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दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंची लद्दाख के लिए लड़ाई, एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को रिहा करने की मांग

लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। जिसमें उन्हें रिहा करने की मांग की गई। याचिका मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष पेश की गई। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 3 अक्तूबर की तारीख तय की है।

लद्दाख के एक्टविस्ट सोनम वांगचुक के साथ के 100 से ज्यादा साथी हैं। वे लेह से चलकर अपने साथियों के साथ दिल्ली पहुंचे। जहां दिल्ली पुलिस ने सोमवार की रात सिंघु बॉर्डर पर उन्हें हिरासत में ले लिया। दिल्ली में बिना अनुमति प्रदर्शन के चलते दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को हिरासत में ले लिया था। जिसके बाद पुलिस के इस एक्शन को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में अगले दिन मंगलवार यानी आज एक याचिका दायर की गई।

Delhi High Court

वांगचुक की रिहाई की मांग की वाली याचिका पर सुनवाई के लिए अदालत समहत हो गई है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुनवाई से पहले आज दोपहर 3:30 बजे तक सभी आवश्यक दस्तावेज दाखिल किए जाने के निर्देश दिए।

वांगचुक की रिहाई की मांग की वाली याचिका पर सुनवाई के लिए अदालत समहत हो गई है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुनवाई से पहले आज दोपहर 3:30 बजे तक सभी आवश्यक दस्तावेज दाखिल किए जाने के निर्देश दिए।

गरमाई राजनीति

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने पर सरकार पर तीखा वार किया। अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस के एक्शन को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली में आने से कभी किसानों को रोकते हैं, कभी लद्दाख के लोगों को रोकते हैं। कहा कि दिल्ली में आने का सब को अधिकार है, किसी को रोकना सरासर गलत है। कहा कि निहत्थे शांतिपूर्ण लोगों से आखिर इन्हें क्या डर लग रहा है?

वहीं मुख्यमंत्री आतिशी दोपहर एक बजे सोनम वांगचुक से मिलने बवाना थाने पहुंची थीं। लेकिन उन्हें भी लद्दाख के एक्टिविस्ट से नहीं मिलने दिया गया।

क्या है सोनम वांगचुक की मांग?
सोनम वांगचुक की प्रमुख मांग लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की है। जिससे स्थानीय लोगों को अपनी भूमि और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए कानून बनाने की शक्ति मिल सके। इसके लिए वांगचुक और लगभग 75 स्वयंसेवकों ने 1 सितंबर को अपना पैदल मार्च शुरू किया था।

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