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Physical Relation क्या सहमति से बनाना जुर्म है? SC ने महिला वकील को क्यों लगाई फटकार?

Female Lawyer Physically Intercourse With Client: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में एक महिला वकील को कड़ी फटकार लगाई, जब पता चला कि उसने अपने क्लाइंट (जो तलाक का केस लड़ रहा था) के साथ अंतरंग संबंध बनाए थे। अदालत ने साफ कहा कि सहमति से संबंध बनाना कोई अपराध नहीं है, लेकिन एक वकील का ऐसा व्यवहार प्रोफेशनल एथिक्स का उल्लंघन है। इस फैसले ने कानूनी बिरादरी में बहस छेड़ दी है कि क्या वकील-क्लाइंट रिलेशन में पर्सनल बॉन्ड्रीज का पालन जरूरी है?

अदालत ने क्लाइंट को अग्रिम जमानत दी, लेकिन वकील को 'इस मेस से बाहर निकलने' की सलाह दी। आइए, इस मामले को समझते हैं - सहमति से संबंध पर कानून क्या कहता है? यह केस बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों और प्रोफेशनल कंडक्ट पर सवाल उठाता है?

Female Lawyer Physically Intercourse With Client

Lawyer Physically Intercourse With Client: मामला क्या है? बैकग्राउंड और घटनाक्रम

यह केस महाराष्ट्र का है, जहां एक आईटी प्रोफेशनल (आरोपी) ने अपनी पत्नी से तलाक के लिए एक महिला वकील की मदद ली। तलाक का केस चलते समय वकील और क्लाइंट के बीच अंतरंग संबंध बन गए। तलाक मिलने के बाद क्लाइंट ने शादी का वादा तोड़ा, तो वकील ने उस पर बलात्कार का केस दर्ज कराया। क्लाइंट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी, लेकिन खारिज हो गई। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच (Justice BV Nagarathna और Justice R Mahadevan) ने 22 नवंबर 2025 को सुनवाई की। अदालत ने पाया कि संबंध सहमति से थे, और वकील ने क्लाइंट को 'लवर' के रूप में देखा। लेकिन अदालत ने वकील के प्रोफेशनल कंडक्ट पर सवाल उठाया - वह क्लाइंट की तलाक की केस लड़ रही थीं, फिर खुद उसी से रिश्ता क्यों बनाया? अदालत ने कहा कि वकील का क्लाइंट से ऐसा संबंध बनाना ' पर्सनल और प्रुरिएंट इंटरेस्ट' (व्यक्तिगत और कामुक रुचि) दिखाता है, जो एथिक्स का उल्लंघन है।

अदालत ने क्लाइंट को अग्रिम जमानत दी, क्योंकि संबंध सहमति से थे और कोई बलात्कार नहीं। लेकिन वकील को फटकार लगाई:- 'आप वकील हैं, कोई अशिक्षित महिला नहीं। क्लाइंट को तलाक दिलाने में मदद कर रही थीं, और उसी से संबंध बना लिए? इस मेस में पड़ने की क्या जरूरत थी?' अदालत ने कहा कि वकील को प्रोफेशनल ड्यूटी और गरिमा बनाए रखनी चाहिए, खासकर जब क्लाइंट कमजोर स्थिति में हो।

क्यों लगाई फटकार? प्रोफेशनल एथिक्स और बार काउंसिल नियम

सुप्रीम कोर्ट ने सहमति से संबंध को अपराध नहीं माना, लेकिन वकील के आचरण पर सवाल उठाया। वजह:-

  • एथिक्स उल्लंघन: बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 1.7(a)(2) जैसे प्रावधान वकील-क्लाइंट संबंध में व्यक्तिगत हित (जैसे रोमांटिक रिलेशन) को रोकते हैं। यह क्लाइंट की कमजोरी का फायदा उठाना माना जाता है।
  • ड्यूटी ऑफ केयर: वकील क्लाइंट की भरोसे की स्थिति में होता है। तलाक के केस में क्लाइंट भावनात्मक रूप से कमजोर होता है, ऐसे में संबंध बनाना गलत।
  • प्रोफेशनल बॉन्ड्री: अदालत ने कहा कि वकील ' लॉयर और लवर' दोनों नहीं हो सकता। वकील ने दावा किया कि उसने फॉर्मल वैकलात्मिक नहीं लिया था, सिर्फ गाइड किया था, लेकिन अदालत ने खारिज किया।
  • पिछले केस: आरोपी के वकील ने कहा कि महिला वकील पहले 4 लोगों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगा चुकी हैं, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी सवाल उठाए थे।

सहमति से संबंध अपराध क्यों नहीं? कानूनी ऐंगल

भारतीय कानून (IPC सेक्शन 375) में सहमति से संबंध बलात्कार नहीं माने जाते, जब तक सहमति धोखे या दबाव से न ली गई हो। यहां अदालत ने पाया कि संबंध सहमति से थे, और दोनों शादी नहीं करना चाहते थे। इसलिए अपराध नहीं। लेकिन वकील का पद दुरुपयोग माना गया। अदालत ने कहा कि सहमति से संबंध जुर्म नहीं, लेकिन प्रोफेशनल रोल में यह अनैतिक है। बार काउंसिल डिसिप्लिनरी एक्शन ले सकता है।

फैसले के निहितार्थ: वकीलों के लिए सबक

  • एथिक्स पर जोर: अदालत ने वकीलों को चेतावनी दी कि क्लाइंट से पर्सनल रिलेशन अवॉइड करें।
  • महिला वकीलों पर असर: यह केस महिलाओं के लिए भी सबक - प्रोफेशनलिज्म बनाए रखें।
  • जमानत का आधार: क्लाइंट (लंदन में रहता है) को जमानत मिली, क्योंकि केस बेवजह का था।

यह फैसला 22 नवंबर 2025 का है, जो वकील-क्लाइंट रिलेशन पर नया प्रेसिडेंट सेट करता है। अगर वकील अपील करती हैं, तो और डेवलपमेंट्स आ सकते हैं।

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