“स्टेटहुड का इससे कोई लेना-देना नहीं”, जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों पर क्या बोले गए फारूक अब्दुल्ला
Farooq Abdullah on J&K Statehood: जम्मू-कश्मीर की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, और बहस का केंद्र बना है राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा। गुरुवार, 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में इसी मामले पर अहम सुनवाई हुई, जिसके बाद प्रदेश के वरिष्ठतम नेताओं में से एक और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष, डॉ. फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने मीडिया के सामने तीखा और स्पष्ट बयान दिया।
उन्होंने साफ कहा कि घाटी में होने वाले आतंकी हमलों के लिए केवल राज्य का दर्जा जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि यह घटनाएं उस समय भी होती थीं जब जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य था।

फारूक अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र और विपक्ष के बीच अनुच्छेद 370 हटाए जाने और राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर तीखी राजनीतिक जंग जारी है। यह टिप्पणी न सिर्फ वर्तमान सुरक्षा हालात पर सवाल उठाती है, बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों और कूटनीतिक रणनीति पर भी अप्रत्यक्ष दबाव बनाती है।
पूर्व CM फारूक अब्दुल्ला ने क्या कहा?
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कोई भी इस सच्चाई को नकार नहीं सकता। आतंकी घटनाएं तब भी होती थीं जब जम्मू-कश्मीर एक राज्य था। सिर्फ स्टेटहुड को जिम्मेदार ठहराना गलत है। ये तब तक होते रहेंगे, जब तक हमारे पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते नहीं बनते। आतंकी वहीं से आते हैं। अगर स्टेटहुड और पहलगाम हमले को जोड़ा जा रहा है, तो याद रखना चाहिए कि मेरे कार्यकाल में भी कई घटनाएं हुईं, लेकिन तब यह राज्य था।"
उन्होंने आगे कहा कि उस समय सरकार ने इन परिस्थितियों से सख्ती से निपटा था। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि "हमने तब इन घटनाओं का मुकाबला किया। आज भी लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस पर गंभीरता से विचार करेगा और हमारे अधिकार वापस दिलाएगा, जैसा कि सरकार ने संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह वादा किया है।"
SC hearing on J&K, Pahalgam terror attack: सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
फारूक अब्दुल्ला का यह बयान सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें अदालत ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र किया। अदालत ने कहा कि ज़मीनी हालात का आकलन करना सरकार का विशेषाधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा एक तय समय सीमा के भीतर बहाल करने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता, जो याचिकाकर्ताओं जाहूर अहमद भट और खुर्शीद अहमद मलिक का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने दिसंबर 2023 के अनुच्छेद 370 हटाने पर आए फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि तब अदालत ने राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर फैसला नहीं दिया था, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया था कि चुनाव के बाद इसे बहाल किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश भूषण आर गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा -"आपको ज़मीनी हकीकत को भी देखना होगा और यह नहीं भूलना चाहिए कि अप्रैल में पहलगाम में क्या हुआ था। हमारे पास हर विषय में विशेषज्ञता नहीं है और कुछ फैसले सरकार को ही लेने होते हैं।"
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोग, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे, की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया था और जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।












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