'भाजपा के पहले पीएम अटल नहीं नरसिम्हा राव', मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस के ही दो पूर्व PM को घेरा
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर की आत्मकथा 'मेमोयर्स ऑफ ए मावेरिक' का दिल्ली में विमोचन हुआ। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले अय्यर ने अपनी आत्मकथा के विमोचन के मौके पर अपनी ही पार्टी के दो पूर्व प्रधानमंत्री को लेकर ऐसे खुलासे किए हैं, जिसके बाद ये माना जा रहा है कि ये बयान कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

अय्यर ने कहा 'पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव एक सांप्रदायिक सोच वाले व्यक्ति थे इसके साथ ही उन्होंने कहा भाजपा के पहले प्रधानमंत्री अटल बिहार बाजपेयी नहीं नरसिम्हा राव भाजपा के पहले पीएम थे।'
वहीं जगरनॉट बुक्स द्वारा प्रकाशित अपनी इस पुस्तक के विमोचन के अवसर पर प्रश्नोत्तर सत्र में जब अय्यर से बाबरी मज्जिद के मुद्दें को लेकर राजीव गांधी की उनकी आलोचना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा 'मुझे लगता है कि मंदिर का शिलान्यास गलत था। वहीं अय्यर ने कहा उन्हें राम-रहीम यात्रा के संदर्भ में ये पता चला गया था कि पी वी नरसिम्हा राव कितने साम्प्रदायिक और हिंदूवादी थे।
राव ने कहा था- आप नहीं समझते ये हिंदू राष्ट्र है
मणिशंकर अय्यर ने बताया कि राव को मेरी 'राम रहीम यात्रा' से कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन वो धर्मनिरपेक्षता की मेरी परिभाषा से अहमत थे। जब मैंने उसने पूछा कि मेरी धर्मनिरपेक्षता की भाषा में क्या गलत है तब पूर्व पीएम राव ने कहा था कि आप ये नहीं समझते कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है।
जब मज्जिद टूट रही थी तब वो पूजा करते थे
मणिशंकर अ्य्यर ने कहा ये सुनकर मैं अचंभित होकर कुर्सी पर बैठ गया और कहा कि ऐसा ही तो भारतीय जनता पार्टी भी कहती है। उन्होंने कहा जब मज्जिद टूट रही थी तब वो पूजा करते थे इसलिए मैं ये ही मानता हूं। इस वाकये का जिक्र करते हुए ही मणिशंकर अय्यर ने कहा कि भाजपा के पहले पीएम अटल बिहारी नहीं पी नरसिम्हा राव भाजपा के पहले प्रधानमंत्री थे।
पूर्व पीएम के स्वर्गीय राजीव गांधी के बारे में बोली ये बात
इसके साथ ही अय्यर ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से अपने रिश्ते दिसंबर 1978 से जनवरी 1982 के बीच में महावाणिज्यदूत में अपने कार्यकाल के बारे में बात की। 1985 से 1989 तक राजीव गांधी के पीएमओ का हिस्सा रहे अय्यर ने कहा मेरी समस्या ये थी कि मैं राजीव गांधी का विश्वास पात्र नहीं था। मुझे ये लगता है कि वो मेरे बारे में सोचते थे कि मैं अनुभवहीन हूं क्योंकि उन्होंने मुझसे कभी सलाह नहीं थी और ना ही किसी राननीतिक मुद्दे पर मेरी राय ली।












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