कोरोना ने नहीं सिस्टम ने मारा! पूर्व राजनयिक अशोक अमरोही ने अस्पताल के बाहर तड़पते हुए तोड़ा दम
गुड़गांव में पूर्व राजदूत अशोक अमरोही की अस्पताल के बाहर तड़पकर मौत हो गई लेकिन मेदांता अस्पताल ने उन्हें भर्ती नहीं किया।
गुड़गांव, अप्रैल 30: कोरोना महामारी भारत सरकार के साथ साथ राज्य सरकारों की नाकामयाबी को परत दर परत उघार रही है। देश की सरकार दावों की बरसात कर रही है लेकिन हकीकत ये है कि देश के पूर्व राजनिक तक को अस्पताल के बाहर तड़प-तड़पकर जान देने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कई देशों में भारतीय राजदूत रह चुके अशोक अमरोही 5 घंटे से ज्यादा वक्त तक अस्पताल के बाहर इलाज के लिए तड़पते रहे, लेकिन उन्हें अस्पताल में दाखिला नहीं मिला और फिर अशोक अमरोही की तड़प-तड़पकर मौत हो गई।

तड़प-तड़पकर पूर्व राजनयिक का निधन
कई देशों में भारतीय राजनयिक रह चुके अशोक अमरोही का गुड़गांव के मेदांता अस्पताल के बाहर तड़प-तड़पकर मौत हो गई। वो पांच घंटे से ज्यादा वक्त तक अस्पताल की पार्किंग में भर्ती होने का इंतजार करते रहे लेकिन उन्हें अस्पताल में दाखिल नहीं करवाया गया। मेदांता अस्पताल मे अशोक अमरोही के परिवारवालों को कागजी कार्रवाई में ही उलझाए रखा लेकिन उन्हें भर्ती नहीं किया। अब जब पूर्व राजनयिक अशोक अमरोही का निधन हो चुका है तो तमाम नेता उन्हें शोक संदेश समर्पित कर रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट कर अशोक अमरोही को अपना अच्छा दोस्त बताया है लेकिन इस सवाल का जबाव कोई देने के लिए तैयार नहीं है कि आखिर अशोक अमरोही को अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं किया है और इस लापरवाही के लिए किसे दोषी ठहराया जाए। अशोक अमरोही ब्रूनेई, अल्जीरिया, मोजांबिया में भारत के प्रतिनिधि के तौर पर काम कर चुके है।
अब शोक की बरसात
सिस्टम ने अशोक अमरोही की जान ले ली है और अब वही सिस्टम उनकी मौत के बाद आंसू बहा रहा है। अशोक अमरोही की मौत के बाद अल्जीरिया में भारतीय दूतावास ने शोक जताया है। वहीं कई और देशों ने भी अशोक अमरोही के निधन पर शोक जताया है। कतर ने भी अशोक अमरोही के निधन पर शोक जताते हुए कहा है कि वो कतर में भारतीय समुदाय के बीच काफी लोकप्रिय थे। द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक उनकी पत्नी ने कहा है कि अशोक अमरोही पिछले हफ्ते बीमार पड़ गये थे और उनकी तबीयत खराब होने लगी थी। जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें फौरन अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कहा था। अशोक अमरोही के परिवार के मुताबिक अस्पताल ने परिवार को बताया कि रात 8 बजे के बाद ही अस्पताल में बेड खाली हो जाएगा।
अस्पताल ने करवाया इंतजार
अशोक अमरोही के परिवारवालों का आरोप है कि अस्पताल ने उन्हें दाखिले के लिए रात 8 बजे बुलाया था और वो साढ़े सात बजे अस्पताल पहुंथे थे। अस्पताल ने उन्हें बेड नंबर भी दे दिया लेकिन कोरोना जांच के नाम पर उन्हें डेढ़ घंटे तक बाहर ही रखा गया। इस दौरान अशोक अमरोही कार की अगली सीट पर बैठे हुए थे। अशोक अमरोही की पत्नी यामिनी के मुताबिक 'उनका बेटा अस्पताल में भर्ती प्रक्रिया के लिए लाइन में लगा हुआ था लेकिन अस्पताल वाले प्रोसेस के नाम पर लगातार लेट लगा रहे थे। इस दौरान अशोक अमरोही की स्थिति और खराब बिगड़ गई। इस दौरान मैं खुद कई बार अस्पताल वालों के पास दौड़कर कहने गई कि उन्हें जल्दी भर्ती कर लिया जाए क्योंकि उनकी स्थिति लगातार बिगड़ रही थीं। मैं चिल्ला रही थी, लेकिन कोई उनकी तरफ ध्यान देने के लिए तैयार नहीं था। उनकी सांसे उखड़ रही थी लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। अस्पताल ने ना उन्हें स्ट्रेचर दिया और ना ही व्हील चेयर।'












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