सु्प्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, आप नहीं चाहते तो हम लगाएंगे नए कृषि कानूनों पर रोक, सुनवाई कल तक के लिए टली

LIVE: CJI ने सरकार से पूछा- आप कानून लागू करने से रोकेंगे या हम उठाएं कदम?

Farmers Protest Update: केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नए कृषि कानूनों (Fram Laws) और इनके विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर दायर याचिकाओं पर आज (11 जनवरी) सुप्रीम कोर्ट सुनवाई हुई। कानूनों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बोबडे ने केंद्र से पूछा है कि क्या आप नए कृषि कानूनों को फिलहाल लागू करने से रोक सकते हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर आप ऐसा नहीं चाहते हैं तो अदालत इन नए कृषि कानूनों पर रोक लगाएगी। अदालत ने एक कमेटी बनाने की बात कही है, जो नए कृषि कानूनों को लेकर रिपोर्ट देगी। अदालत मामले में मंगलवार को फिर सुनवाई करेगी।

Farmers protest Supreme court hearing CJI says CJI says if Centre does not want we will put stay on farm laws

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    सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बोबड़े किसान आंदोलन को लेकर अब तक सरकार की तरफ से उठाए कदमों से नाखुश दिखे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सरकार इस मामले को हैंडल कर रही है, हम उससे खुश नहीं हैं। अब भी आपकी ओर से कोई पहल होती नहीं दिख रही है। पिछली सुनवाई में भी बातचीत चलने के बारे में कहा गया और अब भी। हम ये जानना चाहते हैं कि क्या इन कानूनों को फिलहाल के लिए रोका नहीं जा सकता है?

    कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सीजेआई ने कहा कि अगर केंद्र सरकार कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक नहीं लगाना चाहती तो हम इन पर रोक लगाएंगे। हम एक्सपर्ट कमेटी बनाना चाहते हैं, तबतक सरकार इन कानूनों को रोके वरना हम एक्शन लेंगे। इस पर केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के ऐसे फैसले हैं जो कहते हैं कि कोर्ट कानून पर रोक नहीं लगा सकते।

    चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान सरकार की इस दलील पर भी नाराजगी जताई कि कानून तो पिछली सरकार भी लाना चाहती थी। उन्होंने कहा कि ये दलील मत दीजिए, आप बताइए कि कैसे इसका हल निकलेग। अदालत ने कहा कि हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं, लोग ठंड में बैठे हैं और वहां मौतें हो रही हैं।

    चीफ जस्टिस ने ये भी कहा कि हम आंदोलन को खत्म नहीं करना चाह रहे हैं। हम ये जानना चाहते हैं कि अगर कानून रुक जाता है, तो क्या आप आंदोलन की जगह बदलेंगे जब तक एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट ना आए। हम चाहते हैं कि कमेटी उसका समाधान करे। इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट अदालत सरकार के हाथ बांध रही है, हमें ये भरोसा मिलना चाहिए कि किसान कमेटी के सामने बातचीत करने आएंगे। किसानों को कमेटी में आने का भरोसा देना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि सरकार से बातचीत के दौरान किसानों का रवैया सहयोगपूर्ण नहीं रहा है।

    जी केके वेणुगोपाल ने कोर्ट में बताया- कि 2000 किसान प्राइवेट पार्टियों के साथ पहले ही करार कर चुके हैं। अब ऐसे में कृषि कानूनों पर रोक लगाने से उनका भारी नुकसान होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम कानून पर नहीं, फिलहाल उसके अमल पर रोक लगा रहे हैं।

    बता दें कि केंद्र सरकार बीते साल तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून के महीने से लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। वहीं बीते 26 नवंबर से किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। टिकरी, गाजीपुर और दिल्ली के दूसरे बॉर्डर पर भी किसान जमा हैं। दिल्ली बॉर्डर में किसानों के आने के बाद सरकार और किसान नेताओं में आठ दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है।

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