वित्त मंत्री ने सोनिया से हाथ क्यों जोड़े और राहुल गांधी को हिंदी में क्या-क्या सुनाया ?
नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कोरोना वायरस और उसके चलते जारी लॉकडाउन से राहत दिलाने के लिए घोषित 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के आत्मनिर्भर भारत पैकेज को विस्तार से बताने के बाद आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष खासकर कांग्रेस के बड़े नेताओं को खूब सुनाया। उन्होंने कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी से हाथ जोड़कर अपील की है कि प्रवासी मजदूरों के दुख में सबको साथ मिलकर काम करना चाहिए और इससे जुड़ी बातों पर पूरी जिम्मेदारी के साथ ही बोलना चाहिए। इस दौरान जैसे ही उनसे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों को लेकर सवाल पूछा गया, वो उनपर बहुत ही नाराज हो गईं और कांग्रेस सांसद को जमकर सुनाया। आमतौर पर शांत स्वाभाव वाली निर्मला सीतारमण का जो राहुल गांधी और कांग्रेस को लेकर आज जो अंदाज दिखा, वह बहुत ही अलग था और उनके चेहरे पर उनकी नाराजगी साफ झलक रही थी।
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मैं हाथ जोड़कर बोल रही हूं.........
आत्मनिर्भर भारत पैकेज के बारे में विस्तार से बताने का जब वक्त आया तो मीडिया ने प्रवासी भारतीयों से जुड़ी समस्याओं और उसपर कांग्रेस के आरोपों को लेकर वित्त मंत्री से सवाल पूछा था। उन्होंने विपक्षी पार्टियों और खासकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से कहा कि प्रवासी मजदूरों के मामले में सबको साथ में काम करना चाहिए और इस विषय पर हर किसी को पूरी जिम्मेदारी के साथ ही बोलना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा, "मैं विपक्षी पार्टी को हाथ जोड़कर विनम्रता से कहना चाह रही हूं....माइग्रेंट के विषय में हम सबको साथ होकर के काम करना चाहिए............ये क्या तरीका है? जैसे कि उनके राज्यों में माइग्रेंट को सारी सुविधा हो रही है, दूसरे राज्यों में नहीं हो रही है ? ये क्या राजनीति है? मैं हाथ जोड़कर कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से बोल रही हूं......हमें जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए.....प्रवासियों के बारे में जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। आई एम सॉरी........"

उनके बच्चों को लेकर चलते....सूटकेस लेकर चलते......
दरअसल, शनिवार को कांग्रेस नेता अचानक दिल्ली में सड़कों से गुजर रहे कुछ प्रवासी मजदूरों से मिलने पहुंच गए थे। उनके इस रवैये के बारे में ही सीतारमण से सवाल पूछा गया था। जैसे ही उनसे इस बारे में सवाल हुआ उन्होंने राहुल गांधी को हिंदी में सुनाना शुरू कर दिया- "मन में दुख लगता है कि माइग्रेंट आज सड़क पर.... अपने घर की ओर जा रहे हैं। क्योंकि, आपने कांग्रेस पार्टी का विषय उठाया, मैं भी कांग्रेस पार्टी को जवाब देना चाह रही हूं। क्यों ? उनके अपने-अपने राज्य सरकार जहां पर हैं और ट्रेन मंगवाएं..... और माइग्रेंट को उसमें बिठाएं। और माइग्रेंट को इतनी सुविधा के साथ.......हालांकि, सुविधा काफी नहीं है, फिर भी सुविधा के साथ उनके घर तक पहुंचाने के लिए उनके अपने राज्य को जहां कांग्रेस की सरकार हो या जहां उनके स्नेह पार्टी हैं, एलायंस पार्टी हैं.... उनके साथ बात करके, उनके साथ कॉपरेट करके और ट्रेन मंगवाएं...... और माइग्रेंट को ट्रेन में बिठाकर के उनके घर भेजें.... ना कि जब वो दुख के साथ पैदल जा रहे हैं, उनके टाइम बर्बाद करके उनके पास बैठकर के उनसे बातचीत करना...उससे बेहतर होगा उनके साथ पैदल जाकर के, उनके बच्चे को, उनके सूटकेस को लेकर के साथ चलते..... दुख के साथ कह रही हूं इस बात को। आराम से बोल सकते हैं.............. उनके अपने स्टेट को क्यों नहीं बोलती है कांग्रेस पार्टी। और ट्रेन लो, और ट्रेन मंगवाओं सेंटर से गवर्नमेंट से। उनमें उन माइग्रेंट को बिठाओ। क्योंकि, कांग्रेस पार्टी बोलती है ये ड्रामाबाज हर दिन....मैं अभी उन्हीं के शब्दों का उपयोग करना चाहती हूं। ड्रामाबाजी है.....कल जो हुआ, माइग्रेंट के चलते हुए, उनके बगल में बैठकर के बातचीत करने का वो समय है क्या ? वो ड्रामाबाजी नहीं है क्या ?
राहुल गांधी को हिंदी में ऐसे सुनाया....
असल में जब सो कोरोना वायरस का प्रकोप शुरू हुआ है और उसे फैलने से रोकने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने लॉकडाउन जैसे फैसले लिए हैं, उसके बाद अलग-अलग मुद्दों को लेकर सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार को घेरने की कोई कोशिश नहीं छोड़ी है। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का कोई भी वक्त खाली नहीं जाने दिया है। इसी कड़ी में राहुल गांधी शनिवार को लॉकडाउन के बीच में प्रवासी मजदूरों से मिलने के लिए पहुंच गए थे और उनके साथ सड़क पर ही बैठकर बातचीत शुरू कर दी थी। इस दौरान वहां प्रवासियों में सोशल डिस्टेंसिंग भी बिल्कुल नजर नहीं आ रही थी। सभी एक-दूसरे सटकर ही बैठ गए थे। यही वजह है कि जब वित्त मंत्री से रविवार को सवाल हुआ तो उन्होंने कांग्रेस नेता को हिंदी में सुनाना शुरू कर दिया। वो अंग्रेजी बोलना भूल गईं, जबकि वो अक्सर अंग्रेजी में ही बोलती हैं।
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