Farmers protest: जमानत के बाद पत्रकार मनदीप पुनिया ने कहा- 'जेल से किसानों पर रिपोर्ट पैर पर लिखकर लाया हूं'
kisan Aandolan: जमानत के बाद पत्रकार मनदीप पुनिया ने कहा- 'जेल से किसानों पर रिपोर्ट पैर पर लिखकर लाया हूं'
Journalist Mandeep Punia on Farmers protest: स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया को दिल्ली रोहिणी कोर्ट ने मंगलवार (03 फरवरी) को जमानत दे दी है। दिल्ली पुलिस ने मनदीप पुनिया को सिंघू बॉर्डर प्रदर्शन स्थल से गिरफ्तार किया था ,जहां किसान आंदोलन जारी है। तिहाड़ जेल से बाहर आकर मनदीप पुनिया ने कहा है, मुझे रिपोर्टिंग करने से रोका गया और जेल में डाल दिया गया। मैंने जेल में गिरफ्तार किए गए किसानों से बातचीत की है और उनपर जल्द ही मैं अपनी रिपोर्ट लिखूंगा।'' उन्होंने कहा कि वो जेल में किसानों से हुई बातचीत का अंश अपने पैर पर लिखकर लाए हैं। जिसकी तस्वीरें उनके कथित ट्विटर हैंडल पर भी है। मनदीप पुनिया ने मांग की है कि जेलों में बंद पत्रकारों को जल्द से जल्द रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए था?

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क्या मेरी गिरफ्तारी होनी चाहिए थी?- स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया
एनडीटीवी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया ने ट्वीट किया है, ''मुझे जमानत मिली, इसके लिए मैं माननीय अदालत को धन्यवाद देना चाहुंगा। पर क्या मेरी गिरफ्तारी होनी चाहिए थी? ये जरूरी सवाल है। कप्पन को भी छोड़ा जाना चाहिए, और उन्हें अपना काम करने दिया जाना चाहिए।''
मनदीप पुनिया ने अपने कथित ट्विटर अकाउंट पर एक के बाद एक कई ट्वीट किए। मनदीप पुनिया ने कहा, मैं सभी पत्रकारों, एडिटर गिल्ड, संघर्ष के साथियों, राजनीतिक दलों और नेताओं का शुक्रिया अदा करूंगा जो मेरे साथ खड़े रहे और मेरे रिपोर्टिंग करने के अधिकार के लिए आवाज उठाते रहे। ईमानदार रिपोर्टिंग की इस वक्त देश को जरूरत है। अफवाहबाजी की सही दवा एक स्वतंत्र प्रेस है। पत्रकारिता कोई संतुलनकारी कार्य नहीं है, खासकर ऐसे वक्त में, जब सरकार लोगों से कुछ छिपाना चाह रही हो, तब पत्रकारिता करना मुश्किल हो जाता है। सत्ता को सच का पता होता है, पर वो सच लोगों को पता चलना चाहिए।
पुलिस ने मुझे रिपोर्टिंग करने से रोका: स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया
स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया ने कहा, ''पहले दिन से किसान आंदोलन की रिपोर्टिंग कर रहा हूं और जिस तरह से सत्तापक्ष की गोद में बैठा मीडिया इस आंदोलन को बदनाम करने में तुला है, उससे बहुत दुख होता है।''
मनदीप ने कहा, ''गिरफ्तारी से मेरा काम बाधित हुआ और मेरा कीमती समय खराब हुआ। मुझे लगता है कि मेरे साथ गलत हुआ है। पुलिस ने मुझे मेरा काम करने से रोका है। मुझे इस बात का अफसोस है। उस हिंसा का नहीं जो मेरे साथ हुई। इस घटना ने रिपोर्टिंग करने के मेरे संकल्प को और भी मजबूत किया है। ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग करना सबसे जोखिमभरा है लेकिन पत्रकारिता का सबसे अहम हिस्सा है।''












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