पढ़िए आजादी के मतवालों के जोश भर देने वाले 15 बोल
आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर भले ही हम अपनी मर्जी से जी रहे हैं, लेकिन इसका पूरा श्रेय जाता है देश के उन क्रांतिकारियों को, जिन्होंने अपनी जान तक देश पर न्यौछावर करके हमें ये आजादी दिलाई है। इस आजादी के लिए किसी ने सत्य, अहिंसा और धर्म का रास्ता अपनाया, तो किसी ने हमारी रक्षा के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया।
इन क्रांतिकारियों की जिंदगी का मकसद सिर्फ और सिर्फ देश को आजादी दिलाना था। इस आजादी के लिए किसी ने सीने पर गोली खाई, तो कोई हंसते-हंसते सूली पर चढ़ गया। आइए आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर 15 अगस्त के दिन पढ़ते हैं आजादी के मतवालों के दिल में जोश भर देने वाले 15 बोल-

पढ़िए आजादी के मतवालों के जोश भर देने वाले 15 बोल
भगत सिंह का जन्म एक जाट परिवार में सितंबर 1907 में हुआ था। वह आजादी को ही अपनी दुल्हन मानते थे। आजादी के लिए लड़ते-लड़ते महज 23 साल की उम्र में ही 23 मार्च 1931 को उन्हें सूली पर चढ़ा दिया गया।

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चंद्रशेखर आजाद सिर्फ 14 साल की उम्र में ही 1921 में गांधी जी के असहयोग आंदोलन से जुड़ गए थे और तभी उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया था। जब चंद्रशेखर से उनके पिता का नाम पूछा था तो उन्होंने अपना नाम आजाद, पिता का नाम स्वतंत्रता और पता जेल बताया।

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चंद्रशेखर आजाद को एक बार इलाहाबाद में पुलिस ने घेर लिया था, उस वक्त उन्होंने खुद को गोली मार ली थी ताकि वह पुलिस के हाथ न आएं। चंद्रशेखर का जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था और इनकी मृत्यु 27 फरवरी 1931 को हुई।

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भारत की आजादी के इतिहास में अमर शहीद भगत सिंह का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। भगद सिंह आजादी को ही अपनी दुल्हन मानते थे। वह कहते थे- 'मेरी दुल्हन तो आजादी है'।

पढ़िए आजादी के मतवालों के जोश भर देने वाले 15 बोल
2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में महात्मा गांधी का जन्म हुआ था, जो अहिंसा के रास्ते पर चलते थे। गांधी जी को राष्ट्रपिता की उपाधि मिली हुई थी। गांधी जी को बापू कहकर भी पुकारा जाता है। 30 जनवरी 1948 को नाथुराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी।

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अशफाक उल्ला खां ने कारोरी कांड में प्रमुख भूमिका निभाई थी। अशफाक का जन्म सन् 1900 में हुआ था और 19 दिसंबर 1927 को उन्हें फैजाबाद जेल में फांसी दे दी गई।

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बाल गंगाधर तिलक भारत के प्रमुख नेता, समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका जन्म 23 जुलाई 1856 में हुआ था और 1 अगस्त 1920 को उनकी मृत्यु हो गई। बाल गंगाधर तिलक ने ही ब्रिटिश राज में सबसे पहले स्वराज की मांग उठाई थी।

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वासुदेव बलवंत फड़के का जन्म 4 नवंबर 1845 को हुआ था। वासुदेव को आदि क्रांतिकारी भी कहा जाता था। उनका मानना था कि ब्रिटिश काल की दयनीय दशा जैसे रोग की दवा सिर्फ स्वराज ही है। फड़के की मृत्यु 17 फरवरी 1883 में हुई थी।

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करतार भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद करने के लिए अमेरिका में बनी गदर पार्टी के अध्यक्ष थे। करतार सिंह को भगत सिंह अपना आदर्श मानते थे। करतार सिंह का जन्म 24 मई 1896 में हुआ था और 16 नवंबर 1915 को महज 19 साल की उम्र में ही उन्हें फांसी पर लटका दिया गया।

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2 अक्टूबर 1904 को जन्मे लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। शास्त्री जी करीब 18 महीने तक देश के प्रधानमंत्री रहे। वह 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक प्रधानमंत्री रहे, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।

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28 जनवरी 1865 को जन्मे लाला लाजपत राय ने पंजाब नेशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कंपनी की स्थापना की थी। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक थे। साइमन कमीशन के विरुद्ध प्रदर्शन में हुए लाठीचार्ज वह बुरी तरह घायल गए थे, जिसके बाद 17 नवंबर 1928 को उनकी मौत हो गई।

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राजेन्द्रनाथ ने भी काकोरी कांड में काफी अहम भूमिका निभाई थी। इनका जन्म 1901 में हुआ था और उनकी मृत्यु 1927 में हुई।

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राम प्रसाद बिस्मिल एक क्रांतिकारी होने के साथ-साथ एक कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार और साहित्यकार थे। बिस्मिल का जन्म 11 जून 1897 को हुआ था। उनकी मृत्यु 1927 में हुई थी।

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सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था। उनका नारा था- तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। जय हिंद का नारा भी बोस ने ही दिया था। 18 अगस्त 1945 को सुभाष चंद्र बोस की मौत हो गई थी।

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1892 में जन्मे ठाकुर रोशन सिंह ने राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां के साथ काकोरी कांड में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हीं लोगों के साथ ठाकुर रोशन सिंह को भी 19 दिसंबर 1927 को फांसी दे दी गई।
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