Flashback-2020: जानिए वो Words जो 2020 में सबसे ज्यादा हुए पॉपुलर
Flashback-2020: जानिए वो words जो 2020 में सबसे ज्यादा हुए पॉपुलर
Flashback-2020: Most discussed words in 2020: वर्ष 2020 को अलविदा होने में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। आप पिछले बीते वर्षों को भले याद न करते हो लेकिन ये वर्ष ता उम्र हर किसी को याद रहेगा। इसकी वजह है कि ये वर्ष हर किसी को जिंदगी के ऐसे अनुभव देकर जा रहा है जिसकी मनुष्य ने कल्पना भी नहीं की थी। इस साल फैली कोरोना महामारी में हर कोई शख्स घरों में कैद हो गया ये समय अब हम इस जीवन में कभी नहीं देखना चाहेंगे। आप 2020 के सबसे ज्यादा प्रचलित शब्द को चुनते हैं, तो वह कौन सा शब्द होगा? जाहिर सी बात है कि वो शब्द कोरोना से संबंधित ही होंगे। आइए जानते है वर्ष 2020 की इस महामारी में सबसे अधिक प्रचलित शब्द जिनका हमने पहले कभी नाम तक नहीं सुना था और इस महामारी में बच्चे-बच्चे की जुबान पर वो शब्द चढ़ गए।

कोरोना
कोरोना जिसका नाम वैज्ञानिक नाम कोविड 19 है। कोरोना नामक महामारी जब चीन में दिसंबर 2019 में फैलनी शुरू हुई तो लोगों को बस ये ही मालूम था कि वहां पर कोई संक्रमण की बीमारी चमगादड़ों से मनुष्यों में फैली है लेकिन मार्च महीने में ये संक्रमण पूरे देश में तेजी से फैल गया और कुछ ही समय में कोरोना शब्द लोगों की जुबान पर चढ़ गया। शुरूआती दौर में लोगों ने इसे करोना भी कहा लेकिन बाद में ये कोरोना शब्द छोटे-छोटे गांव में भी आम जन की भाषा में शामिल हो गया।

कोविड
कोरोना वायरस का वैज्ञानिक नाम सार्स कोव-2 (SARS CoV-2) है। कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी को कोविड-19 कहा जाता है। चूंकि यह वायरस साल 2019 में शुरू हुआ था, इसलिए इसके अंत में 19 जोड़ा गया है। कोरोना वायरस को छोटा करने पर कोविड मिलता है। महामारी फैलने के बाद कोविड शब्द शुरूआत में प्रचलन में नहीं था लेकिन कुछ ही समय में लोग ये जान गए कि कोरोना ही कोविड 19 है और पढ़ा लिखा वर्ग कोरोना के बजाए कोविड शब्द का इस्तेमाल करने लगा।
पैंन्डेमिक
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 मार्च को जब नोवल कोरोना वायरस प्रकोप को एक वैश्विक महामारी घोषित किया तो साइट पर महामारी शब्द सबसे अधिक खोजे जाने लगा। जब कोई बीमारी एक देश या इलाके से निकल पूरी दुनिया भर में फैल कर अपना प्रकोप बढ़ा देती है, इस स्थिति में बीमारी के पहुंचने पर उसे पैन्डेमिक कहा जाता है। सोकोलोव्स्की ने कहा कि साल भर साइट पर यह शब्द सबसे अधिक प्रचलन में रहा। अक्सर बड़ी खबर में एक तकनीकी शब्द होता है जो इसके साथ जुड़ा होता है और इस मामले में, पैंन्डेमिक शब्द न सिर्फ तकनीकी है बल्कि सामान्य हो गया है। यह संभवत: वह शब्द है जिसके जरिए हम भविष्य में इस अवधि का उल्लेख करेंगे। इस शब्द को मार्च से विश्वभर में व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा जब कोरोना वायरस प्रकोप को एक महामारी घोषित किया गया था, लेकिन जनवरी की शुरुआत से ही मरियम-वेबस्टर डॉट कॉम पर इसका चलन शुरू हो गया था जब क्रूज जहाजों पर यह प्रकोप फैला और पहले अमेरिकी व्यक्तियों की मौते हुईं।

सोशल डिस्टेंसिंग
सोशल डिस्टेंसिंग कोरोना काल में सबसे प्रचलित शब्दों में रहा जिसका अर्थ है सामाजिक दूरी। अपने सामान्य जीवन में हम घर-परिवार के इतर भी कई लोगों से मिलते हैं। बाजार, दफ्तर, यात्रा के दौरान कई लोगों से मेल-जोल होता है। इसी से सामाजिक संबंध समृद्ध होते हैं लेकिन संबंधों से दूरी बनाने का अर्थ है सोशल डिस्टेंसिंग। सोशल डिस्टेसिंग का पालन ही कोरोना से बचाव का सबसे बड़ा मंत्र था। ऐसे में विश्व के कई देशों में गले मिलने और हाथ मिलाने की परंपरा को लोगों ने भुला कर भारत के नमस्ते को अपनाया। लोगों से मिल जुल कर रहने वाले भारत में भी लोगों को बार-बार सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए सचेत किया गया। बता दें अगर हम किसी के करीब न जाएं या फिजिकल संपर्क तोड़ दे तो कोरोना के संक्रमण को रोका जा सकता है इसी वजह से सचभी कंपनियों ने सोशल डिस्टेसिंग बनाने के लिए वर्क फ्रॉम होम की सहूलियत अपने कर्मचारियों को दी है।
लॉकडाउन
कोरोना वायरस के कहर से पहले दुनिया को एक ग्लोबल विलेज यानी वैश्विक गांव माना जाता था। कोरोना के बढ़ते संक्रमण ने देशों को देशों से और शहरों को शहरों से काट दिया है। एके बाद एक देश ने अपने कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण करने के लिए लॉकडाउन लगा दिया। इससे पहले हमने ये शब्द सुना भी नहीं था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब भारत में लॉकडाउन की घोषणा की थी तो लोगों ने उसे कंप्लीट कफ्यू के तौर पर समझा था। धीरे-धीरे लॉकडाउन के शब्द के मायने लोगों को समझ में आ गया। लॉकडाउन यानी ऐसी स्थिति जिसमें न कोई बाहर जा रहा है और न ही कोई अंदर आ रहा है। लॉकडाउन एक आपातकालीन व्यवस्था है जो महामारी या किसी प्राकृतिक आपदा के वक्त किसी इलाके में सरकारी तौर पर लागू होती है। लॉकडाउन की स्थिति में उस इलाके के लोगों को घरों से निकलने की अनुमति नहीं होती है। उन्हें सिर्फ दवा या अनाज जैसी जरूरी चीजों के लिए बाहर आने जाने की अनुमति निश्चित समयावधि में दी जाती है।
वैक्सीन
कोरोना जब से फैला है तब से लोगों को ये ही समझ आया कि इसकी वैक्सीन आ जाएगी तो हम इससे सुरक्षित हो जाएंगे। ऐसे में वैक्सीन यानी कि टीका शब्द लोगों की जुबान पर चढ़ गया। हर कोई की बातचीत में ये शब्द शामिल हो गया।

इम्युनिटी
इम्युनिटी शब्द कोरोना महामारी के फैलने के साथ ही पॉपुलर हुआ। इसका मतलब है कि हमारे शरीर में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता। इस कोरोना महमारी में हर कोई अपनी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए काढ़ा, आयुर्वेदिक औषधियां और स्वास्थ्ययुक्त भोजन करने की बात करने लगा। इसके साथ अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उसने व्यायाम, योग समेत अन्य एक्सरसाइज अपने रुटीन में शामिल कर ली ताकि कोरोना से बचाव के लिए उनके शरीर का इत्युनिटी पॉवर बढ़ जाए क्योंकि शुरूआत से डाक्टरों ने ये ही कहा कि जिसके शरीर की इम्युनिटी मजबूत होगी वो कोरोना से मजबूती से लड़ सकेगा।
कोरोना वॉरियर
कोरोना महामारी के बाद एक और शब्द पॉपुलर हुआ जो था कोरोना वॉरियर। कोरोना वॉरियर हमारे देश के वो योद्धा थे जिन्होंने कोरोना महामारी में अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी ड्यूटी करते हुए अपना फर्ज निभाया। इनमें चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी, पुलिस कर्मी समेत अन्य लोग शामिल थे जो उस समय भी अपना काम करते हुए हम इंसानों के देवदूत बने रहे। इसमें कई कोरोना वॉरियर्स जिसमें डाक्टर, मेडिकल स्टाफ और पुलिसकर्मियों ने कोरोना की चपेट में आने के बाद अपनी जान गंवा दी। समय-समय पर कोरोना काल में धरती के इन भगवान को सरकार और लोगों द्वारा सम्मानित कर प्रोत्साहित कर उनका मनोबल बढ़ाया गया।

मास्क
कोरोना से बचाव के लिए मुंह पर मास्क ही हमारा सुरक्षा कवक बनकर हमारी रक्षा कर रहा है। बच्चे से लेकर बूढ़े हर इंसान के चेहरे पर मास्क चढ़ गया। 2020 में कोरोना का जितनी बार जिक्र हुआ उतनी बार मास्क का भी जिक्र हुआ। कोरोना बचाव में मास्क की भी बहुत अहमियत है। इस समय लोगों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क अवश्य पहनने की सलाह दी गई। इतना ही नहीं मास्क हमारी रूटीन लाइफ का हिस्सा बन गया और अब तो आलम ये है कि लोग ड्रेस की मैचिंग और स्टाइलिश मास्क पहनना पसंद कर रहे हैं। बड़े फैशनडिजाइन अपनी ड्रेस की मैंचिग का मास्क भी तैयार कर रहे हैं।

सैनिटाइजर
जबसे कोरोना वायरस का संक्रमण फैला है सैनिटाइजर (Sanitizer) शब्द जमकर यूज किया गया। शुरूआत से ही सेनिटाइजर के उपयोग की सलाह हेल्थ एक्सपर्ट्स की तरफ से दी जा रही। ये सलाह दी जारही कि सैनिटाइजर प्रभावी है, जिसमें अल्कोहल (Alcohol based sanitizer) की मात्रा 70 से 80 प्रतिशत हो। क्योंकि अल्कोहल में जिस तरह की प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं, वे कोरोना वायरस की ऊपरी सतह को खत्म करने में पूरी तरह समर्थ हैं। लेकिन इसकी पहली शर्त यही है कि आपके सैनिटाइजर में अल्कोहल की मात्रा 80 प्रतिशत तक होनी चाहिए क्योंकि अल्कोहल में वो प्रॉपर्टीज होती हैं, वे कोरोना वायरस की ऊपरी सतह को खत्म करने में पूरी तरह समर्थ हैंलेकिन इसकी पहली शर्त यही है कि आपके सैनिटाइजर में अल्कोहल की मात्रा 80 प्रतिशत तक होनी चाहिए। बता दें कोरोना वायरस एक शख्त तेलीय वायरस है जिसको साबुन या सेनिटाइजर ही समाप्त कर सकता है।
इन्क्यूबेशन
यदि कोई कोरोना वायरस की चपेट में आता है तो आवश्यक नहीं कि उसमें बीमारी के लक्षण तुरंत दिखार्ठ दें। इममें 15 दिन का भी समय लग सकाता है। इसी समय को इन्क्यूबेशन अवधि कहा जाता है। ऐसे में लक्षण नजर न आने पर भी संक्रमण फैल सकता है। वहीं इसके साथ एक और वर्ल्ड हर्ड एम्युनिटी शब्द काफी प्रचलित हुआ जिसका मतलब ये था कि ऐसे लोग जिनमें कोरोना वायरस से लड़ने की क्षमता है और वो कोरोना से सुरक्षित हैं।
आइसोलेशन
कोरोनाकाल में आइसोलेशन शब्द भी खूब प्रचलित हुआ। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए लोगों को अलग किया गया। इस अलग-थलग रखने के इस प्रयास को आइसोलेशन कहा जाता है । इस दौराना लोगों की जुबान पर ये शब्द आम तौर पर सुनने को मिला कि हम आइसोलेशन में हैं। जो लोग खुद को स्वयं ही अलग कर देते हैं से सेल्फ आइसोलेशन कहा जाता है। इस स्थिति में लोग स्वस्थ होने पर भी दूसरे से मिलते नहीं हैं ऐसी स्थिति में लोग आमतौर पर लोग अपने घर पर ही रहते हैं इसे होम आइसोनेशन कहते हैं। इस आइसोलेशन के जरिए लोग स्वयं को वायरस के संपर्क में आने से बचाते हैं।
क्वारंटाइन
विदेश या बाहर से आने वाले व्यक्ति को बिलकुल अलग रखने की प्रक्रिया को क्वारंटाइन कहा जाता है। इसके जरिए यदि वह शख्स वायरस से संक्रमित है भी, तो वायरस को फैलने से रोका जा सकता है। कोरोना काल में विदेश से यात्रा करके आए लोगों के अलावा घरेलू विमानों और ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों को अन्य लोगों के संपर्क में आने से रोकने के 15 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया जाने की व्यवस्था की गई थी। जिसका सख्ती से पालन किया गया था। इस दौरान उसके लक्ष्णों पर नजर रखी जाती है और कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर इलाज किया जाता है। यदि बाहर से आने वाला शख्स किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आया है जहां संक्रमण अधिक और वह खुद को अलग कर लेता है, तो इसे सेल्फ क्वारंटाइन बोला जाता है। ये शब्द भी 2020 में बहुत प्रचलित रहा।












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