असम में भाजपा को झटका, सहयोगी पार्टी नागरिकता कानून की वजह से छोड़ सकती है साथ

गुवाहाटी। असम के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की सहयोगी पार्टी एजीपी (असम गण परिषद) से सांसद प्रफुल्ल कुमार महन्त ने अपनी पार्टी के फैसले पर आपत्ति जताई है। क्योंकि उनकी पार्टी ने नागरिकता संशोधन बिल (अब कानून) (CAA) के पक्ष में वोट दिया था। जो लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गया था। उन्होंने कहा कि ये दुर्भाग्य की बात है कि हमने लोकसभा और राज्यसभा में बिल के पक्ष में वोट दिया था।

समर्थन वापस लेने के विकल्प पर विचार

समर्थन वापस लेने के विकल्प पर विचार

एक समाचार वेबसाइट से बातचीत में उन्होंने कहा, 'हम असम में सरकार से समर्थन वापस लेने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।' अब महन्त के बयान के बाद पार्टी का इस कानून से यूटर्न लेना स्पष्ट हो गया है। महन्त ने ये भी कहा, 'प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को असम के लोगों के बारे में सोचना चाहिए और ये कानून यहां लागू नहीं होना चाहिए। हम इस कानून को असम में मंजूरी नहीं देंगे।'

याचिका दायर करने का फैसला

याचिका दायर करने का फैसला

इससे पहले महन्त की पार्टी के प्रवक्ता जयनाथ शर्मा ने कहा था, 'एजीपी ने एक याचिका दायर करने का फैसला लिया है। हमारी पार्टी के अध्यक्ष प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह से अनुरोध करेंगे कि ये कानून असम में लागू नहीं होना चाहिए। हम एनडीए में सहयोगी हैं और भाजपा को असम के लोगों को सम्मान देना चाहिए।'

असम के लोग नाराज

असम के लोग नाराज

सूत्रों के अनुसार, असम में नागरिकता कानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों से एजीपी को ये समझ में आ गया है कि लोग उनसे नाराज हैं क्योंकि उन्होंने भाजपा का साथ दिया। भाजपा के नेतृत्व वाली असम सरकार में एजीपी के तीन मंत्री हैं। फिलहाल एजीपी इस मुद्दे पर भाजपा से बातचीत कर रही है।

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