विदेश मंत्री एस जयशंकर लोकसभा में भारत-चीन संबंधों पर देंगे वक्तव्य, रिश्तों में ताजा सुधारों पर देंगे जानकारी
संसद के शीतकालीन सत्र में विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा, वित्तीय प्रणाली, रेलवे, तटीय शिपिंग और विमानन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विधायी प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा रहे हैं। यह सत्र 20 दिसंबर तक जारी रहेगा और भारत के विधायी माहौल को मजबूत करने के लिए कई प्रमुख मुद्दों पर चर्चा का मंच बन रहा है।
भारत-चीन संबंधों पर विदेश मंत्री का संबोधन
इस सत्र में लोकसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा भारत और चीन के कूटनीतिक संबंधों में नवीनतम प्रगति पर महत्वपूर्ण संबोधन की उम्मीद है। यह संबोधन वैश्विक और क्षेत्रीय राजनीति पर तटीय नौवहन विधेयक 2024 भारत की भूमिका को स्पष्ट करेगा।

भारत की समुद्री सुरक्षा और वाणिज्यिक उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तटीय नौवहन विधेयक 2024 पेश करेंगे। इसका उद्देश्य तटीय नौवहन को विनियमित करने वाले कानूनों को अद्यतन करना और भारतीय नागरिकों द्वारा तटीय बेड़े के संचालन को सुनिश्चित करना है।
वित्तीय क्षेत्र में सुधार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 और बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 में संशोधन का प्रस्ताव रखने वाली हैं। यह विधेयक भारत के बैंकिंग क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने और कानूनी ढांचे को अद्यतन करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
रेलवे और नागरिक उड्डयन में सुधार
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव रेलवे अधिनियम, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव पेश करेंगे। जिससे रेलवे के नियामक ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्र के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने की योजना है। इसके अलावा नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू भारतीय वायुयान विधेयक 2024 लाएंगे, जो विमान डिजाइन, निर्माण और संचालन के नियमन पर केंद्रित होगा।
तेल क्षेत्र के विनियमन में बदलाव
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा तेल क्षेत्र संशोधन विधेयक, 2024 पेश करने की संभावना है। इसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ देश के आर्थिक विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
कौशल विकास और नकली मुद्रा पर चर्चा
जयंत चौधरी कौशल विकास पर केंद्रित संकल्प परियोजना की प्रगति पर चर्चा करेंगे। जबकि पंकज चौधरी नकली मुद्रा से जुड़े पिछले बयान को सही करेंगे। जो वित्तीय ईमानदारी को प्राथमिकता देने का संकेत है।
सत्र का महत्व और व्यवधान
इस सत्र के दौरान विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर बहस की मांग की जिससे व्यवधान भी उत्पन्न हुए। इसके बावजूद सरकार द्वारा प्रस्तुत विधेयक और मंत्रियों के वक्तव्य भारत के आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और विनियामक सुधारों की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।












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