सीतारमण की कर कटौती से अर्थव्यवस्था को मामूली बढ़त, उपभोक्ता कर्ज चुकाने में लगाएंगे बचत: रिपोर्ट
केंद्रीय बजट 2025 में 12 लाख तक की आय को कर मुक्त कर दिया है। देश में करो में की गई रिकॉर्ड कटौती से भारतीय अर्थव्यवस्था को सीमित गति मिलेगी, क्योंकि उपभोक्ता इस बचत का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में लगाएंगे और सरकार खर्च पर नियंत्रण रखेगी।
मोतिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के एक विश्लेषण के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा बजट में घोषित ₹1 लाख करोड़ (लगभग 12 बिलियन डॉलर) के टैक्स कट्स का असर आर्थिक विकास दर पर केवल 10-20 बेसिस पॉइंट्स तक ही होगा।

मोतिलाल ओसवाल के निखिल गुप्ता और तनिषा लाढा के अनुसार, उपभोक्ता टैक्स से मिली राहत का एक बड़ा हिस्सा अपने कर्ज चुकाने में लगाएंगे। पिछले एक दशक में उपभोक्ताओं का कर्ज उनकी आय के 35% से बढ़कर 52% हो चुका है। इससे घरेलू खर्च में होने वाली बढ़त को सरकार के धीमे खर्च से संतुलित कर दिया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को बजट पेश करते हुए टैक्स कट्स की घोषणा की थी, लेकिन बुनियादी ढांचे पर खर्च में केवल 10% की मामूली वृद्धि की। जबकि, 2021 से 2024 के बीच सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च हर साल 30% बढ़ रहा था, इस बार इसमें अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि की गई है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, करदाताओं के हाथ में अधिक पैसा आने से खर्च जरूर बढ़ेगा, लेकिन कई अहम पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।












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