिरंगा
बीते अक्टूबर के महीने में स्वाभिमान अंचल के गुरासेतु इलाके की एक इमारत पर फहरता हुआ तिरंगा इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि यहां अब हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं। पिछले छह दशक से नक्सलियों का गढ़ रहे इस इलाके में बीएसएफ के अधिकारियों ने तिरंगा फहराकर नक्सलियों के इरादों को करारा झटका दिया था।
इसी साल जुलाई में इस इलाके में चली पहली यात्री बस
इसके अलावा जुलाई 2020 में इस इलाके में आजादी के बाद पहली बार यात्री बस का संचालन किया गया था। चित्रकोंडा के विधायक ने ओडिशा राज्य सड़क परिवहन निगम की एक बस को चित्रकोंडा से मलकानगिरी ज़िले के जोडाम्बो (Jodambo) के लिए रवाना किया था। जोडाम्बो इलाके में भी एक नए पुलिस स्टेशन का निर्माण हुआ है। साल 2018 से पहले इस इलाके में परिवहन का एकमात्र साधन नाव हुआ करती थी, लेकिन 2018 में गुरुप्रिया ब्रिज बनने के बाद ये क्षेत्र सड़क मार्ग से जुड़ गया।
सुरक्षाबलों के लिए भी 'मौत का कुंआ' था स्वाभिमान अंचल
- 150 से ज्यादा गांव वाला स्वाभिमान अंचल इलाका माओवाद से बहुत ज्यादा प्रभावित था। यहां के लोगों में और राज्य की पुलिस में भय का माहौल रहता था।
- 2008 में यहां नक्सलियों ने घात लगाकर किए गए एक हमले में 39 सुरक्षाबलों को मार गिराया था, जिसमें से अधिकतर आंध्र प्रदेश पुलिस के थे।
- 2011 में मलकानगिरी के तत्कालीन कलेक्टर का नक्सलियों ने अपहरण भी कर लिया था। ये अपहरण उस वक्त हुआ था, जब वो इलाके में चल रहे विकास कार्यों के निरीक्षण करने गए थे।
- साल 2012 में बीएसएफ के एक कमांडेंट सहित चार जवानों की एक धमाके में मौत हो गई थी। आपको बता दें कि इस इलाके में ओडिशा के साथ-साथ आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के नक्सली भी आकर शरण लेते थे और यही वजह थी कि इस इलाके को खतरनाक माना जाता था।












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