तीसरे बच्चे की मां है या नहीं, ये पता लगाने के लिए महिला सरपंच को कराना होगा DNA टेस्ट

गुजरात के अमरेली जिले में बड़ा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां महिला सरपंच को डीएनए टेस्ट करवा ये साबित करने को कहा गया है कि तीसरा बच्चा उसका अपना नहीं है। टेस्ट से अगर ये साबित हो जाता है कि तीसरा बच्चा उसी का है, तो उसे अयोग्य करार दे दिया जाएगा।

अहमदाबाद। गुजरात के अमरेली जिले में बड़ा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां महिला सरपंच को डीएनए टेस्ट करवा ये साबित करने को कहा गया है कि तीसरा बच्चा उसका अपना नहीं है। टेस्ट से अगर ये साबित हो जाता है कि तीसरा बच्चा उसी का है, तो उसे अयोग्य करार दे दिया जाएगा। अमरेली जिले के तोरी गांव की सरपंच ज्योति राठौर को जिला विकास अधिकारी ने डीएनए टेस्ट करवाने का निर्देश दिया है।

DNA

ज्योति पिछले साल दिसंबर में गांव की सरपंच चुनी गई थीं। बाला राठौर नाम के व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि ज्योति के दो नहीं, तीन बच्चे हैं। उनकी 6 साल की एक बेटी भी है। उनपर कागजातों से भी छेड़छाड़ का आरोप है। बाला राठौर के मुताबिक, 'बच्ची का नाम नीता है, जोकि ज्योति का ही दूसरा नाम है और पिता का जो नाम है, वो भी फर्जी है। ये कागजात तीसरे बच्चे की पहचान छिपाने के लिए तैयार किए गए हैं।'

बाला राठौर ने कहा कि डीएनए टेस्ट से ये साबित हो जाएगा कि वो बच्ची ज्योति की ही बेटी है। इस शिकायत पर टीडीओ एनपी मालवीय ने सरपंच ज्योति को संस्पेंड कर दिया था। अब उन्हें डीएनए टेस्ट से साबित करना होगा कि बच्ची उनकी तीसरी संतान नहीं है, क्योंकि अगर टेस्ट सकारात्मक आता है तो उन्हें अयोग्य करार दे दिया जाएगा। पंचायती राज एक्ट के तहत अगर सरपंच की दो से अधिक संताने हैं तो उसे अयोग्य करार कर दिया जाता है।

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