किसान आंदोलन के बाद पुलिस बैरिकेडिंग से बढ़ी मुश्किलें, सिंघु बॉर्डर पर खेतों से गुजर रहे वाहन
Farmers protest:
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली के बॉर्डरों पर आंदोलन कर रहे हैं। हरियाणा और दिल्ली को जोड़ने वाले सिंघु बॉर्डर पर सबसे ज्यादा संख्या में किसान धरने पर बैठे हैं। किसानों के धरने और पुलिस की बैरिकेडिंग के चलते इस हाइवे से जाने वालों को काफी परेशानी हो रही है। वहीं आसपास के लोगों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ा रहा है।
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सिंघु बॉर्डर पर जिस हाईवे पर किसान बैठे हैं, वो दिल्ली से सोनीपत होते हुए पंजाब तक जाता है। किसान 26 नवंबर से यहां धरने पर हैं, वहीं 26 जनवरी के बाद पुलिस ने बैरिकेडिंग बहुत बढ़ा दी है। दिल्ली पुलिस ने धरनास्थल से करीब दो किमी पहले ही ट्रैफिक रोका हुआ है। ऐसे में लोगों को छोटे कच्चे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। भारी बैरिकेडिंग और किसी को भी आने जाने की इजाजत ना होने से आसपास के लोग भी छोटे छोटे कामों को लिए परेशानी का सामना कर रहे हैं।
आंदोलनकारी किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी
26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद पुलिस ने जिस तरह से सिंघु बॉर्डर को पूरी तरह से सील कर दिया है। उसका सीधार असर आंदोलन स्थल की मूलभूत सुविधाओं पर पड़ा है और किसानों को भारी परेशानी हो रही है। शौचालय, पानी की सप्लाई और इंटरनेट सेवाओं पर रोक से किसान कई तरह की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। दरअसल सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली की तरफ दिल्ली सरकार की ओर से अस्थायी टॉयलेट लगाए गए थे। अब पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग इतने ज्यादा कर दिए हैं कि आना जाना ही बंद हो गया है।
बता दें कि केंद्र सरकार बीते साल जून में तीन नए कृषि कानून लेकर आई थी, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून के महीने से लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसानों का आंदोलन जून, 2020 से नवंबर तक मुख्य रूप से हरियाणा और पंजाब में चल रहा था। वहीं 26 नवंबर, 2020 से देशभर के किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर गाजीपुर बॉर्डर और दिल्ली के दूसरे बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं।












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