आज एलएसी पर मिल सकते हैं भारत और चीन के कमांडर
लेह। भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी विवाद के बीच ही आज दोनों देशों के कमांडरों की मुलाकात हो सकती है। भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख के बर्तसे में आमना-सामना हुआ था। बर्तसे लद्दाख का वह हिस्सा है जिसे चीन अपना बताता आया है।

यहां पर इंडियन आर्मी और आईटीबीपी के जवानों ने चीन के सैनिकों की ओर से बनाया गया एक वॉचटावर गिरा दिया था। यह टॉवर एलएसी के डेढ़ किलोमीटर तक अंदर बना लिया गया था। बर्तसे लेह से करीब 210 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
सैनिकों की ओर से जो जानकारी दी गई उसके मुताबिक इस वॉचटावर के ऊपर एक छप्पर था जिस पर सोलर पैनल और एक कैमरा लगा था। इस कैमरे के जरिए चीन भारतीय सैनिकों की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहा था। चीन की सेना ने इस इलाके पर अपना हक जताते हुए इस वॉच टावर को बनाया था।
यह इलाका देपसांग मैदान से लगा हुआ है और देपसांग वही जगह है जहां पर पीएलए ने अप्रैल 2013 में अपने कैंप लगाए थे। वर्ष 2013 की उस घटना की वजह से दोनों देशों के बीच तीन हफ्तों तक गतिरोध रहा था।
वॉच टावर को गिराए जाने के बाद भारतीय सैनिकों ने कैमरा और दूसरा सारा सामान रख लिया। इस सामान को भारतीय कमांडर चीन के कमांडर को मुलाकात के दौरान सुबूत के तौर पर पेश करेंगे।
पहले यह मीटिंग रविवार को होने वाली थी लेकिन बाद में इसे सोमवार के लिए टाल दिया गया। चीन बर्तसे इलाके में सड़क बनाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि यह पीएलए को ओल्ड पेटोल बेस में भारतीय सैनिकों की गतिविधियों की निगरानी आसान बना देगा। इसके अलावा यह काराकोरम राजमार्ग पर भारत की निगरानी को कम करने में मदद करेगा।












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