नौसेना को सौंपी गई 5वीं स्कॉर्पीन पनडुब्बी 'वजीर', समुद्र में बढ़ेगी ताकत
भारतीय नौसेन की ताकत और बढ़ेगी। क्योंकि 5वीं स्कॉर्पीन पनडुब्बी वजीर मंगलवार को सौंप दी गई है।

सबमरीन परियोजना के तहत पांचवीं पनडुब्बी - 75, कैलवरी क्लास पनडुब्बी, यार्ड 11879 मंगलवार को भारतीय नौसेना को सौंप दी गई। प्रोजेक्ट-75 में स्कॉर्पीन डिजाइन की छह पनडुब्बियों का स्वदेशी निर्माण शामिल है। इन पनडुब्बियों का निर्माण मैसर्स नेवल ग्रुप, फ्रांस के सहयोग से मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) मुंबई में किया जा रहा है। 12 नवंबर 20 को लॉन्च की गई वागीर ने 01 फरवरी 22 से समुद्री परीक्षण शुरू किया और यह बड़े गर्व की बात है कि उसने पहले की पनडुब्बियों की तुलना में कम से कम समय में हथियार और सेंसर परीक्षणों सहित सभी बड़े परीक्षणों को पूरा किया है।
आपको बता दें कि पनडुब्बी का निर्माण एक जटिल गतिविधि है क्योंकि कठिनाई तब बढ़ जाती है जब सभी उपकरणों को छोटा करने की आवश्यकता होती है। भारतीय यार्ड में इन पनडुब्बियों का निर्माण 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक और कदम है। इस कदम से भारत आत्मविश्वास इस क्षेत्र में बढ़ेगा। ANI की एक रिपोर्ट्स की मानें तो जल्द ही पनडुब्बी भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। इसके शामिल होते ही भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ जाएगी।
जानिए क्या पनडुब्बी निर्माण का प्रोजेक्ट?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 25 पनडुब्बियों के अधिग्रहण का फैसला गुजराल सरकार ने किया था। इन पनडुब्बियों के निर्माण के लिए 30 वर्ष की योजना बनाई गई थी। इसी के तहत भारत व फ्रांस ने 6 पनडुब्बियों के निर्माण के लिए 2005 में 3.75 मीलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किया था। आपको बता दें कि इस परियोजना के तहत तीन महीने के अंदर नौसेना को तीसरी पनडुब्बी सौंपी गई है।
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