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'फारूक ने अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन नहीं किया', पूर्व रॉ प्रमुख की सफाई

पूर्व रॉ प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत की नई कितान 'द चीफ मिनिस्टर एंड द स्पाई' को लेकर ऐसी खबरें आने लगीं है कि इसमें पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (farooq abdullah) ने अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन किया था। हालांकि, अब इन अफवाहों पर खुद पूर्व रॉ प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत ने सफाई दी है।

पूर्व रॉ प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने किताब में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन किया था। कहा कि यह एक मीडिया द्वारा फैलाया गया झूठा दावा है और यह पुस्तक दरअसल फारूक अब्दुल्ला के राजनीतिक जीवन और उनके व्यक्तित्व की सराहना है, न कि किसी भी तरह की आलोचना।

Former RAW chief AS Dulat

"370 हटाने का समर्थन नहीं किया, दुख जरूर था"

एएनआई से बात करते हुए दुलत ने कहा, 'जब अनुच्छेद 370 को हटाया गया था, तो फारूक साहब इस पूरे घटनाक्रम से बहुत आहत थे। उन्होंने मुझसे कहा था कि यदि सरकार ऐसा करना चाहती थी, तो उन्हें विश्वास में लेना चाहिए था लेकिन इसके बजाय उन्हें नजरबंद कर दिया गया।'

उन्होंने यह भी बताया कि फारूक अब्दुल्ला, उनके बेटे उमर अब्दुल्ला और एक सांसद ने अनुच्छेद 370 हटाने से दो दिन पहले प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी, लेकिन बातचीत का ब्योरा साझा नहीं किया गया। उन्होंने आगे कहा कि मैंने फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ कुछ नहीं लिखा है। मेरी किताब उनकी तारीफ से भरी हुई है।

किताब विवादों में, लेकिन मकसद 'सम्मान'

दुलत ने दोहराया कि उनकी किताब का मकसद फारूक अब्दुल्ला जैसे कद्दावर नेता की राजनीतिक समझ, प्रतिबद्धता और राष्ट्रभक्ति को दिखाना है। कहा कि कोई कह रहा है कि मैंने किताब बेचने के लिए घटिया हरकत की है, तो मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मैं साफ करना चाहता हूं कि मैंने कहीं नहीं लिखा कि फारूक ने अनुच्छेद 370 के हटाए जाने का समर्थन किया।

"दोस्ती तुच्छ बातों से नहीं टूटती"

उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला हमेशा दिल्ली के साथ खड़े रहे, लेकिन दिल्ली ही उन्हें कभी समझ नहीं पाई। जब पूछा गया कि क्या इस विवाद से फारूक अब्दुल्ला के साथ उनकी दोस्ती प्रभावित हुई है, तो दुलत ने कहा,किसी के कुछ कह देने से दोस्ती खत्म नहीं होती। मुझे पूरा विश्वास है कि वह मेरी किताब के विमोचन में जरूर आएंगे। अगर नहीं आते हैं तो यह उनका निर्णय होगा।

"कश्मीर को आगे बढ़ाने की ताकत सिर्फ नेशनल कॉन्फ्रेंस में है"

पूर्व रॉ प्रमुख ने कहा कि कश्मीर में कोई भी नेता फारूक अब्दुल्ला के आधे कद का भी नहीं है। इस दौरान उन्होंने कहा कि वे न केवल सबसे अनुभवी नेता हैं, बल्कि सबसे बड़े राष्ट्रवादी भी हैं। केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस ही कश्मीर को आगे ले जा सकती है। अन्य दलों को भी इसमें सहयोग करना होगा।

महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा?

पूर्व RAW प्रमुख दुलत की पुस्तक में अनुच्छेद 370 पर फारूक अब्दुल्ला के रुख पर PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मुझे यह पढ़कर कोई आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस का रुख यही रहा है कि सत्ता के लिए वे कुछ भी कर सकते हैं। यह 1947 से ही चल रहा है... कभी-कभी वे सत्ता में होने के कारण भारत के साथ आना चाहते थे।

अगर नहीं, तो वे चर्चा करना चाहते थे। वे (शेख अब्दुल्ला) लोगों के साथ 22 साल तक जेल में रहे, लेकिन जब वे सत्ता में आए, तो चर्चा बंद हो गई। 1987 में कुर्सी के लिए किस तरह धांधली की गई, और उसका नतीजा यह हुआ कि घाटी में बंदूकें आ गईं, और हमारे लाखों नौजवानों की जान चली गई। जब PDP और BJP के बीच बातचीत चल रही थी, तो उमर अब्दुल्ला कई बार दिल्ली गए और उन्हें बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की।

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